न्याय के मंदिर में जज साहब के बगल बैठा हुआ पेशकार तारीख लेने वालों से 100 से 200 रु० किस बात का लेता है..?
सवाल है कि वो आदमी जज साहब को क्यों नहीं दिखाई देता है..?
सऊदी अरब में दो भारतीय सगे भाई मोहम्मद राहिब और मोहम्मद जफर को ईरान को दान भेजने पर देशद्रोह का आरोप लगाकर सऊदी अरब में हिरासत में लिया गया.
बुजुर्ग पिता ने विदेश मंत्री से अपील की है कि उनके गिरफ्तार बच्चों की मदद की जाए,
ये लोग सोचते है कि जितनी आजादी भारत मे है उतनी ही आजादी दुनिया के सभी देशों में है
भारत में यह प्रधानमंत्री को गाली देते हैं देश के टुकड़े-टुकड़े होने की बात करते हैं नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को अलग करने की बात करते हैं इन पर कुछ नहीं होता
सऊदी अरब में इन्होंने ईरानी दूतावास को दान दिया तुरंत बैंकिंग सिस्टम के द्वारा सऊदी अरब सरकार को अलर्ट गया और पुलिस ने उठाकर जेल में डाल दिया
अपनी डूबती हुई राजनीतिक नैया को बचाने की ओछी राजनीति में राहुल गांधी ने NEET की परीक्षा देने वाले देश के युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया।
वीडियो देखिए और राहुल गांधी का प्रोपेगेंडा समझिए, ताकि ऐसे राजनीति के दीमकों से सावधानी बरती जा सके। ⏬
न कोई VIP ट्रीटमेंट....
न सुरक्षा....
न प्रोटोकॉल...
सच तो ये कि उत्तर प्रदेश सरकार को तब पता चला जब वे वापस लौट गयीं..
ट्रैन से सामान्य यात्री की तरह आयीं गंगा स्नान को बनारस और वापस लौट गयी....
इस यूट्यूबर का वीडियो न आता तो शायद कहीं चर्चा भी न हो पाती
जानते हैं ये सीढीयों पर बैठी साधारण सी महिला कौन हैं..??
इस देश के सबसे ताकतवर नेता सबसे लोकप्रिय व्यक्ति और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की एकलौती छोटी बहन "बसंतीबेन मोदी
और बनारस उनके प्रधानमंत्री भाई का संसदीय क्षेत्र भी....
जहाँ एक पार्षद का चमचा भी VIP ट्रीटमेंट चाहता हो--
वहाँ इस सादगी पर क्यूँ न दिल हार जाये कोई!!
🙏🙏🙏
पहाड़पुर को सूर्य ग्राम यानि सोलर विलेज के रूप में विकसित करने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। जिस प्रकार कोणार्क के सूर्य मंदिर की पहचान ओडिशा से जुड़ी हुई है, वैसे ही पहाड़पुर को सूर्य ग्राम के रूप में पहचाना जाएगा।
1977 का मशहूर नसबंदी गाना जो इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौर में पूरे देश की नसबंदी कर दी थी, जिसमें सिर्फ हिंदू शामिल थे..
गांव के गांव घेर के नसबंदी की गई थी..लेकिन तानाशाह तो मोदी है साहेब..
और इस फिल्म और गाने पर बैन लगा दिया था..🙄
चीन सालों से दुनिया को प्रभावित करने और भारतीय माइंडसेट को मैनिपुलेट करने के लिए यह नैरेटिव चलाता रहा कि Chaina बहुत महान है, भारत से 100 साल आगे है और भारत में सब कुछ घटिया व बेकार है। लेकिन अब यह रणनीति उसी पर भारी ���ड़ती दिखाई दे रही है। 🇮🇳
पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर कई भारतीय यूजर्स ने चीन की उस चमकदार छवि पर सवाल उठाए हैं, जिसे वर्षों से दुनिया के सामने पेश किया जाता रहा। चीन ने अपनी सकारात्मक छवि बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया, इंफ्लुएंसर्स को बुलाया, ऊंची-ऊंची इमारतें, चमचमाते शहर और आधुनिक सड़कें दिखाईं। नतीजा यह हुआ कि कई लोग, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, यह मानने लगे कि चीन भारत से बहुत आगे निकल चुका है।
आलोचकों का दावा है कि इस प्रचार के पीछे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने वर्षों तक मेहनत और संसाधन लगाए। वहीं कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने चीन की गरीबी, झुग्गियों, असमानता और सामाजिक चुनौतियों को सामने लाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार चीन में आज भी ऐसे क्षेत्र हैं जहां लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
विशेष रूप से चीन का हुकौ (Hukou) सिस्टम चर्चा का विषय बना है। इस व्यवस्था के तहत नागरिकों के अधिकार और सरकारी सुविधाएं काफी हद तक उनके पंजीकृत क्षेत्र पर निर्भर करती हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच बड़ा अंतर पैदा होता है। कई प्रवासी मजदूर शहरों में काम तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें और उनके परिवारों को समान सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
इसलिए जो लोग बार-बार कहते हैं कि "चीन हमसे 100 साल आगे है", उनके दावे पर अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि चीन की उपलब्धियां वास्तविक हैं, लेकिन उसकी चमकदार छवि के पीछे की चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब जब सोशल मीडिया पर चीन की आंतरिक समस्याओं को लेकर चर्चाएं बढ़ी हैं, तो चीन के सरकारी मीडिया जैसे ग्लोबल टाइम्स की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस बहस का असर दिखाई देता है। कुछ लोगों का मानना है कि राहुल गांधी जैसे नेताओं के लिए अब चीन की खुलकर प्रशंसा करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। 🤔🇨🇳🇮🇳
🔥 निष्कर्ष: किसी भी देश का मूल्यांकन केवल उसकी ऊंची इमारतों और चमकदार शहरों से नहीं, बल्कि वहां के आम नागरिक के जीवन, अवसरों और समान अधिकारों से किया जाना चाहिए।
डॉक्टर हो तो ऐसा!
सोनोग्राफी की मशीनें ख़राब तो डॉक्टर ने दिया धरना, कंपनी क�� जगह चाइना की मशीनें लगाई, अस्पताल के बड़े अधिकारी मशीन खरीदने में खा गए कमिशन
भरतपुर
सन 1988 से यह बुजुर्ग न्याय के लिए जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहा है, सोचिये पिछले 38 सालों में कितने DM आए और गए होंगे लेकिन इस गरीब बुजुर्ग का कोई न्याय नहीं दे पाया।
The team of Lucnica Ensemble sang Vande Mataram during the welcome in Bratislava.
This comes at a time when we are marking 150 years of Vande Mataram and recalling its glorious contribution to India’s history and freedom struggle.