प्रिय @himantabiswa जी, मैं एक छोटा यूट्यूब पत्रकार हूँ। असम की बाढ़ से हम सब विचलित हैं। उसके लिए राहत हेतु मुझसे, मेरे दर्शकों की ओर से जो भी बन पड़ा, भेज रहा हूँ।
प्रिय पाठकों, आपसे भी अनुरोध है कि जितना ही बन पड़े, हमारे असम के भाई बहनों के लिए योगदान कीजिए!
कैंसर की आखिरी स्टेज में भी बच्चों के भविष्य के लिए आंदोलन में डटी बबिता, पति का हो चुका है नि'धन, रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से बच्चो के लिए एक मां का हृदयविदारक और साहसिक प्रयास
#Ranchi#JPSC#JSSC#JSSC_CGL#HemantSoren
यह कुर्सी कानपुर के श्री मारवाड़ी विद्यालय इंटर कॉलेज में रखी हुई है। प्रेमचंद जी 1921 में इस विद्यालय के प्रधानाचार्य बने थे और लगभग एक वर्ष वहाँ रहे। विद्यालय में उनकी इस्तेमाल की हुई कुर्सी को आज भी स्मृति के रूप में सुरक्षित रखा गया है।
आरंभ है प्रचंड🔥
जब पीयूष मिश्रा ने रांची में मंच से युवाओं के गाया आरंभ है प्रचंड, तो पूरा माहौल बन गया।
JPSC और JSSC में सुधार की लड़ाई अब नहीं रुकने वाली।
बेगूसराय के डॉक्टरों ने टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह गत्ते का कार्टून बांधकर मेडिकल साइंस का पूरा सिलेबस ही बदल दिया है!
जब बिहार का स्वास्थ्य विभाग खुद ही एक कार्टून बन चुका हो, तो मरीज को पार्सल की तरह पैक करने में क्या ही हैरानी!
"यूं भाई तो बहुत हुए लेकिन शेड्यूल कास्ट (SC) को छोड़कर लगभग सब धोखा देकर चले गए |
लेकिन इन्होंने (उमाशंकर सिंह) ने कभी धोखा नहीं दिया"
- बहन मायावती जी
500 में से 11 अंक वाला शिक्षक, आपके बच्चों को पढ़ा रहा है;
800 में से 1 अंक लाने वाला डॉक्टर, अपनी प्रैक्टिस शुरू कर चुका है;
लेकिन आरक्षण पर बात नहीं होनी चाहिए!
टैक्स कौन सा वर्ग सबसे अधिक दे रहा है? देखें इस वीडियो में...
नेहा जी ने बहुत सही बात उठाई है
कि मुस्लिम राज्य में जो हिंदू जजिया नहीं दे पता था उसे कोड़े मारे जाते थे
लेकिन जो भी मुसलमान बन जाता था उसे ₹7 इनाम दिया जाता था जो आज के 7 लाख के बराबर है
तो जो लोग मुसलमान बन गए अपना सामाजिक स्तर ऊंचा कर लिया उन्हें सामाजिक पिछड़ा OBC आरक्षण क्यों?
@myogioffice
जी आपसे उम्मीद है कि इस अन्याय को दूर करेंगे
रणदीप हुड्डा पहुंचे नागालैंड में रबड़ पेड़ों के बागान में तो देख कर चौंक गए। 🔥
रबड़ का पेड़ 365 दिन में सिर्फ 90 दिन ही रबड़ नहीं देता है। इस पेड़ को तैयार होने में 6 से 7 साल लगते है।
आगे देखिए कैसे फिर रबड़ से सामान भी बनाया जाता है।
बिहार के शिवहर की 20 वर्षीय रेखा कुमारी कान का इलाज कराने पटना के महावीर आरोग्य संस्थान गई थीं। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद नर्स ने नस की बजाय आर्टरी में इंजेक्शन लगा दिया। रेखा ने दर्द और तकलीफ़ की शिकायत भी की, लेकिन कथित तौर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा इन्फेक्शन इतना बढ़ा कि उनका हाथ काटना पड़ा। नवंबर 2026 में होने वाली शादी भी टूट गई।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज कराने गए तो पुलिस ने मना कर दिया।
सोचिए, जिस देश में इलाज कराने जाओ और इलाज के बदले अपना हाथ गंवाकर लौटो, वहाँ सिर्फ़ नारे लगाने से क्या होगा? पहले अस्पतालों में जवाबदेही, डॉक्टरों-नर्सों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को न्याय तो सुनिश्चित कीजिए। देश नारों से नहीं, व्यवस्था से देश महान बनता है। पीड़िता की हर संभव मदद की जाए और आरोपियों पर सख़्त क़ानूनी कार्यवाही की जाए।
@BiharHealthDept@officecmbihar@bihar_police@NitishKumar@samrat4bjp@Nishantjdu81
मैं अपने रॉयल एनफील्ड राइडर्स क्लब की इकलौती महिला राइडर हूँ। हम अक्सर रविवार को गुरुग्राम और मुरथल में ब्रेकफ़ास्ट राइड पर जाते हैं। कुछ साल पहले मेरी मुलाक़ात 65 साल के एक बुलेट राइडर से हुई। उन्होंने मुझे लद्दाख राइड के दौरान हुए अपने बुरे अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जब वह कश्मीर में राइडिंग कर रहे थे, तो वहाँ के स्थानीय लोगों ने ज़बरदस्ती उनकी बुलेट से तिरंगा हटा दिया और कहा कि यह कश्मीर है, भारत नहीं।
वहाँ पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन उन्होंने भी उनसे बुलेट से झंडा हटाने को कहा। उन्हें बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और वह रो पड़े।
मैं चुपचाप उनकी बात सुन रही थी। आखिर में मैंने उनसे कहा, "अंकल, जब भी मैं कश्मीर जाऊँगी, तो आपकी तरफ़ से लाल चौक पर तिरंगा फहराऊँगी।" मैंने अपना वादा पूरा किया।
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