लेफ्टिनेंट जनरल हणुतसिंह जसोल को नगरवासी देंगे श्रद्धांजलि...
लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जसोल की जन्म जयंती पर आज जसोल नगरवासियों द्वारा श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस अवसर पर पूर्व प्रधान भगवत सिंह जसोल, पूर्व सरपंच जसोल ईश्वर सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम सिंह राठौड़ ने बताया कि सरहदी जिले के छोटे से गांव जसोल में जन्मे व मेहनत से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल पद पद पर पहुँचे हणुत सिंह ने अपने कौशल से जहां देश का दिल जीता बल्कि दुश्मन राष्ट्र पाकिस्तान ने भी उनकी वीरता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्हें फक्र -ए-हिन्द की उपाधि से नवाजा। अनुशासन प्रिय हणुत सिंह ने मेहनत से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल पद पर पहुँचे। वर्ष 1965 व 1971 में हुए युद्ध में हणुत सिंह के पराक्रम में सामने पाकिस्तानी सेना के अधिकारी व जवान हक्के-बक्के रह गए। बसंतर नदी के किनारे भारत व पाकिस्तान के बीच हुआ युद्ध बसंतरा युद्ध के नाम से जाना गया। दुश्मन देश पाकिस्तान ने भारतीय सेना को घेरने, आगे बढ़ने से रोकने के लिए बसन्तर नदी के चारो और लैंडमाइन बिछाई थी। इससे कि भारतीय सेना के इसके ऊपर से गुजरने पर टैंक व सैनिकों के परखच्चे उड़ जाए। लेकिन इस असम्भव से काम को लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह ने सम्भव कर दिखाया। लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जसोल ने 1971 के भारत-पाक युद्ध मे परचम दिखाया था । जनरल हणुत सिंह जसोल ने 1971 के भारत-पाक युद्ध मे इनके नेतृत्व में 48 टैंक ध्वस्त कर पाकिस्तान के आक्रमण को विफल कर दिया था इस युद्ध मे पाकिस्तानी सेना ने भी उनका लोहा माना था तथा फक्र ए हिन्द की उपाधि से नवाजा था।11 अप्रेल 2015 को देहरादून में उनका निधन हो गया था उनकी स्मृति में एक टैंक जसोल स्थित उनकी ढाणी में रखवाया गया है।
बाड़मेर बॉर्डर एरिया है। मीडिया को अपने चैनल पर न्यूज अपलोड करने से पहले जिला प्रशासन से अप्रूवल अनिवार्य किया जाएगा। जिस प्रकार से 2 दिन घटे बाड़मेर मीडिया की साख गिरी
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5 जुलाई को जियो फाइबर बुक करवाया था 48 घंटो का बोला था। रोज मेसेज आ रहे है आज आएगा आज आएगा , अब यह 1000 रुपये रिफण्ड कैसे आएंगे
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