CM हेमंत सोरेन का विरोध करना हमारा हक है।
लेकिन CM हेमंत सोरेन को गाली देना हमारा हक नहीं है।
झारखंड के छात्र आंदोलन में और CJP के आंदोलन में बहुत अंतर है।
हम यहां किसी को गाली नहीं दे रहे हैं, हम भी छात्र हैं, हम भी GenZ हैं।
: झारखंड छात्र आंदोलन का एक छात्र
अमृतसर कमिश्नर श्री गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने खुलासा किया है कि जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के पीछे पाकिस्तान स्थित ISI समर्थित मॉड्यूल सक्रिय था!
आदरणीय गृहमंत्री श्री @AmitShah जी ऐसे सभी गद्दारों की गिरफ़्तार होनी चाहिए!
जो जेल में होने चाहिए थे आज वो नेता बनकर घूम रहें है!
झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन में अरब देशों से स्विग्गी और जोमैटो के फूड के आर्डर क्यों नहीं आ रहे हैं?
क्या वे छात्र नहीं हैं?
जंतर मंतर पर ही ये सब ऑर्डर आते थे
"मुख्यमंत्री स्वयं हमसे बात करे, खुले मंच पर बात हो, मीडिया के कैमरों में बात हो"
: रांची में संघर्षरत युवा
झारखंड सरकार द्वारा बातचीत के लिए 4 सदस्यीय मंत्रिमंडल पैनल की घोषणा के बाद...
झारखंड के युवाओं ने बता दिया कि भारत के प्रति पूर्ण निष्ठा के साथ भी अपनी बात कही जा सकती है...
एक भी उम्र खालिद नहीं, हिंदू देवी देवताओं का अपमान नहीं, कोई शहरी नक्सली का प्रवेश नहीं...किसी दो कौड़ी के विदूषक की एंट्री नहीं, कोई भी घटिया परवरिश से पल रहे बच्चे नहीं, कोई भी समलैंगिक समुदाय का भद्दापन नहीं..
ये है भारत का वास्तविक भविष्य
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भूख हड़ताल पर बैठे बच्चे रो रहे हैं, लेकिन हेमंत सोरेन और राहुल गांधी की सरकार की आँखों में ज़रा भी पानी नहीं है।
क्या झारखंड के छात्रों की पीड़ा भी अब राजनीति के तराज़ू पर तौली जाएगी?
पेपर लीक के राज्यसरकार द्वारा पोषित रैकेट के खिलाफ एक प्रदर्शन झारखंड में भी हो रहा है...
प्रोटेस्ट में अनशन पर बैठा छात्र सुर्खियों से गायब है, यद्यपि भारी बरसात भी उनके हौसले तोड़ नहीं पा रही है, न कोई हिंसा, न अराजकता, संवैधानिक दायरे में इनकी शांतिपूर्ण मांग हेमंत सोरेन सरकार के साथ पूरे हौसले से टकरा रही है, इन हौसलों की उड़ान दुनिया देखेगी। यह कोई मामूली आंदोलन नहीं है, यहॉं छात्र भविष्य के आंदोलनों का रूल बुक लिख रहे हैं।
"गोदी मीडिया को हर राज्य का कवर करना चाहिए क्योंकि उसे ही जनता के पैसे का विज्ञापन मिलता है," ये बात तो ठीक है,
लेकिन "हम यूट्यूबर सारी परीक्षाओं के मामले को हर राज्य में कवर नहीं कर सकते हैं"
इसमें आपने अपनी दरबारी पत्रकार वाली छवि दिखा दी।
सीधा भी बोल सकते थे कि विपक्ष की सरकार वाले राज्य कवर नहीं कर सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले विदिशा के बच्चे अभी से 2036 ओलिंपिक्स में ऊंची कूद की तैयारी कर रहे,
काश हर जिले में ये व्यवस्था होती तो आज भारत ओलिंपिक की पदक तालिका में सोने की चिड़िया बन जाता
मेरी कार का माइलेज भी 15% कम हो गया है।
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि मेरी ड्राइविंग स्किल अचानक कम हो गई या फिर मैं गाड़ी को दोष दूँ या फिर E 20 पेट्रोल को।
याद रहे, मै पिछले वर्षों से गाड़ी चला रहा हूं। मतलब, मै नौसिखिया ड्राइवर तो बिल्कुल नहीं हूं।
यह अन्याय करने वाली संवेदनशील सरकार है।
ये खुद समस्या हैं, ये खुद लोगों को पीड़ा देते हैं, छात्रों का भविष्य इन्होंने चौपट कर दिया, ये सही चीजों को खराब करके ही दम लेते हैं।
संवैधानिक दायरों के तहत ये युवा साथियों को हमेशा की तरह अन्याय देकर रहेंगे...
@MohitBharatYBP क्यु परेशान होते है महोदय सर्वण् विधायक नेता अपनी बेटियों के लिए दलित पिछड़े वर की तलाश मै निकले हुए है सावन का मोसम भी है
दलितो से निवेदन है की आप आगे से बृहमण राजपूत नेता अपनी बेटियां हमे देवे ऐसा नारा लगाए
कसम से
दूध की माफिक बिल्कुल मुलायम यौनी प्राप्त होगी विरोधभी नही होगा
"मैं कूड़े के ढेर से कोई बच्ची नहीं उठाकर लाया था, मैं तो एक हीरा घर लेकर आया था।"
यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक घटना के रूप में सुनाई जाने वाली कहानी है। असम के सोबरन नामक एक 30 वर्षीय युवक सब्ज़ी बेचकर अपना गुज़ारा करता था। उसकी शादी नहीं हुई थी।
एक शाम काम से लौटते समय उसे सड़क किनारे झाड़ियों के पास एक मासूम बच्ची के रोने की आवाज़ सुनाई दी। जब वह वहाँ पहुँचा, तो उसने देखा कि एक नवजात बच्ची कूड़े के ढेर के पास लावारिस अवस्था में पड़ी हुई थी। आसपास कोई नहीं था।
सोबरन उस मासूम को वहाँ छोड़ नहीं सका। वह उसे अपने घर ले आया और उसी दिन फैसला कर लिया कि अब यही बच्ची उसकी दुनिया होगी। उसने उसका नाम ज्योति रखा।
उसने अपनी शादी का विचार छोड़ दिया और पूरी ज़िंदगी ज्योति की परवरिश में लगा दी। दिन-रात मेहनत करके उसने उसे पढ़ाया-लिखाया, उसकी हर ज़रूरत पूरी की। कई बार खुद भूखा रह गया, लेकिन अपनी बेटी को कभी किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दी।
ज्योति ने 2013 में कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की। इसके बाद उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और 2014 में लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आयकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त हुई।
जब सोबरन ने अपनी बेटी को इस मुकाम तक पहुँचते देखा, तो उनकी आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। जिस सफलता का सपना वह स्वयं कभी पूरा नहीं कर सके, वही सपना उनकी बेटी ने साकार कर दिखाया।
आज ज्योति अपने पिता की हर ज़िम्मेदारी निभाती है। उसने कई बार उनसे सब्ज़ी बेचने का काम छोड़ने को कहा, लेकिन सोबरन आज भी ईमानदारी से अपना वही काम करते हैं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा:
"मैं कूड़े के ढेर से कोई बच्ची नहीं उठाकर लाया था, मैं तो एक हीरा घर लेकर आया था। वह मेरी ज़िंदगी की रोशनी है।"
सनातन के असल चेहरे सोबरन भाई जैसे लोग ही हैं!
साभार!
बाँकीपुर सीट जीतने के बाद जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का पहला इंटरव्यू News Pinch ने किया
अभिनव पाण्डेय- सम्राट चौधरी के पीछे क्यों पड़े है ?
प्रशांत किशोर - हम बिहार के है , हम नहीं चाहते है की बिहार का मुख्यमंत्री कोई अपराधी हो,
सातवाँ फेल हो, सात लोगों की हत्या में जो जेल काट के आया है, उसका विरोध क्यों नहीं करूँगा ?
अगर बिहारी होने के नाते कोई विरोध नहीं कर रहा है तो मैं समझता हूँ की वो बिहार के प्रति न्याय नहीं कर रहा है,
एक बात तो तय है की अब बिहार को वन मैन आर्मी के रूप में एक मजबूत विपक्ष मिल गया है 🔥
झारखंड में चल रहे प्रदर्शन में बच्चों के भोजन आदि हेतु मैं @khurpenchh की टीम को एक लाख रुपए की सहयोग राशि अपने दर्शकों की ओर से भेज रहा हूँ। यदि आंदोलन और चलेगा, तो मेरी ओर से सहयोग और भी जाएगा।
#jharkhandprotests