अब तीन चार दिनों तक मीडिया में चर्चा होगी बहुजन समाज पार्टी के बारे में वो भी नकारात्मक जो मिशन 2027 को काफ़ी पीछे लेकर जायेगी।
बहन जी एक बार पुनः विचार कीजिए।
आकाश आनन्द भाई को लेकर आइए।
@Mayawati
"बहन मायावती जी अपने वायदे से मुकर गईं।"
अभी कल बहन जी ने कहा था कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं तो आकाश आनंद को BSP में पुनः पद के साथ काम करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
आज सुबह अशोक सिद्धार्थ जी ने राजनीति से संन्यास ले लिया। उन्होंने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और पद तक का त्याग कर दिया, लेकिन उनके संन्यास के बाद बहन जी अपने ही कहे हुए वादे से पीछे हटती दिखाई दे रही हैं। अब उनका तर्क है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद की नीयत में अभी भी खोट है।
इसके लिए आपने दो तर्क दिए हैं;
पहला, अशोक सिद्धार्थ ने कल के पोस्ट के तुरंत बाद राजनीति से संन्यास क्यों नहीं लिया? चूंकि उन्होंने आज सुबह संन्यास लिया, इसलिए कुछ घंटों की देरी को उनकी नीयत में खोट और राजनीतिक अभिलाषा बरकरार रहने का प्रमाण माना गया।
लेकिन क्या किसी व्यक्ति को अपनी जिंदगी के इतने बड़े फैसले पर कुछ घंटे सोचने और शांत होकर परिस्थितियों को समझने का भी अधिकार नहीं है? राजनीति से संन्यास लेना कोई सामान्य घोषणा नहीं है। वर्षों की राजनीतिक यात्रा को एक झटके में समाप्त करने का फैसला है। इसके बावजूद उन्होंने कुछ ही घंटों में संन्यास ले लिया और कहा कि संन्यास तो बहुत छोटी चीज है, बहन जी के लिए तो जान भी हाजिर है।
दूसरा, आकाश आनंद ने बहन जी के कल के पोस्ट को रीट्वीट नहीं किया। इसलिए यह निष्कर्ष निकाल लिया गया कि उन्हें पार्टी और मूवमेंट से अधिक अपने रिश्तों की चिंता है।
बहन जी, आप देश की इतनी बड़ी नेता हैं। फिर भी इतना हल्का और बचकाना तर्क? क्या किसी व्यक्ति की पार्टी के प्रति निष्ठा अब किसी पोस्ट को रीट्वीट करने से तय होगी? सिर्फ आपका पोस्ट रीट्वीट न करने के कारण आपने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। हद होती है। कोई व्यक्ति दुख में हो सकता है, आहत हो सकता है, चुप रह सकता है। हर चुप्पी विद्रोह अथवा साजिश नहीं होती है।
बहन जी, शायद आपको अंदाजा भी नहीं है कि आप जिस तरह बार-बार आकाश आनंद को सार्वजनिक रूप से जलील कर रही हैं, वह Human Dignity के खिलाफ है। कोई भी व्यक्ति लगातार ऐसी परिस्थितियों में मानसिक रूप से टूट सकता है। आप स्वयं कल्पना कीजिए कि आकाश आनंद कितनी वेदना, पीड़ा और घुटन में जी रहे होंगे। ऐसे समय में उनसे ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने की उम्मीद करना ही अपने आप में असंवेदनशील है।
मुझे दुख इस बात का है कि करोड़ों बहुजनों की आदर्श नेता होने के बावजूद इतनी गंभीर परिस्थिति में इतनी छोटी-छोटी बातों पर आकाश आनंद को जलील कर रही हैं।
असली खेल धूर्त पदाधिकारियों का है, जो वर्षों से बहन जी को गुमराह करके पार्टी को खोखला करने में लगे हुए हैं। बहन जी को यह समझना ही होगा कि जो पदाधिकारी हर बात को अपने हिसाब से छानकर नेतृत्व तक पहुंचाते हैं, जो अपने हित के मुताबिक दूसरों को अच्छा-बुरा साबित करते हैं, दरअसल वही लोग पार्टी और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दीवार बने हुए हैं। और संगठन को सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों से है।
अपने आसपास के उन धूर्त पदाधिकारियों को पहचानिए, जो अपनी कुर्सी, प्रभाव और अकूत धन की लूट को बचाए रखने के लिए जानबूझकर पार्टी को पारिवारिक कलह में धकेल दिए हैं। अगर कोई व्यक्ति पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत करने के बजाय आंतरिक कलह से अपना प्रभाव मजबूत कर रहा है, तो वह पार्टी का हितैषी नहीं हो सकता।
करोड़ों बहुजनों की पहुंच बहन जी तक डायरेक्ट होनी चाहिए, लेकिन अफसोस कि आज वह धूर्त पदाधिकारियों के चंगुल में फंस चुकी हैं। ये वही लोग हैं, जो हर उस मिशनरी की बात को तोड़-मरोड़कर बहन जी तक पहुंचाते हैं, जो पार्टी में कुछ अच्छा करने और मूवमेंट को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। जब ये लोग भूखे गिद्धों की तरह आकाश आनंद का राजनीतिक करियर नोचने पर आमादा हैं, तो सोचिए हम जैसे सामान्य कार्यकर्ताओं की बिसात ही क्या है।
इन मक्कार पदाधिकारियों की कुर्सी बचाना आसान है, लेकिन एक पूरी पीढ़ी के राजनीतिक भविष्य को नुकसान पहुंचने के बाद उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
बहन जी, आपके आसपास के पदाधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन यह आंदोलन और करोड़ों बहुजनों की उम्मीदें स्थायी हैं। इसलिए किसी भी पदाधिकारी को आपके और बहुजन समाज के बीच दीवार मत बनने दीजिए। जिस दिन आम मिशनरी अपनी बात सीधे आप तक पहुंचा सकेगा और आप बिना किसी फिल्टर के जमीनी सच्चाई सुन पाएंगी, उसी दिन आपको पता चलेगा कि ये धूर्त एवं मक्कार पदाधिकारी आपको क्या बता रहे थे और जमीन पर वास्तव में क्या हो रहा है। इस चंगुल से बाहर निकलना अब सिर्फ आपकी मजबूरी ही नहीं, बल्कि बहुजन आंदोलन के भविष्य की जरूरत भी है। आपको इस चंगुल से बाहर निकलना ही होगा।
आपका शुभचिंतक: सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
अत्यंत ही शर्मनाक।
बहन जी, यह सरासर वादाखिलाफी है। अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास ले लिया है। अब आप बहाना कर रही हैं कि उन्होंने कल ही तुरंत संन्यास क्यों नहीं लिया? सदमे में पड़े आकाश आनंद ने आपका पोस्ट RT क्यों नहीं किया?
मानवीय संवेदनाओं को इस कदर कुचलना शर्मनाक है।
बहनजी आप अपनी छवि को ख़ुद धूमिल कर रही हैं इस फैसले से लोग नाराज़ हैं की बहन जी ने अपना वादा तोड़ दिया यह कहकर की आकाश आनन्द ने पोस्ट रिपोस्ट नहीं किया।
लोगों के बीच में आपकी नकारात्मक छवि का प्रसार होगा जो आने वाले आगामी चुनाव में पार्टी के लिए ठीक नहीं हैं।
@Mayawati
बहन जी जो आप कर रही हैं सतीश चंद्र मिश्रा के कहने पर बड़े भाई आकाश आनन्द जी के साथ ये अच्छा नहीं हैं
आपकी जानकारी के लिए बता दूं सतीश चंद्र मिश्रा भी आपकी पोस्ट को रिपोस्ट नहीं करते हैं।
@Mayawati
1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं ख़ासकर यूपी में पाँचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की ज़रूरत पड़ती।
3. वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है।
4. कुल मिलाकर, श्री अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है।
5. किन्तु श्री अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे श्री आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है।
6. इतना ही नहीं बल्कि श्री आकाश आनन्द द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था।
7. जबकि इससे पहले वे बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ व श्री आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है।
8. ऐसे हालात में श्री आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि श्री आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं?
9. इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है।
10. अन्त में यही कहना है कि बी.एस.पी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।
परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श!
माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री कांशीराम जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है। आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूँ । आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।
परमपूज्य आदरणीय बहन जी, मेरे आराध्य तथागत भगवान गौतम बुद्ध और मेरे राजनीतिक आदर्श मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी की क़सम खाता हूँ , कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। आदरणीय बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।
आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश जी को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।
मान० बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद जी को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं...इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है! आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है ,जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने ज़रूर आ जाएगी।
आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश जी की वापसी से मत जोड़िए, माननीय आकाश आनंद जी मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा। उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है !🙏 इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़ कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं।
आदरणीय बहन जी, आप खुद में त्याग और दया की मूर्ती हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्य मंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी, आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं, और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो , गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं। आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।
ससम्मान , जय भीम!! जय भारत!!!
जय बहुजन समाज!
आपका कार्य कर्ता
अशोक सिद्धार्थ
नोट- देरी के लिए क्षमा प्रार्थी!!!
परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श!
माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री कांशीराम जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है। आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूँ । आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।
परमपूज्य आदरणीय बहन जी, मेरे आराध्य तथागत भगवान गौतम बुद्ध और मेरे राजनीतिक आदर्श मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी की क़सम खाता हूँ , कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। आदरणीय बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।
आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश जी को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।
मान० बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद जी को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं...इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है! आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है ,जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने ज़रूर आ जाएगी।
आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश जी की वापसी से मत जोड़िए, माननीय आकाश आनंद जी मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा। उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है !🙏 इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़ कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं।
आदरणीय बहन जी, आप खुद में त्याग और दया की मूर्ती हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्य मंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी, आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं, और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो , गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं। आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।
ससम्मान , जय भीम!! जय भारत!!!
जय बहुजन समाज!
आपका कार्य कर्ता
अशोक सिद्धार्थ
नोट- देरी के लिए क्षमा प्रार्थी!!!
"बहुजन मूवमेंट त्याग मांगता है.."
पार्टी एवं बहुजन मूवमेंट के हितों को ध्यान में रखते हुए
माननीया बहन जी ने आकाश आनंद जी के राजनीतिक भविष्य की यात्रा का रास्ता ससम्मान साफ कर दिया है।
आज बहन जी ने पुनः बहुत ही दृढ़ता के साथ संदेश दिया है कि उन्होंने इस पूरे मामले को केवल पारिवारिक दृष्टि से नहीं, बल्कि पार्टी और मूवमेंट के व्यापक हित में देखा है।
अब अशोक सिद्धार्थ जी से मेरी विनम्र लेकिन स्पष्ट अपेक्षा है कि आप पार्टी और बहुजन मूवमेंट के हित को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लें। यह फैसला आपके लिए व्यक्तिगत रूप से कठिन जरूर होगा, लेकिन कभी-कभी आंदोलन के हित में ऐसे त्याग करने पड़ते हैं, जिन्हें इतिहास बाद में सम्मान के साथ याद करता है।
धूर्त पदाधिकारी भी सचेत हो जाएं, गलत सूचनाएं देकर आप माननीया बहन जी को गुमराह करने की कोशिश भले कर सकते हो, लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि बहन जी को पार्टी, समाज या युवाओं की भावनाओं की परवाह नहीं है। हम जैसे समर्थक जब कुछ लिखते हैं, तो वह उसे पढ़ती हैं और अपने समर्थकों के सुझावों पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय भी लेती हैं। आकाश आनंद से जुड़ा यह हालिया मामला इसका एक उदाहरण है।
अब आगे की जिम्मेदारी अशोक सिद्धार्थ जी की है। करोड़ों आंबेडकरवादियों के वर्षों के अथक संघर्ष और बहुजन मूवमेंट को बचाए रखने के लिए आपको एक बड़ा त्याग करना होगा। आपने लंबे समय तक पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और संगठन ने आपको बहुत कुछ दिया है। अब समय है कि आप भी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर आंदोलन के भविष्य के लिए अपना योगदान दें।
अगर सच में आकाश आनंद के भविष्य और बहुजन आंदोलन की चिंता है, तो उनके लिए रास्ता साफ करने का सबसे सम्मानजनक तरीका यही होगा कि आप सक्रिय राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें। साथ ही, अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी व्यक्तिगत राजनीतिक हस्तक्षेप का माध्यम न बनाएं। उसे निष्क्रिय कर दें या फिर बसपा और बहुजन आंदोलन से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की समानांतर राजनीतिक गतिविधि से स्वयं को पूरी तरह अलग रखें।
अशोक सिद्धार्थ जी, इतिहास हर व्यक्ति को कभी न कभी त्याग का अवसर देता है। आज आपके सामने भी वही मौका है। बसपा एवं बहन जी ने आपको बहुत कुछ दिया है। अब आपके त्याग की बारी है। अगर आपके एक फैसले से आकाश आनंद स्वतंत्र होकर काम कर पाते हैं और बहुजन आंदोलन को नई पीढ़ी का मजबूत नेतृत्व मिल पाता है, तो इससे बड़ा योगदान आपके लिए और क्या हो सकता है?
अब गेंद आपके पाले में है। बहुजन समाज देख रहा है कि आप अपने व्यक्तिगत हित को चुनते हैं या बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित को। आकाश आनंद के लिए रास्ता साफ कीजिए। बहुजन आंदोलन के भविष्य के लिए त्याग कीजिए।
साथ ही, आकाश आनंद भाई, आपको मंगलकामनाएं। बहन जी आपके लिए क्या हैं, यह मुझे लिखने अथवा बताने की जरूरत नहीं है। बहन जी भी आपको अपना दुलारा भतीजा मानती हैं, लेकिन उनका विजन बहुत बड़ा है। बहन जी के लिए समाज के सभी युवा उनके भतीजे हैं। ऐसे में आपको तपस्या से तो गुजरना ही होगा। जिस कारवां को बाबासाहेब आंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब और माननीया बहन जी जैसे महान लोगों ने सींचा हो, उसे आगे बढ़ाने वाले नायक को भी तप से गुजरना ही होगा। इतिहास ने आपको मौका दिया है। बहन जी के भरोसे को जीतिए। मैंने बहन जी का पूरा पोस्ट पढ़ा। पोस्ट पढ़कर यही समझ में आ रहा है कि बहन जी भी मानती हैं कि आकाश आनंद निर्दोष हैं। बस वह कुछ स्वार्थी पदाधिकारियों की साजिश एवं रिश्तों की मकड़जाल में फंस चुके हैं।
मैं पूर्णतः आश्वस्त हूँ कि आपको बार-बार विवादों, पारिवारिक खींचतान और संगठनात्मक उलझनों में धकेलने के बजाय स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। युवा नेतृत्व को सीखने, गलतियां करने, सुधारने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, तभी वह भविष्य में एक मजबूत नेतृत्व के रूप में तैयार हो सकेगा। लेकिन इस मकड़जाल से आपको स्वयं विजय पानी होगी।
आदरणीया बहन जी, आप हमारी आदर्श नेता हैं। मैं जानता हूँ कि बसपा में धूर्त पदाधिकारियों का गिरोह इतना मजबूत है कि इससे मुझे भी नुकसान हो सकता है, लेकिन मैं पार्टी एवं आपका शुभचिंतक हूँ। इसलिए आपसे विनम्र अनुरोध है कि गलत सूचनाएं देकर आपको गुमराह करने वाले पदाधिकारियों पर भी कड़ी नजर रखें और एक ऐसा सिस्टम बनाएं, जिससे पार्टी के आम समर्थक भी आप तक अपनी बात पहुंचा सकें। टिकट दिलाने, डमी कैंडिडेट खड़ा कराने एवं आप तक पहुंचाने के नाम पर अनर्गल और अकूत पैसा लूटने की शिकायतों पर भी गंभीरता से अंकुश लगाना बहुत जरूरी है। तकनीकी के इस दौर में ऐसा सिस्टम बनाना ही होगा। जय भीम।
@Mayawati@AnandAkash_BSP
अशोक सिध्दार्थ जी बहन जी को अपना नेता मानते हुए बड़ा दिल दिखाए और अपने दामाद श्री आकाश आनन्द जी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए राजनीति से अपने संन्यास की घोषणा करें।
@MP_SiddharthBSP
बड़े भाई आकाश आनन्द जी के ससुर अशोक सिध्दार्थ को बिना किसी शर्त के जितना जल्दी हो सके राजनीति से संन्यास की घोषणा कर देनी चाहिए
अगर वो सच में बहुजन समाज का हित चाहते हैं।
@MP_SiddharthBSP
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के आशीर्वाद द्वारा हम सब के चहेते बड़े भाई आकाश आनन्द जी बहुत जल्द वापसी करेंगे।
@Mayawati@AnandAkash_BSP