#गैरां_के_दुख_दूर_करूं या ताकत सै मेरे मैं
To support this vulnerable,
landless family, Sant Rampal Ji Maharaj Ji's 'Annapurna Abhiyan'
delivered vital food and ration supplies.
Bringing hope and support to a struggling family.
Annapurna Muhim By Sant RampalJi
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#GodNigutWednesday#सत_भक्ति_संदेश
कबीर.....
भगवा ओड़े हिन्दू, हरा पहने मुसलमान। मैं कौन सा रंग पहनूं, कि बन जाऊँ इंसान ॥
↪️कबीर साहेब जी कहते हैं कि कोई हिंदू भगवा वस्त्र पहन ले या मुसलमान हरे कपड़े पहन ले- इससे कोई सच्चा धार्मिक नहीं हो जाता।
संत रामपाल जी महाराज
#गैरां_के_दुख_दूर_करूं या ताकत सै मेरे मैं
अन्नपूर्णा मुहिम बनी वरदान
संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा 'अन्नपूर्णा मुहिम' के तहत अनेक संघर्षरत परिवारों को निरंतर सहायता और राहत मिल रही है।
देखें Annapurna Muhim YouTube Channel पर।
Annapurna Muhim By Sant RampalJi
#सत_भक्ति_संदेश
कबीर,सतगुरु के दरबार मे, जाइयो बारम्बार
भूली वस्तु लखा देवे, है सतगुरु दातार।
हमे सच्चे गुरु की शरण मे आकर बार बार उनके दर्शनार्थ जाना चाहिए और ज्ञान सुनना चाहिए।
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#गैरां_के_दुख_दूर_करूं या ताकत सै मेरे मैं
पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी की 'अन्नपूर्णा मुहिम' के तहत हृदयस्पर्शी मदद।
देखें असहाय, मजबूर परिवारों की दर्द भरी कहानी।
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#गैरां_के_दुख_दूर_करूं
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम के तहत, 14 अप्रैल 2026 को इस परिवार को तीसरी बार राशन और आवश्यक सामग्री की सहायता दी गई, जिससे उनके दैनिक जीवन को बड़ा सहारा और राहत मिली है।
कबीर, मानुष जन्म पाए कर, जो नहीं रटे हरि नाम।
जैसे कुआं जल बिना, बनवाया क्या काम।।
जैसे बिना पानी का कुआं किसी काम का नहीं, वैसे ही बिना भक्ति के मनुष्य का जीवन और उसका सुंदर शरीर भी व्यर्थ है।
– जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
#SatKabirVachan#GodMorningTuesday
कबीर जी की चेतावनी अनसुनी करने का अंजाम | Sant Rampal Ji Satsang | SATLOK ASHRAM
क्या आपने कभी सोचा है कि भक्ति को बार-बार टालने का परिणाम क्या हो सकता है?
यह प्रेरणादायक कथा एक किसान की है, जिसे कबीर परमेश्वर साधु रूप में बार-बार सच्ची भक्ति करने के लिए समझाते हैं। लेकिन वह हर बार परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों का बहाना बनाकर भक्ति टाल देता है। मृत्यु के बाद उसे मनुष्य जन्म नहीं मिलता—पहले बैल और फिर साँप की योनि में जन्म लेना पड़ता है। अंत में उसे अपनी भूल का एहसास होता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति को कभी कल पर नहीं टालना चाहिए, क्योंकि अगला पल हमारे हाथ में नहीं है।
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बिना ज़मीन व बचत के कच्चे मकान में रह रहे इस पीड़ित परिवार को संकट की घड़ी में संत रामपाल जी महाराज के 'अन्नपूर्णा अभियान' के तहत सहायता पहुँचाते हुए आवश्यक खाद्य व राशन सामग्री प्रदान की गई।
स्कूल की रसोई में छोटा-मोटा काम करके वे बेहद कठिनाई में अपना जीवन-यापन कर रही हैं। अन्नपूर्णा पहल इस परिवार को आत्मनिर्भर बनने तक लगातार राशन सहायता पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम के तहत, 14 अप्रैल 2026 को इस परिवार को तीसरी बार राशन और आवश्यक सामग्री की सहायता दी गई, जिससे उनके दैनिक जीवन को बड़ा सहारा और राहत मिली है।