अमेरिका के जिन 7 सांसदों ने जेल में बंद कुख्यात दंगाई उमर खालिद जिसने दिल्ली दंगों की पूरी पटकथा लिखी थी जिसमें 27 लोग मारे गए थे जिसमें आईबी अधिकारी अंकित कुमार शर्मा की भी हत्या हुई थी जिसका सीसीटीवी फुटेज भी है
उस दंगाई और आतंकी उमर खालिद की रिहाई के लिए चिट्ठी लिखी है
उसमें से चार सांसदों के फोटो राहुल गांधी के साथ आ चुके हैं
हालांकि राहुल गांधी इन सभी सांसदों से मिलते होंगे लेकिन फोटो सिर्फ चार के साथ आई है
अब आप समझ गए होंगे कि राहुल गांधी विदेश में जाकर किस तरह से भारत विरोध का और कट्टर इस्लामी जिहाद का एजेंडा चलाते हैं
यह वही राहुल गांधी है जिनकी सरकार ने हिंदुओं को आतंकवादी साबित करने के लिए साध्वी प्रज्ञा स्वामी सीमानंद कर्नल पुरोहित लेफ्टिनेंट उपाध्याय सहित 12 आईपीएस अधिकारियों दिनेश एम एन राजकुमार पांडियन डीजी बंजारा अभय चुडस्मा शरद सिंगल को दशकों तक जेल में सड़ाया ताकि दुनिया को यह बताया जा सके कि हिंदू आतंकवादी होते हैं
यहां तक कि उस वक्त महाराष्ट्र एटीएस के निदेशक रहे आईपीएस अधिकारी जैन साहब ने भी कहा कि मेरे ऊपर निर्दोषों को फसाने का दबाव है इतना ही नहीं इस मामले के जांच अधिकारी रहे जो खुद एक मुस्लिम पुलिस इंस्पेक्टर थे उन्होंने अदालत में पत्र लिखकर कहा कि मेरे ऊपर निर्दोष हिंदुओं को फसाने का दबाव है
लेकिन मनमोहन सरकार जी जान लगा दी थी कि किसी तरह दुनिया को यह बताया जा सके कि हिंदू आतंकवादी होते हैं
लेकिन राहुल गांधी मुस्लिम दंगाइयों के लिए कितना चिंतित रहते हैं कि विदेशों में जाकर उनके लिए लॉबिंग करते हैं
इनमें इल्हान उमर प्रमिला जयपाल रशीदा तलबी जॉन शकाओस्की से राहुल गांधी की मीटिंग की तस्वीर आ चुकी है
और इन सांसदों ने यह पत्र राहुल गांधी के इशारे पर ही लिखा होगा वरना इन सांसदों का भारत से क्या लेना देना
चाहें वह उप प्रधानमंत्री बन जाए उपराष्ट्रपति बन जाए राष्ट्रपति बन जाए मेजर,जनरल,कमांडर कुछ भी बन जाए
चाहे वह विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक राजधानी न्यूयॉर्क का मेजर बन जाए....
कौम के हीरो के लिए उनकी भुजाएं फड़कती हैं...
उनका नेटवर्क बहुत मजबूत हैं
अगर रिक्शे वाला भी होगा तो भी उसका केस लड़ने के लिये सुप्रीम कोर्ट के सबसे बड़े वकील आगे आ जायेंगे
यही इनकी ताकत है
इसी ताकत से उन्होंने 57 देश बना लिये
और तुम एक शहर क्या एक मौहल्ला भी नहीं बना पाये
दो-हज़ार-छब्बीस में आपका स्वागत है। साल बीतते हैं और कुछ एहसास नहीं होता। एक-एक करके तमाम मुख्य वर्ष बीतते जा रहे हैं और मैं अभी भी उसी मोड़ पे खुद को ढूंढ रहा हूं जहां मैने अपनी बरबादी लिखी थी। उम्मीद करता हूं यह नववर्ष आपको स्वस्थ रखें और आगे ले जाए। प्रसन्न रहें, आबाद रहें।