🔥 "ये गाना नहीं, आग है…!" 🔥
सारी पोल खोलता गीत…
संगीत की ताकत का ऐसा इस्तेमाल कि हर तानाशाह की नींद हराम!
इन कलाकारों ने साबित कर दिया
संगीत कला का सबसे शक्तिशाली हथियार तानाशाह को हटाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
ये गीत नहीं, 'आग' है जो चारों तरफ तेजी से फैलेगी!
हर देशभक्त के अंदर जोश सुलगाती है ये धुन…
"New Anthem for Protesters" क्या कहूँ? बहुत खूब!!
एक तानाशाह का पूरा कठ्ठा चित्ता एक ही गीत में! एक दिन ज़रूर आएगा जब 'साहब' जेल के अंदर होगा!
हर तानाशाह डरता है… और यही इस गीत की सबसे बड़ी जीत है!
यह गाना डिलीट होने से पहले सुनो, सुनाओ, रिपोस्ट कर के फैलाओ क्योंकि ये सिर्फ़ गाना नहीं, आंदोलन है!
ज़ब कोई ईमानदार पत्रकार न्यूज चैनल छोड़ कर
अपना स्वतंत्र यूट्यूब चैनल बनाता है
तो उसकी पत्रकारिता देखने लायक होती है
ये जिगरा गोदी मिडिया मे नहीं है
सांकेत उपाध्याय ने
पूरी पोल खोल दी चुनाव आयोग की..
अब लग रहा है कि जेन ज़ी लाखों की संख्या में दिल्ली आने वाले थे। इसलिए उन्हें रोकने के लिए ट्रेनें बंद हो रही हैं। मेट्रो स्टेशन बंद हो रहे हैं।
RWA के ज़रिए रोका जा रहा है। हमने तो लाखों ही लिखा है, हो सकता है सरकार करोड़ों में समझ रही हो। यह आंदोलन शुरू होने से पहले ही सफ़ल हो चुका है। जेन ज़ी को दिल्ली का आंदोलन समाप्त कर देना चाहिए। उनका मकसद पूरा हो गया। किसी और नए जगह की घोषणा करी चाहिए। इससे यह होगा कि देश भर से सुरक्षा बलों का जो काफिला दिल्ली लाया गया है, उन्हें तुरंत उस शहर की तरफ रवाना करना होगा, जब उस शहर पहुंच जाएं तो जेन ज़ी को तीसरे शहर की घोषणा कर देनी चाहिए। टॉम एंड जेरी की तरह भागा-भागी वाला फन आएगा। जेन ज़ी अगर ये कह दें कि आंदोलन दिल्ली में नहीं नागपुर में होगा तो दिल्ली आईं सारी सुरक्षा एजेंसियाँ नागपुर पहुंच जाएंगी। जेन ज़ी को आज मोदी सरकार से बहुत बड़ा सर्टिफिकेट मिल गया है। वो इंस्टा प्राणी नहीं हैं। वही असली इंडिया हैं। जिस जेन ज़ी को इंस्टाग्राम का वासी बता कर खारिज किया जा रहा था, सरकार को वही जेन ज़ी अक्खा इंडिया में नज़र आ रहे हैं। सरकार के पास वोट चोरी और SIR पर जवाब होता तो वह जवाब देती। उसने मान लिया कि वह अपने जवाबों से संतुष्ट नहीं कर पा रही है। इसलिए मेट्रो स्टेशन बंद करना पड़ेगा। ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ेगा। स्टेशन पर अनाउंसमेंट बदल देना चाहिए। टिंग टॉंग- यात्रीगण कृपया ध्यान दें, आपका वोट चोरी हो गया है। शिकायत के लिए कोई थाना उपलब्ध नहीं है। आपका लोकतंत्र लुट गया है। टिंग टॉंग।
जब विपक्ष को दिल्ली में प्रदर्शन करने नहीं दिया गया तो जेन ज़ी को कैसे मिलता। यह बात जेन ज़ी को समझना है। दोनों का मुद्दा एक ही है। अलग अलग मोर्चा होने के बाद भी सरकार दोनों को एक ही चश्मे से देख रही है। सरकार का यह कदम सभी को सोचने के लिए मजबूर करेगा कि अलग-अलग लड़ाई लड़ें या मिल कर लड़ें। गोदी ऐंकरों को आज कल स्पेक्टेकल बड़ा पसंद आ रहा है, वो अब बता सकते हैं कि यह जो हुआ है, वह किस स्केल का स्पेक्टेकल है, उसमें आने वाला कल है भी या जो बचा हुआ था वो कल हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुयान के हैदराबाद में दिए गए इस वक्तव्य के पाँच मिनट के इस हिस्से को सुनिए जो उन्होंने मतदान के अधिकार पर बोला है।
एक एक पंक्ति ऐसी है मानो बग़ीचे से चुन चुन कर सुर्ख गुलाब लाए हों। ज्ञानेश के SIR के ख़िलाफ़ प्रदर्शनकारियों के पथ पर बिछाने के लिए भी और ज्ञानेश का बचाव करने वालों के मुँह पर मारने के लिए भी।
वोटिंग राइट छीने जाने के संदर्भ में वे कहते हैं “यह उस संवैधानिक व्यवस्था को नकारना है जिसे हमने भारत के संविधान के आधार पर अपनाया है। भारतीय नागरिकों का वोट देने का अधिकार विदेशी शासन के ख़िलाफ़ भारत के लंबे सालों के संघर्ष से जुड़ा हुआ है… आर्टिकल 326 के साथ बिल्कुल भी छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। कोई भी अथॉरिटी ऐसा नहीं कर सकती। कोई भी कोर्ट इसका समर्थन या समर्थन नहीं कर सकता… कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।"
26 सितंबर को ECI ने दावा किया कि SIR वाला Form 6 सुप्रीम कोर्ट से मंजूर है।
आज CJI ने साफ कहा—“संशोधित Form 6 को हमने मंजूरी नहीं दी।”
तो सवाल है: ECI ने ऐसा दावा क्यों किया?
देश जवाब मांगता है,
If Gyanesh Kumar does not resign by tomorrow, CJP will begin its nationwide protest from Mumbai on 2 October, and take it to cities across India.
This Gandhi Jayanti let’s pledge to save democracy.
CEC Gyanesh Kumar और Election Commissioners के बीच कथित मतभेदों की खबर सामने लाने वाली Ritika Chopra ने खोले SIR से जुड़े कई बड़े राज! आखिर चुनाव आयोग के अंदर हुआ क्या था? पूरी कहानी वीडियो में.
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'48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार
का इस्तीफा नहीं तो आंदोलन'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke ने कहा, 'अगर 48 घंटे के अंदर ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा नहीं दे देते, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे.'
इंडियन एक्सप्रेस के इस खुलासे से बड़ा सबूत और क्या होगा कि CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की अपनी बपौती समझ रखा है .
दो चुनाव आयुक्तों ने अपने ही आयोग के फैसलों और तौर तरीकों पर दस महीने में 14 बार आपत्ति जताई. आयोग के फैसलों को Illegal और unauthorised बताया. कैबिनेट सेक्रेटरी का दरवाजा खटखटाया.
फिर भी ज्ञानेश कुमार की मनमानी चलती रही . ऐसे CEC को अपने पद पर रहने का हक नहीं है . चुनाव आयोग उनके पिता जी की जायदाद नहीं है .
इतनी महंगाई के लिए भी एक दिया जलाइए… 🪔
आज एक तरफ़ साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है, दीये जलाए जा रहे हैं, जश्न की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं…
और दूसरी तरफ़ जिस घर में रसोई का तेल खरीदना मुश्किल हो गया है, वहाँ चूल्हा कैसे जलेगा?
जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, दवा, बच्चों की फीस, गैस और रोज़मर्रा की जरूरतों में चला जाता है, उसकी परेशानी कौन दिखाएगा?
और बिहार को देखिए…
एक तरफ़ पानी में डूबे घर, बर्बाद फसलें और राहत का इंतज़ार करते 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
दूसरी तरफ़ उसी बिहार में जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के कार्यक्रम हो रहे हैं।
सवाल जन्मदिन मनाने का नहीं है।
सवाल प्राथमिकताओं का है।
जब जनता महंगाई से परेशान हो,
जब बाढ़ में घर डूब रहे हों,
जब परिवार राशन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हों-
तब मीडिया का कैमरा सिर्फ़ जश्न पर क्यों रहे?
एक दिया साहब के जन्मदिन के लिए सही…
लेकिन उस परिवार के चूल्हे के लिए ? जिसमें आज खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं है।
जश्न मनाइए, शुभकामनाएँ दीजिए-
लेकिन जनता की तकलीफ़ को जश्न की रोशनी में छिपाइए मत।
अगर सो कर जाग गए हैं तो इन्हें राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की बधाई दे और बधाई के पात्र बने!
ये वही शख्स है जिनके राज में लाखों कंपनियां बंद होकर करोड़ो लोग बेरोजगार हो गए या न्युनतम मजदूरी पर काम कर रहे हैं।
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस