स्वर्णों में मात्र एक मर्द पृथ्वी राज चौहान का वंशज महिपाल सिंह मकराना यूजीसी कानून के खिलाफ 600 km की यात्रा कर रहा है । बाकी कायर गुलाम फिर बीजेपी के गुणगान करने लगे हैं ।अरे कायरो नपुंसको तुम्हारे लिए फिर क्यों लड़ेगा कोई आखिर
जब बाकी भाषाओं को लागू करते वक्त कोई पेंच नहीं फंसा, तो राजस्थानी के आते ही कमेटियां और भाषाविद याद आने लगे? दशकों से सिर्फ 'प्रयासरत' ही रहेंगे या कभी धरातल पर हक भी देंगे?
@madanrrathore
एक बार अवश्य सुनिए....🙏
जो मां हमारे पास है उस मां को हम मां नही बोल सकते है और हम पड़ोसी की मां को कैसे मां हमारी बोल सकते है.....नारंगी संतरो...?
मराठी भाषा राजस्थान में पढ़ाए जाने के प्रति राजवीर सर की प्रतिक्रिया......
जय राजस्थान 💪
राजस्थान के राज्यपाल@BagadeHaribhau जी! यदि राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा के अध्ययन केंद्र खोलने की वकालत करने के बजाय राजस्थानी भाषा के अध्ययन केंद्र खोलने की बात करते तो आप महान कहलाते।मगर आप भी क्षेत्रवाद की बीमार मानसिकता के मरीज निकले।इस बात का दु:ख हैं।@RajCMO
साथियों, राज्यपाल महोदय स्वयं महाराष्ट्र से आते हैं, हमें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है। अपनी मातृभाषा से प्रेम करना अच्छी बात है, लेकिन महामहिम को यह समझना होगा कि वे महाराष्ट्र के नहीं, बल्कि राजस्थान के राज्यपाल हैं! ऐसा लगता है कि महामहिम को राजस्थान की भाषा और यहाँ की संस्कृति समझ नहीं आ रही, इसीलिए उन्होंने सोचा कि चलो राजस्थान पर मेरी खुद की भाषा ही लागू कर देता हूँ! राजस्थानी भाषा को दरकिनार करके, उसे नीचे रखकर, मराठी भाषा को प्राथमिकता देना राजस्थान के करोड़ों युवाओं और छात्र शक्ति के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है!हम इस मंच से साफ कर देना चाहते हैं कि हम किसी भी भाषा का अपमान या अनादर नहीं करते। भारत की सभी भाषाएं हमारे लिए पूजनीय हैं, और राजस्थान का दिल इतना बड़ा है कि यहाँ हर भाषा के लिए हमेशा द्वार खुले हैं। लेकिन हमारा विरोध इस पक्षपातपूर्ण रवैये से है!एक तरफ सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि स्कूलों में राजस्थानी भाषा अनिवार्य करो, प्रदेश का युवा सालों से मांग कर रहा है कि हर यूनिवर्सिटी में राजस्थानी विभाग खोलो—तब तो सरकार और राजभवन की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं! और जैसे ही महाराष्ट्र सरकार से प्रस्ताव आता है, राज्यपाल जी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और उसे सब जगह लागू करने का आदेश दे देते हैं! क्या राजस्थान की यूनिवर्सिटीज राजस्थान के युवाओं के लिए हैं या अपनी पसंद की भाषाएं थोपने के लिए?आज इस पुतला दहन के माध्यम से हम राजभवन तक यह साफ संदेश पहुँचाना चाहते हैं: 'पहले मायड़ भाषा का सम्मान करो, फिर किसी और भाषा की बात करो!' हमारी मांग सीधी है—अगर मराठी के केंद्र खुलेंगे, तो उससे पहले राजस्थान की हर एक यूनिवर्सिटी में राजस्थानी भाषा का पूर्ण विभाग अनिवार्य रूप से खुलना चाहिए! अगर हमारी भाषा को उसका हक नहीं मिला, तो यह छात्र आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि और उग्र होगा!राजस्थानी भाषा को उसका हक दो!छात्र शक्ति ज़िंदाबाद! इंकलाब ज़िंदाबाद!"
#RajasthanUniversity
#ShubhamRewarRU
राजस्थान में मराठियों की बढ़ती हुई जनसंख्या प्रतिशत को देखते हुए, राज्यपाल ने मराठी भाषा अध्ययन केंद्र खोलने का निर्णय लिया लगता है ! इसके चलते राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में अब मराठी भाषा अध्ययन केंद्र खोले जाएंगे।
संतरों का नया एजेंडा... 🙄
अब लगता है कि राजस्थान के सभी नेता एक साथ मराठी भाषा विरूद्ध और अपनी राजस्थानी भाषा के पक्ष में आवाज बुलंद कर रहें है
अपनी मिठी से प्यार करना और लूटेरो के प्रति एक साथ विरोध करना अपनी मां से प्यार करने बराबर है
जय राजस्थान ✊
आज आप कोई भी नेता नगरी रे हाथे हो , कोई पार्टी ने फॉलो करो अगर आज आप राजस्थान भाषा वास्ते नी बोलो तो आप ना जोगा हो । अगर आज कोई नेता ख़ुद री आवाज़ इत्ती नी उठा सके की पहली महरी मायड़ भाषा ने मान्यता दो पछे आप दूसरी भाषा ने । https://t.co/Wh5N0MbiGZ
घर रा पूत कँवारा बैठिया पड़ोसियाँ ने फेरा भावे ।।”
राजस्थान सरकार पहली राजस्थानी मायड़ भाषा ने तो मान्यता दिलवाओ।
आखिर कॉलेज में मराठी भाषा क्यों पढ़ानी है?
महाराष्ट्रा में कराई राजस्थानी भाषा पढ़ाई काई.?
कुछ समय पहले राजस्थानी भाषा को केवल मारवाड़ी भाषा बताकर विरोध करने वाले बृजवासी अब मराठी भाषा के राजस्थान में केंद्र खुलने से मिले रोजगार से खुश तो बहुत होंगे.?
हमें तो अपनों ने लूटा गेरो में कहा दम था हमारी भाषा का विरोध हुआ वहां, जहाँ सभी भाषाओं से प्रेम था।
#राजस्थानी_भाषा
राजवीर सर…!!
राजस्थानी भाषा के लिए…एक व्यक्ति के तौर पर
आप चाहे जीवन खपा दो… आप राजस्थानी भाषा का एक केन्द्र तक नहीं खुलवा सकते…
लेकिन किसी दिन कोई नेताजी आएँगे…
और राजस्थान में ही मराठी भाषा का केन्द्र खुलने की घोषणा कर जाएँगे…!!
ये औक़ात बची है संघर्ष की…!!
कभी-कभी तो लगता है…
महाराष्ट्र वाले मराठी बोलने के लिए बाहर वालों को पीटते हैं
दक्षिण भारत वाले स्थानीय भाषा बोलने के लिए मजबूर करते है…
ये लोग बिलकुल सही करते हैं…
राजस्थान वाले भी ऐसा ही करते तो शायद राजस्थानी भाषा को भी लोग गंभीरता से लेते…
ज़्यादा उदारता भाषा, सभ्यता और संस्कृति के लिए घातक सिद्ध होती हैं…