गाली देना गलत है, इसमें दो राय नहीं।
हर बार हम लक्षण का इलाज करते हैं, बीमारी का नहीं। कोई युवा गाली दे दे तो FIR कर दो |लेकिन ये कभी पूछा कि उसकी भाषा ऐसी बनी कैसे?
पिछले 10–15 साल में हमने उसे क्या दिखाया? OTT पर गाली-गलौज, फिल्मों में vulgarity, सोशल मीडि��ा पर trolling , नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस, टीवी डिबेट्स में चीख-पुकार, it cell की भाषा....
मुन्ना भैया की गालियाँ 'डायलॉग' , gangs of वासेपुर के किरदारों की गालियाँ डायलॉग - लेकिन वही भाषा अगर कोई 20 साल का युवा बोल दे, तो अचानक पूरी Gen Z असभ्य ?
सवाल यही है कि भाषा का माहौल बनाया किसने?
हम मूल कारण को नहीं समझ रहे हैं, घटिया web series, घटिया फिल्में, घटिया reels shorts , क्या सिखा रही हैं बच्चों को? और उन बच्चों से उम्मीद- बहुत अलग है ���मारी |
और सबसे बड़ा सवाल- भाषा की मर्यादा तय करेगा कौन? जहाँ सांसद किसी को 'गटरछाप', 'परजीवी', 'पप्पू', 'गद्दार', 'टुकड़े-टुकड़े' जैसे शब्द कह रहे ह�� |
हमने एक ऐसी डिजिटल दुनिया बना दी है, जहाँ 27M युवा रोज़ 10–11 घंटे बिता रहे हैं और उस दुनिया में सबसे ज़्यादा दिखने वाली चीज़ गाली-गलौज, नफ़रत, अश्लीलता, ट्रोलिंग और सनसनी है। फिर सिर्फ़ युवाओं से आदर्श व्यवहार की उम्मीद करना पूरी तरह गलत है।
Hypocrisy की भी एक सीमा होती है।
बच्ची ने गाली अपशब्द बोल दिए तो मेनस्ट्रीम मीडिया Fire हो गया
संसद में देश के दिवंगत पहले PM को अय्याश ���हा गया, साथी सांसद को कटुआ आतंकवादी कहा गया तो सारे TV चैनल Flower बन गए
ये तो नहीं चलेगा, ये तो बेईमानी है.
इसका दूसरा पक्ष ये भी हैं हमारे पड़ोस में वो चाहे श्रीलंका हो या बांग्लादेश या नेपाल जहाँ जहाँ संस्थाओं के जैसे चुनाव आयोग या न्यायालय सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रहे हैं वहाँ जनता ख़ासकर gen z का ग़ुस्सा फूटा । अगर हम वैसी पुनरावृत्ति नहीं चाहते तो इन देशों से भी ये सबक भी लेने की ज़रूरत हैं । आप सांसद , विधायक ख़रीद कर अपनी बहुमत का दंभ भरते हुए किसी विषय पर नसीहत देने का अधिकार खोते हैं और आपकी वि���्वसनीयता कम होती हैं । और छात्रों से लड़कर आप जीत नहीं सकते वो सता से बाहर जाने का साफ़ संकेत होता हैं ।
जिसने अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ अश्लील-मॉर्फेड-फेक कंटेंट बनाई थी उसका नाम/पता सब पब्लिक डोमेन में था! दो-तीन दिन तक
खूब सर्कुलेट होता रहा! लेकिन तब चैनल प��� सन्नाटा था!
राहुल गाँधी की भांजी के साथ फोटो/वीडियो पर कितना गन्दा मेसेज सर्कुलेट हुआ! चुप्पी थी! इससे जुड़े कंटेंट आज भी सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे! इन मुद्दों पर कोई खोज परक रिपोर्टिंग नहीं हुई!
अब तक न्यूज़ चैनल ने खुद को विपक्ष और उनके समर्थकों का खुद का विरोधी बना लिया था! वे उनसे लड़ते रहते थे! इसमें वे कहीं न कहीं खुश भी थे!
लेकिन जंतर मंतर प्रोटेस्ट के बाद इन्होने पूरी पीढ़ी को अपना विरोधी बना लिया है! पूरी पीढ़ी को अपने खिलाफ क�� लिया है!
इसका बड़ा असर न्यूज़ इंडस्ट्री में होगा!
आप देखते रहें, देश की ४० करोड़ जेन जी/युवा पीढ़ी से जोड़ते हुए इनोवेटिव न्यूज़ प्लेटफार्म अगले एक साल में कई सारे आएँगे! वे खूब चलेंगे! उन्हें अच्छा विज्ञापन भी मिलेगा क्योंकि मार्किट के वे बड़े कंस्यूमर वहीँ होंगे! क्योंकि इनसे कनेक्ट करने में यू Tube के मौजूदा लोग भी उतने प्रभावी तरीके से नहीं जोड़ पाएंगे! यह एक नया विंडो खुला है! जो इसे पहले टैप करेगा, वह लाभ में रहेगा!
-
मैं अपने पूरे जीवन भाषा की मर्यादा का पक्षधर रहा हूँ...
मेरा मानना है की पक्ष, विपक्ष, पडोसी, परिवार, बड़ा, छोटा किसी के साथ भी गलत भाषा का प्रयोग न करना चाहिए न किसी को सहना चाहिए....
माफ़ी माँगना और माफ़ कर देना अच्छा है...❤️
मगर,
प्रधानमंत्री देश के मुखिया है| उन्हें थोडा बड़ा विज़न रखना चाहिए...
आईटी सेल वाले इतने साल से गाली दे रहे| इन्होने एक पूरी जनरेशन को ट्रोल बना दिया है...
आप किसी भी पुलिस वाले से मिलिए किसी भी शहर में, वो बिना गाली दिए आपसे बात नहीं करेंगे अगर आप सामान्य नागरिक है...
किसी भी नेता से प्राइवेट में मिलिए, वो कैसे बात करता है सभी को पता है...
प्रधानमंत्री की बात उनके करोडो समर्थक मानते है,
उन्हें एक अपील यह करनी चाहिए अपने 'समर्थक' से की आज से कोई किसी को गाली नहीं देगा न ही ऑनलाइन और न ही ऑफलाइन...
पुलिस के लिए आदेश निकालना चाहिए की आप किसी को गाली नहीं देंगे, अगर देंगे तो आपको बर्खास्त किया जाएगा...
��बसे ज्यादा गाली पुलिस वाले ही देते है....
एक देश के मुखिया का कर्त्तव्य यही है की वो देश को सही रास्ते लेकर जाए...
उम्मीद है की जब इतने विडियो बना ही रहे है प्रधानमंत्री, तो ये आदेश भी निकालेंगे और अपने समर्थक और आईटी सेल को अपील भी करेंगे.....
झारखंड का रांची देखिए
झारखंड सरकार की भर्तियों में धांधली का मुद्दा लेकर स्टूडेंट्स सड़क पर बैठ गए हैं
सरकारी अफसर ग्राउंड पर मौजूद लल्लनटॉप के रिपोर्टर से बात नहीं कर रहे हैं
ये नया जंतर-मंतर है
@khurpenchh यहाँ बीजेपी विपक्ष है तो उनका आना चाहिए, इस्तीफ़ा लेना चाहिए मुख्���मंत्री का । नहीं तो विधायक को तोड़ कर अपनी सरकार बना लेना चाहिए । एक देशव्यापी आंदोलन होना चाहिये, सब का एक साथ इस्तीफ़ा होना चाहिए ।
PM Modi and Amit Shah - you cannot threaten Gen Z into silence.
First you broke their bones. Now you are filing FIRs and taking down their accounts.
You are India’s past. Be careful about how you treat India’s future.
Another incident from #Maharashtra.
Gundo ka state ban gaya hai bilkul.
Jab dekho bank walo pe attack hota rehta hai.. doosre kisi pe haath uthane ki takat hai nahi.. bechare doosre state ke bankers ko maarte rehte hai.
Enough is enough.
@DFS_India take some strict action.
एक और अहम पहलू
जो विपक्षी नेता ‘गोदी मीडिया गोदी मीडिया’ चिल्लाते हैं, वही और उनकी पार्टी उन्हीं न्यूज़ चैनलों को करोड़ों का भुगतान देते हैं और कॉन्क्लेव में शामिल होते हैं।
ये वैसा ही है जैसे सभी यूरोपीय देश रूस को ‘आक्रांता’ बताते हैं और उसी से गैस लेकर उसकी ‘वॉर इकोनॉमी’ में पैसा डालते हैं।
जो विपक्षी दल ���ा नेता ऐसा करते हैं, गोदी चैनलों और एंकरों को खाद पानी वही दे रहे हैं। अगर वे ऐसा करना बंद कर दें तो ऐसे गोदी एंकर, जो न्यूज़ चैनलों पर ‘हिंदू-मुसलमान’ का हाँका लगा कर ख़बर बेचते हैं, शायद जनपथ के किसी किनारे ‘पच्चीस पच्चीस’ का हाँका लगा कर टीशर्ट और पैंट बेचते नज़र आएं।
कैसे बने मेरा देश महान?
कैसे हो सामाजिक न्याय की बात?
जब तक भ्रष्टाचार पर तगड़ा प्रहार नहीं होगा, तब तक न विकास संभव है, न न्याय।
हमें सिंगापुर जैसे देशों से सीखते हुए समझना ��ड़ेगा कि भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस ही राष्ट्र को आगे लेकर जाएगा।
अगर अब भी हमने भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई, तो आज से 20 साल बाद हम दुनिया के कई और देशों से पीछे हो चुके होंगे।
भ्रष्टाचार सिर्फ पैसा नहीं खा रहा, यह देश का भविष्य, युवाओं के सपने, किसानों की मेहनत और गरीब का हक भी खा रहा है।
Sonia Gandhi is abused with B*r d**cer, no problems
Rahul Gandhi is abused with Pappu, no problems
Akhilesh Yadav is abused with Tontichor, no problems
Pandit Nehru is abused with Ay*ash, no problems
Dr Manmohan Singh is abused with Mutemohan, no problems
Trust me, not a single time godi media raised voices against these abuses. Not a single time ever
-
मैं ये जानना चाहता हूँ की प्रूफ है क्या?
वो बताये ना कोर्ट या सरकार....
एक लाइन में की ये वाला डॉक्यूमेंट प्रूफ है....
दूसरी बात, मान लो की इन सबके बाद ये प्रूफ नहीं होता की कोई इस देश का सिटीजन नहीं है, तो फिर सरकार को ये भी तो बताना पड़ेगा की वो इन्सान किस देश का नागरिक है?
किसी जगह का तो होगा ही ना....
झारखंड के युवा आखिर किस पर भरोसा करें?
कहीं पेपर लीक, कहीं OMR पर सवाल, कहीं Result में गड़बड़ी, कहीं भर्ती प्रक्रिया ही विवादों में।
जिस राज्य के युवाओं को सबसे ज़्यादा एक निष्पक्ष व्यवस्था और बेहतर भ��िष्य की ज़रूरत है, वहीं उनके सपनों के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है।
आख़िर इतनी धांधलियों के बीच कोई युवा व्यवस्था पर विश्वास कैसे करेगा?
अगर युवाओं का भविष्य ही सुरक्षित नहीं होगा, तो किसी भी राज्य का भविष्य बेहतर कैसे बनेगा?