हुंकार से सम्मान तक: 'वंदे मातरम्' का वो सच, जो हर भारतीय को जानना चाहिये 🇮🇳
1882 में बंकिम चंद्र की कलम से निकला 'वंदे मातरम्' आजादी का वो महामंत्र था, जिसे गाते हुए मतवाले फांसी के फंदे पर झूल गए।
1896 में पहली बार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सुर दिए।
लेकिन आजादी के बाद, राजनीति और तुष्टिकरण के फेर में फंसाकर इसके दो टुकड़े कर दिए गए।
गांधी, नेहरू,मौलाना आज़ाद, जिन्ना ने फैसला लिया राष्ट्रीय मंचों पर केवल पहले दो धर्मनिरपेक्ष छंद ही गाए जाएंगे।
मुस्लिम लीग के विरोध के चलते 1937 से इसके केवल पहले दो छंद गाने की मजबूरी बना दी गई
पर सच को कब तक रोकते?
13 अगस्त 2026 को संसद ने इतिहास पलट दिया
सालों बाद लोकसभा में गूंजा 'वंदे मातरम्' का संपूर्ण रूप (सभी 6 छंद)।
अब न सिर्फ इसके मूल रूप की बहाली हुई है, बल्कि इसे राष्ट्रगान जैसी कानूनी सुरक्षा भी मिली है। यह हमारी सांस्कृतिक संप्रभुता की असली जीत है।
नमन है उन वीरों को, जिनकी चेतना आज पूरी हुई।🙌
गर्व से कहो— वंदे मातरम्
#VandeMataram #IndependenceDay
50 साल पहले की वो काली रात मुझे याद है जब इमरजेंसी लगी थी. रातों रात सारे विरोधी नेताओं को जेल में डाल दिया गया. अख़बारों पर सेन्सरशिप लगा दी गई. अदालतों के हक़ छीन लिये गये. संविधान का अनादर हुआ. लो���तंत्र की हत्या कर दी गई. मैंने सब देखा, ज़ुल्म सहा, जेल में रहा, अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए संघर्ष किया. आजकल जो लोग संविधान और लोकतंत्र की बातें करते हैं, उन्हें एक बार उन दिनों की तरफ़ भी देख लेना चाहिए. किस ने किया, किस के लिये किया, ये भी सोचना चाहिये. #Emergency
लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव आज से शुरू हो रहा है! लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में 21 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की 102 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। इ�� सभी सीटों के मतदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें और वोटिंग का नया रिकॉर्ड बनाएं। पहली बार वोट देने जा रहे अपने युवा साथियों से मेरी यह विशेष अपील है कि वे भारी संख्या में मतदान करें। लोकतंत्र में हर वोट कीमती है और हर आवाज का महत्त्व है!
कभी-कभी किसी व्यक्ति से जुड़ने का मन करता है..लेकिन रुक जाता हूँ,बाद में उस व्यक्ति की हरकतें देख कर लगता है अच्छा ही किया जो इससे नहीं जुड़ा। अंतर्मन की आवाज़ सच होती है,बुरे कार्य करने से स्वत: ही आपको रोकती है।