हसनापुर गांव में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने के बाद महिलाओं में आक्रोश। कैमरे पर महिलाओं ने रखी अपनी बात और प्रशासन से की कार्रवाई की मांग।
आखिर क्या है पूरा मामला? महिलाओं ने कैमरे पर क्या बड़ी बात कही? देखिए ग्राउंड रिपोर्ट।
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हसनगंज तहसील के हसनापुर गांव में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि आंबेडकर स्थल की जमीन की पैमाइश के लिए 3 साल से तहसील में आवेदन दिए जा रहे थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने जमीन कारोबारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।
सवाल बड़ा है—तीन साल से लंबित पैमाइश पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर समय रहते पैमाइश और बाउंड्री हो जाती तो क्या यह घटना रोकी जा सकती थी?
आरोपों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों के जवाब से होना बाकी है। पूरी ग्राउंड रिपोर्ट वीडियो में देखें।
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4PM की खबर का बड़ा असर!
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में सामने आई खामियों के बाद बड़ा एक्शन।
✅ PNC के 3 अधिकारी हटाए गए।
✅ मरम्मत पूरी होने तक टोल फ्री।
आखिर 4200 करोड़ की लागत से बने एक्सप्रेसवे में इतनी जल्दी खराबी क्यों आई? जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
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15 दिन में ही टूटने लगा ₹4700 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे!
मरम्मत की कवरेज करने पहुँची 4PM की टीम को PNC के अधिकारियों ने रोकने की कोशिश की। अगर सब कुछ ठीक है तो रिपोर्टिंग से डर क्यों?
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आज भी उत्तर प्रदेश में जिगर कलेजे वाले पत्रकार शानदार पत्रकारिता कर रहे हैं, ऐसा तभी हो पाता है जब उसका संस्थान उसके साथ अंत तक उसकी सच्ची रिपोर्टिंग के साथ खड़ा रहे ।
4700 करोड़ का एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही टूट गया..खबर कवर करने पहुंचे पत्रकार को अफसर और ठेकेदार रोकने पहुंच गए..!
जनता के 4700 करोड़ का हिसाब मांगने अथवा
BJP के भ्रष्टाचार की टूटी सड़क की खबर कवरेज करने ग्राउंड जीरो पर पहुंचे उन्नाव के @4pmnews_network के पत्रकार "रंजन बाजपेई निडर" को ठेकेदारो ने रोका,उनका माइक पकड़कर उन्हें धक्का देने का प्रयास किया..!
लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था..!
इस दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना,DCM ब्रजेश पाठक,DCM केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे थे..!
उपमुख्यमंत्री जी को सुनिए… और उनकी कर्मभूमि उन्नाव में बने लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का हाल भी देखिए।
क्या जनता सुरक्षित है? क्या निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठने चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर दें।
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अमरीका मे एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कम्पनी को देश के एक पहाडी़ इलाके में सड़क बनाने का ठेका मिला। कंपनी के इंजीनियरों ने मौके पर पहुंच कर नक्शे बनाने शुरू कर दिये। सर्वे के दौरान एक वहाँ एक हिंदुस्तानी ठेकेदार मौजूद था। यह सब होते देख उसे अजीब लगा। उसने अमेरिका के इंजीनियर से पूछा आप लोगो को पहाड़ी इलाकों में सड़क का नक्शा बनाने की क्या जरूरत है ?
अमेरिका का इंजीनियर हैरान हुआ। तो इसे और किस तरह से किया जा सकता है ?
हिंदुस्तानी ठेकेदार बोला हम तो एक गधा पकड़ते है। गधे पर चूने की बोरी लाद कर उसमें सुराख़ कर देते हैं और उसे पहाड़ पर छोड़ देते हैं, गधा ऊपर जिस रास्ते से जाता है वहाँ चूने के निशान देख कर हम समझ जाते यह बेहतर रास्ता है फिर हम वहीं सड़क बनाना शुरू कर देते हैं।
यह सुन कर अमेरिकी इंजीनियर हक्का बक्का हो गया। उसने पूछा आपके यहाँ सड़क का नक्शा सिविल इन्जीनियर नहीं बनाते हैं ?
देशी ठेकेदार हंस कर बोला - जहाँ गधे नहीं मिलते वहाँ इन्जीनियर ही बनाते हैं।😀
नोट :वीडियो लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे का है😞😞
4700 करोड़ की लागत से बना कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस वे उद्घाटन के 17 दिन के अंदर तीन बार धंसा
जिस जगह पर एक्सप्रेसवे धंसा है वहाँ रिपोर्टिंग करने से रोक रहे है
भ्रष्टाचार चरम पर है।
पत्रकार के सवाल पर भड़के ठेकेदार 😂
लेकिन पत्रकार की जबाजी देखिए।
4700 करोड़ का एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही टूट गया..ये पैसा किसका था
ठेकेदार साहब रोकने की खूब कोशिश किए लेकिन पत्रकार ने एक ना सुनी
हमारी ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट में दिखाया गया कि उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत की आवश्यकता पड़ गई। इसके बाद NHAI का जवाब आया। NHAI का कहना है कि निर्माण करने वाली कंपनी अगले 15 वर्षों तक इस एक्सप्रेसवे का रखरखाव करेगी।
लेकिन सवाल सिर्फ़ रखरखाव का नहीं है।
सवाल यह है कि यदि सड़क की स्थिति के कारण वाहन पलटते हैं, लोगों को चोटें आती हैं, माल का नुकसान होता है है या कोई गंभीर हादसा होता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
क्या केवल बाद में मरम्मत कर देना पर्याप्त है, या ऐसी परिस्थितियों को पहले ही रोकने की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए?
जनता जवाब चाहती है।
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उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के ज्यादातर काम PNC नामक कंपनी कर रही है, यह कंपनी भाजपा नेता, सांसद नवीन जैन के भाई की है
ज्यादातर ठेके राजनीतिक लाभार्थी के रूप में इन्हें दिए जा रहे हैं, बदले में मोटा कमीशन भाजपा के बड़े-बड़े नेता खा रहे हैं
कथित और बनावटी ईमानदार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर बताएं कि उनके पास तक कितना मोटा कमीशन अटैची में भरकर आता है? जिसके कारण ज्यादातर ठेका भाजपा नेताओं की कंपनियों को दिया जाता है?
सड़क हादसों में जनता की जाती हर एक जान के जिम्मेदार हैं मुख्यमंत्री बिष्ट ठाकुर आदित्यनाथ और भाजपा सरकार
4700 करोड़ की लागत से बना कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस वे उद्घाटन के 17 दिन के अंदर तीन बार धंसा
जिस जगह पर एक्सप्रेसवे धंसा है वहाँ रिपोर्टिंग करने से रोक रहे है
भ्रष्टाचार चरम पर है।