Gen Z और Gen अल्फ़ा मात्र लिखने से आपको इनका वोट नहीं मिलेगा इसके लिए उनको समझने के लिए पार्टी मे Gen Z नेता भी होना चाहिए जो इस पार्टी मे कोई नहीं है
बाकि बहनजी से विनति है कि आकाश आनंद को पार्टी मे लाइये वरना पार्टी का और भी ज्यादा होगा
#उम्मीदों_का_आकाश
इसका नाम आदर्श आनंद है और ये कायस्थ है यानी सवर्ण ।
इसको फॉलो करने वाले ज्यादातर दलित-पिछड़े है और ये उन्ही के खिलाफ झूठा प्रोपगैंडा चला रहा है ।
वीडियो में जो पोस्टर दिखाए जा रहे हैं, वे ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह परे हैं ।
वीडियो में ये झूठ गढ़ने की कोशिश की जा रही है कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है लेकिन सच्चाई ये है कि अन्याय तो दलित-पिछडो के साथ हो रहा है क्योंकि आज भी देश के सर्वोच्च पदों पर सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व उनकी आबादी के अनुपात से कई गुना ज़्यादा है और दलित-पिछडो को सर्वोच्च पदो तक पहुँचने ही नही दिया जाता ।
आरक्षण कभी मेरिट के खिलाफ था ही नही बल्कि आरक्षण तो उन करोड़ों लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और प्रतिनिधित्व देने का माध्यम है जिन्हें सदियों तक अवसरों से वंचित रखा गया ।
EWS आरक्षण तो अब सामान्य वर्गों को भी मिल रहा है तो फिर सिर्फ दलित-पिछडो के ही आरक्षण को क्यों कोसा जा रहा है ।
शुभांकर मिश्रा और अभिनव पांडे अक्सर जब कोई बहुजन और सवर्ण का मामला होता है तो सवर्णों के साथ खड़े हो जाते हैं.
निशु आजाद और स्वतंत्र भारद्वाज के मामले में निशु आजाद को भी अभिनव गलत साबित करके बैलेंस बनाने का गेम खेल रहे हैं.
मतलब एक ऐसा अपराधी जिसने मीडिया में स्वीकार किया है कि उसने मारा पीटा उस पर 307 का केस होना चाहिए.
उसकी तुलना एक नाबालिग बच्ची से कोई कैसे कर सकता है?
निशु अंबेडकर की विचारधारा को मानती हैं, वह पाखण्डवाद का विरोध करती हैं.
यह बात अभिनव पांडे को अच्छी कैसे लग सकती है? इस बात को सबको समझना होगा.
यही ब्राह्मणवाद का महीन जाल है, जिसमें अपराधी को पीड़ित के सामान बताया जाता है.
भारत में फ़िलहाल कुल तीन तरह के पत्रकार हैं.
- एक जो सत्ता से सवाल करता है
- दूसरा जो सत्ता के तलवे चाट रहा है
- तीसरा जो बैलेंस बना कर चल रहा है
शुभांकर मिश्रा और अभिनव पांडेय ये लोग बैलेंस बना कर चलने वाले पत्रकार हैं। मामला चाहे UGC का हो या स्वतंत्र भारद्वाज का।
ये बहुत महीन खेल खेलते हैं। थोड़ा सा सरकार से सवाल भी पूछ लेंगे और थोड़ा सिस्टम को सहला भी देंगे। ये लोग एकदम बैलेंस बनाकर चलने में माहिर हैं।
आप इन्हें कैसे देखते हैं और आपके नज़र में ये कैसे पत्रकार हैं आप बताइए। बाकी पिछड़ों/दलितों के हित से जुड़े फैसले में इनका असली रूप आप सभी को दिख जाता होगा।
बहुजन समाज के लोगों, चन्द्रशेखर आजाद की क़दर कर लो। उनके विरोधी तक उनकी कार्यशैली व समाज के प्रति समर्पण की तारीफ करने पर मजबूर हैं 👇🏻
आओ अबकी बार 2027 में @BhimArmyChief को मिलकर यूपी का मुख्यमंत्री बनाएं...!!😌✊🏻
मिर्जापुर फिल्म देखकर लगता है भारत में केवल त्रिपाठी, पंडित और शुक्ला के अलावा कोई रहता ही नही है.
Mirzapur फ़िल्म क्या है ?
ब्राह्मण जाति के बाहुबली अखंडानंद त्रिपाठी की कहानी है. वो जिले का राजा है और उसका बेटा मुन्ना त्रिपाठी प्रिंस है.
सनकी मुन्ना त्रिपाठी से वकील रमाकांत त्रिपाठी का बेटा गुड्डू पंडित लेता है.
जेपी यादव का कैरेक्टर कमजोर है. वो नेता है लेकिन त्रिपाठी परिवार के आगे कमजोर है. वेब सीरीज में तो सूर्य प्रताप यादव नाम का मुख्यमंत्री दिखाया गया था,
जो अपनी ही बेटी का विवाह मुन्ना त्रिपाठी से कर देता है.
फ़िल्म में केवल त्रिपाठी और पंडित बोलबाला है. इस फ़िल्म में उत्पादन से जुड़ी जातियों का सरनेम नही है.
किसी एक जाति का वर्चस्व को ग्लोरीफाई कर के दिखाया गया है.
ये बस एक दिखावटी गिरफ्तारी थी....
उपर से निचे तक सारा सिस्टम है खराब है इस देश का आप किसी के ऊपर भी यकीन नहीं कर सकते.....
स्वतंत्र भारद्वाज की एक दिन की पुलिस कस्टडी पर निशु आज़ाद के वकील ऋषभ रंजन ने कहा, हम सभी कोर्ट में मौजूद थे और सुनवाई शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे।
बाद में हमें पता चला कि लीगल एड काउंसिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल हुए और आरोपी को जज के घर पर उनके सामने पेश किया गया।
इतने गंभीर अपराध में एक दिन की पुलिस कस्टडी मांगी गई।
हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली कि कौन से आरोप जोड़े गए और FIR में क्या बदलाव किए गए... मुझे नहीं पता कि क्या छिपाया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने अब तक धाराओं के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।"
Dr syed Rizvan ahmed 14 year की लड़की Nishu Azaad को बेशर्म बोल रहा है
जिस स्वतंत्र भारद्वाज का ये पक्ष ले रहा है बही Swatantra Bhardwaj ने मुस्लिम महिलाओं पर बहुत ही शर्मनाक टिप्पणी की हुई है।
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में मन्त्री संजय निषाद ने बीएसपी नेता आकाश आनन्द को निषाद पार्टी में आने का न्योता दिया है।
शायद! भाजपा सरकार में मन्त्री संजय निषाद भूल गए हैं कि उन्हें नेता मान्यवर श्री कांशीराम जी,आदरणीया बहन जी एवं बीएसपी ने बनाया है।
अगर मान्यवर श्री कांशीराम जी,आदरणीया बहन जी और बीएसपी न होती,तो भाजपा सरकार में मन्त्री संजय निषाद आज भी मछलियाँ पकड़ रहे होते।
अतः उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में मन्त्री संजय निषाद को सोच समझकर बात करनी चाहिए।
गाँव में एक कहावत होती है -
''नानी के सामने ननिहाल की बात नहीं करते।''
संजय निषाद को भी पता है कि अगर मान्यवर श्री कांशीराम जी,आदरणीया बहन जी और बीएसपी न होती,तो भाजपा संजय निषाद को अपने आस-पास भी भटकने नहीं देती।
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है।
3. इसके साथ ही, बिना नियम-क़ानून का समुचित अनुपालन किये हुये किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सज़ा देकर बेघर बार कर देने की कार्रवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बी.एस.पी सरकार की तरह का ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ का व्यवहार ज़रूरी है।
4. अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी ज़रूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।
Why such goons meet Chirag Paswan, not Chandrashekhar Azad or Rahul Gandhi?
Why social justice activists and constitutionalists meet Rahul Gandhi and Chandrashekhar Azad, not Chirag Paswan?
The difference is quite clear. Chirag Paswan is a self-declared Hanuman. Rahul
Gandhi and Chandrashekhar Azad are modern rational leaders who promote constitutional values.
मजे की बात यह है कि मीडिया चैनल इन जैसे पगलेट लोगों को जो समाज को बांट रहे हैं ऐसे लोगों को मीडिया चैनल अपने डिबेट में बुलाता है इन डिबेट वालों पर भी जूते पढ़ने चाहिए और इस इन लोगों को इतनी भी शर्म नहीं है
किसके खिलाफ क्या बयान बाजी कर रहे हैं
सोचिए कल के दिन को अगर बीजेपी सरकार नहीं रहेगी और ऐसा तो है नहीं की हमेशा रहेगी ऐसे पत्रकारों को ढूंढ ढूंढ कर जनता इनका इलाज करेगी या नहीं करेगी