The govt should reserve emergency alerts with loud, alarming sirens for truly exceptional threats to life and national security.
Using the same system for routine weather advisories, especially at odd hours, is not just irritating, it creates alert fatigue. If people are repeatedly jolted awake at odd times for warnings that may not affect them, many will eventually start ignoring these alerts altogether.
Weather updates are important, but they can be delivered through SMS, apps, TV, and location-specific notifications, and that is possible because weather events can be predicted well in advance. There is no need to send real-time emergency alerts for them.
Those who agree with me can try (android) settings > safety and emergency > wireless emergency alerts > disable allow alerts.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा दिल्ली NCR में डीजल कार नहीं चलने देंगे। तो पेट्रोल कार खरीद लो। पेट्रोल मंत्री ने पेट्रोल का अधिकार सड़क मंत्री को दे दिया है जो असल में गन्ना मंत्री है। दोनों ने कहा शुद्ध पेट्रोल ���हीं देंगे। 20% मिलावट वाला ही देंगे। तो E20 पेट्रोल कार खरीद ली। मिलावट इतनी है कि अब फ्यूल पंप का इश्यू हो गया। सब कह रहे हैं नई इलेक्ट्रिक कार ले लो। हाउसिंग सोसाइटी ने कहा चार्जिंग सिस्टम नहीं लगेगा, उससे आग लग जाती है। कह रहे हैं ��हीं और नया घर ले लो। इधर पेट्रोल वाली गाड़ी कहीं भी खड़ी हो जा रही। फिर टो कर के सर्विस सेंटर में खड़ी रह रही। पेट्रोल की बचत हो रही है। मोदीजी आह्वान करते उसके पहले ही गडकरी जी ने इंतजाम कर दिया। ऐसी दूरदर्शिता से ही देश चलेगा। दादा कोंडके कहे रहे आगे की सोच। काहे की तुम्हारे पीछे क्या हो रहा है देख लोगे तो तन बदन में आग लग जाएगी। सदन में ठण्डक बनी रहेगी। वहां तुम्हारे चुने गए चन्द्रवदन कोई क्��ंदन नहीं करेंगे। क्रंदन तुम्हारे माथे पर लिखा है जिसे वो पढ़ चुका है। तीन आखर का ही है वो भी। तुमको नहीं अखरेगा। तुम यूज़्ड टू हो। जो लिखा गया है नहीं बदलेगा। तुम्हारा भाग्य, बाबासाहब का संविधान, और सरकार की नीतियां। सरकारें आएंगी, जाए��गी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए। गाड़ियां आएंगी, जाएंगी, पॉलिसियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर इथेनॉल रहना चाहिए। काहे कि एक बार हमने कमिटमेंट कर दी तो अपने आप की भी नहीं सुनते। जनता का फीडबैक घंटा सुनेंगे, मीटिंग की मिनिट्स लेंगे और एक सेकंड में एंटी नेशनल कह कर खारिज़ कर देंगे। सब सहन करो। अपने कर्मों का फल वहन करो। वाहन तुम्हारा गारत, बोलो जय भारत। देश के लिए इतना नहीं कर स��ते। तुम पर लाख लानत।
Mr. Puri, your OWN government’s data exposes you completely.
You say oil companies are losing ₹1,000 crore/day because crude went from $64 to $115.
But here’s what you’re hiding:
- When crude was $115, you FROZE prices for 137 days straight in 2022; because 5 states were going to elections
- When crude FELL back to $75–80, you still didn’t pass on the relief
- March 2024: crude still at $80+, you cut ₹2/litre; not for relief, for Lok Sabha votes
- Meanwhile IOCL + BPCL + HPCL posted ₹81,000 crore RECORD profit in FY24 (PIB’s own data)
- Modi govt collected ₹38.89 LAKH CRORE in fuel taxes since 2014
The “under-recovery” isn’t because of crude prices.
It’s because you weaponised fuel pricing for elections for 10 years, and now the bill has arrived.
Who will pay for it? Not BJP. Not Hardeep Puri.
The same ₹100/litre petrol-buying Indian who already paid ₹38 lakh crore in taxes.
आंदोलन यूजीसी के विरोध में हो रहा है । आंदोलन पहले भी होता रहा है ।
यदि हर आंदोलन के लिए अनुमति मिल सकती है l, तो यूजीसी विरोध के लिए किए जाने वाले आंदोलन में अनुमति मिलने के बाद अनुमति वापस क्यों ले ली जाती है ? यूजीसी विरोध में बोलने वाले वक्ताओं को हाउस अरेस्ट क्यों किया जाता है ?
क्या यह आपातकाल नहीं है ? फिर हम कांग्रेस के आपातकाल की आलोचना किस मुँह से कर सकते हैं ?
#UGC_RollBack
UGC विरोध में कल रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए जा रहे नेताओं और पत्रकारों को नजरबंद और गिरफ्तार किया जा रहा है! जाहिर है सरकार प्रदर्शन नहीं होने देना चाहती और इसलिए बल प्रयोग किया जा रहा है।
आप सोचिए, जि�� देश में भीम आर्मी जब चाहे जहां चाहे सड़क जाम कर दे। मुल्ले सालों साल शहीनबाग में बैठे रहें, खालिस्तानी दिल्ली जाने का रास्ता जाम कर दें, लालकिले पर खालिस्तानी झंडा फहरा दें वहां सवर्णों को अपने अधिकार के लिए एक प्रदर्शन तक नहीं करने दिया जा रहा है।
खैर अगर आपको लगता है कि नजरबंद कर लेने से या गिरफ्तार कर लेने से हमारी आवाज दब जाएगी तो यह आपकी भूल है। आपके नीलराष्ट्र के निकृष्ट सपने के लिए सवर्ण अब अपना बलिदान नहीं दे��ा।
#RollbackUGC #8March_Ramleela_Maidan
Delhi Police has detained Kshatriya Karni Sena National President Dr. Raj Shekhawat, who was set to lead a protest against UGC Regulations 2026 at Ramlila Maidan tomorrow.
The video shows police misbehaving with him and workers, Members warns that if he is not released immediately, thousands of Karni Sena members will march towards Raj Bhavan in protest.
ओहो! सरकार ने तो कोर्ट में यूजीसी का समर्थन नहीं किया न! अब तो स्टे लग गया, फिर क्यों विरोध कर रहे हो? सीधी बात है कि पैसे लिए हैं तुमने।
इतनी सीधी बात है तो बता दो किससे पैसे लिए हैं। मैं तो 15 जनवरी से लिख-बो��� रहा हूँ, मुझे पैसे दिलवा दो, जो भी बाँट रहा है।
दूसरी बात, कोर्ट से स्टे का क्या मतलब है? वापस हुआ? क्या मध्यप्रदेश से ले कर भागलपुर तक इसी तरह के कानून अभी भी विश्वविद्यालयों में नहीं हैं? क्या सरकार समर्थन कर के भी कोर्ट में दो मिनट टिक पाती?
तुम्हें सच में लगता है कि बात केवल यूजीसी की है? जब तुम नाच रहे हो कि मोदी मुस्लिमों को आरक्षण नहीं देगा, उससे वर्षों पहले मोदी के गुजरात समेत क�� राज्यों में (जिसमें भाजपा शासित भी सम्मिलित हैं) मुसलमानों को ओबीसी में आरक्षण मिल रहा है। किसे चूरन बाँट रहे हो?
हर दिन एससी/एसटी/ओबीसी के नाम पर निःशुल्क स्कूल और हॉस्टल खुल रहे हैं। बजट का बहुत बड़ा हिस्सा (2,37,400 करोड़ केवल SC/ST के लिए) आरक्षण भी मिल रहा है और फीस भी नाम मात्र का, या शून्य, देना है। और फंड कौन कर रहा है? वही जिसके बच्चे का एडमिशन रोक दिया है सरकारों ने।
यह यूजीसी तो ऑस्ट्रिया के आ���्चड्यूक फर्डिनांड की हत्या जैसी है। यह तो लास्ट स्ट्रॉ ऑन कैमल्स बैक है। यूजीसी का प्रभाव शैक्षणिक वातावरण की विषाक्तता को ले कर होगा, पर सरकार की नीतियों का क्या जो एक के बाद एक लादी जा रही है और लक्षित कर के सामान्य वर्ग को बाहर किया जा रहा है।
हमारी समस्या इस पूर��� सोच से है जो मुल्ले की टोपी न पहनने को ले कर बीस साल से नाच रही है, हल्ला कराती है जो बात कॉन्ग्रेस तेलंगाना में करने जा रही है, वो भाजपा होने नहीं देगी, पर वास्तव में यही काम तुम हर जगह भिन्न-भिन्न रूपों में कर रहे हो।
बदला केवल इतना है कि कल तो जो इसे अनदेखा करते थे, प्रतिभा के दम पर सर झुका कर आगे बढ़ते थे, उन्हें अब यह स्कीम समझ में आ गई है और उन्हें किसी भी पार्टी के आने या जाने का भय समझ में नहीं आ रहा।
भय तो मेरे जैसों को है जो विजिबल हैं, जो वामपंथी, कॉन्ग्रेसी, सपाई, टीएमसी, डीएमके से ले कर अब भाजपा के भी निशाने पर हैं। हमारे जैसे सौ-पचास के अतिरिक्त, सामान्य मतदाता को क्या फर्क पड़ेगा जो यह मान कर बैठे हैं कि भाजपा उनके बच्चों का भविष्य नेपाल-भूटान-श्रीलंका-यूक्रेन में देख रही है, भारत में तो केवल एससी-एसटी-ओबीसी रहेगा। नहीं समझ में आ रहा तो किसी गाँव में इस पर सर्वेक्षण करना लीजिए कि मोदी समर्थक सवर्ण अब मोदी के बारे में क्या कह रहे हैं।
फिर उन्हें सड़क-हॉस्पिटल-एयरपोर्ट से बहुत मतलब नहीं रह जाता। बात बच्चों की है, सामान्य वर्ग मोदी जी का त्रिपुंड बहुत देख चुका है जिसकी ऊपरी धारी एससी की है, बीच में एसटी है, नीचे ओबीसी और जो बीच का लाल रक्तिम तिलक है, वह सामान्य वर्ग का रुधिर है।
मोदी जी को ���ग रहा हो कि उनके ‘चाय ठंढी करके पीने’ की आदत इस आक्रोश को ठंढा कर देगी तो फिर आप जान लीजिए कि सामान्य वर्ग ने ग्यारह वर्ष धैर्यपूर्वक कोल्ड कॉफी ही पी है। उसने आपकी हर ऐसी जातिवादी नीति का समर्थन ही किया, पर इस बार अति हो गई।
मुझे धार्मिक स्थलों के पर्यटन स्थल बन जाने से परेशानी है। मुझे वहां VVIP नहीं चाहिए, मुझे वहां स्पेशल दर्शन नहीं चाहिए। मुझे वहां अभद्र वस्त्र पहने रील बनाते मवाली नहीं चाहिए। मुझे उन पुराने मंदिरों में वह�� ऊर्जा चाहिए जो पंद्रहवीं या सोलहवीं शताब्दी में थी। स्थलों को बदलना नहीं सुधरना चाहिए।
💕
I will add one personal anecdote.
When I lived in the US, I once had dinner with several very well off immigrants from Shanghai who came through EB5. Over wine, they proudly shared their favorite American shopping hack.
They returned their used luggage to Costco as if it were defective merchandise.
Not broken.
Not damaged.
Just used. By them.
They laughed about how generous the return policy was and how much they loved shopping there because of it.
They were not embarrassed.
They were proud.
That moment explained more about Chinese values than any macro chart ever could.
Reminds me of how China operates in the global trade system.
I simply cannot tolerate the ‘cultural’ practice where one member of the family (usually father/husband/son-in-law) has no choice but to go out every morning & earn for the family, missing breakfast at times, having thanda lunch packed in box or managing with dhabas, road side eateries, or whatever they can get to fill the stomach and still be looked down upon just because after slogging so hard they are seen as oppressors only because they ate first.
Bro bought a mannequin from a local saree shop
Put a bluetooth speaker in it
Connected it with chat GPT
Anpadh Indian media started calling it a state of the art AI robot teacher 😭😭😭😭
When will this country stop hyping mediocrity 🤦♂️
प्रिय मित्र @narendramodi और भारत के वीर नागरिकों के नाम,
सारा और मैं, तथा समस्त इज़राइल, पीड़ित परिवारों के प्रत�� अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं।
इस दुःख की घड़ी में इज़राइल आपके साथ मजबूती से खड़ा है।
भारत और इज़राइल प्राचीन सभ्यताएँ हैं जो शाश्वत सत्यों पर आधारित हैं।
Stray dog menace: Supreme Court passes a slew of directions to Delhi-NCR states, MCD and NDMC to deal with the menace of stray dogs and orders creation of dog shelters across cities. Supreme Court orders authorities to pick up all stray dogs in Delhi-NCR from all localities within eight weeks and to put them in dog shelters, and no stray dog will be released back.
ऑटो लॉबी की गोद में बैठी दिल्ली सरकार जो कर रही है, वह सबको दिख रहा है। प्रदूषण का कोई उचित समाधान न मिलने पर, 10 वर्ष से अधिक के डीजल और 15 से अधिक के पेट्रोल वाहनों को प्रतिबंधित किया जा रहा है।
इसके पीछे कोई तर्क नहीं है। वही पुरानी वामपंथियों वाली नीति कि किसी एनजीओ की कोई रिपोर्ट ह��, जिसे आधार बनाया जा रहा है। कन्स्ट्रक्शन डस्ट और पराली, दिल्ली में सर्दियों में होते प्रदूषण के सबसे बड़े कारण हैं।
उन कारणों पर @gupta_rekha संभवतः कुछ भी न कर पाए, क्योंकि इनके वश का लगता नहीं कि ये पंजाब-हरियाणा के किसानों को समझा सकें। कन्स्ट्रक्शन तो चलता ही रहेगा। फिर, यहाँ ऑटो लॉबी को 7% गिरावट के साथ धीमे पड़ते सेल्स के समय एक दरार दिखती है।
एक कार की किस्तें चुकाने में लोगों के सालों निकल जाते हैं, वो कार की देखभाल करता है, PUC सर्टिफिकेट बनवाता है और एक दिन आपको कहा जाता है कि फलाँ तारीख से आपकी कार सड़क पर नहीं दिखनी चाहिए।
चाहे यह नियम दस साल पुराना हो या कल बना हो, है तो कुतर्क ही। नियम तो और भी बहुत हैं, क्या सरकार नियम से चल रही है? वोटबैंक के लिए हर नियम मोड़े जाते हैं।
क���र वाला कभी वोटबैंक नहीं होता, वो मिडिल क्लास होता है। उसके टैक्स से ‘झुग्गी-मकान’ स्कीम बना कर दिल्ली में मकान बनाए जाते हैं, जबकि वो स्वयं पाँच-दस लाख टैक्स दे कर रेंट पर रहने को विवश है।
यहाँ कॉम्प्रोमाइज्ड नेता कभी ई-व्हीकल को ले कर बकलोली करते हैं, कभी कारों को स्क्रैप करने की योजना ले कर आते हैं। इनके पास अपनी कोई नीति नहीं है, कोई शोध नहीं। फोटो खिंचाने और ‘कुछ करते हुए’ दिखने की लालसा इनके हर निर्णय को धुँधला करती है।
मेरे पास कोई कार नहीं, परंतु ये ऑड-ईवन टाइप की बकलोली का बाप है। यदि मेरी गाड़ी प्रदूषण नहीं फैला रही, तो सरकार उसे प्रदूषण कम करने के नाम पर क्यों प्रतिबंधित करेगी? फिर मैं हर तीन महीने पर प्रदूषण सर्टिफिकेट क्यों बनवाता फिरूँ?
रबड़ स्टैम्प लोगों को पद देने पर ऐसी ही बकलोलियाँ देखने को मिलती हैं। बधाई हो दिल्ली!
Delhi govt’s move to arbitrarily label 10/15 year-old vehicles as junk is a textbook “Tughlaqi farmaan.”
62 lakh vehicles are now off the road, affecting as many families, roughly 2–2.2 crore people. This will have consequences.
The phase-out could’ve been smarter: start with the oldest vehicles, then strengthen PUC enforcement and weed out those that fail. Well-maintained, low-emission vehicles could’ve been few years to plan and offered substantial tax cuts on new purchases. A gradual, targeted approach would’ve reduced the shock and built public trust.
Everyone except the public stands to gain from this. If affected people end up buying new vehicles, the auto lobby will see the biggest business boost in their history. The govt will rake in ₹4–10 lakh crore in taxes, and the insurance industry too will earn handsomely.
A win-win for the govt and big business. And if pollution drops by even 1%, which is doubtful, the govt will be the first to take credit, while the very people forced to bear the financial burden of this exercise won’t even be acknowledged. They simply can’t touch the farmers who burn parali and choke NCR, so instead, they keep squeezing the only group they can, the middle class.