Former UPSC (IAS) Aspirant | UPSC/PCS Educator | Writer| 🗳️ Political Analyst |Ex-Banker with a passion for shaping future leaders & analysing policies. #UPSC
माननीय @NitishKumar आप हमेशा युवाओं की बातों पर ध्यान देते है,बिहार की बेटियाँ आपसे गुहार लगा रही है| आप इतनी बड़ी वैकेंसी लेकर आए लेकिन सिर्फ़ तकनिकी खराबी के वजह से 80000 छात्रों से उनका परीक्षा में बैठने का अधिकार छीन लेना गैर लोकतान्त्रिक है
#Reopen70thBpscForm@Jduonline
ये तो पूरी मेहनत में ही पानी फिर गया।
ये हैं मुंबई मेयर, कैमरे के सामने अच्छी व्यवस्था की शूटिंग कर रही थीं,
तभी एक मूर्ख व्यक्ति जानबूझकर मैनहोल में गिर गया, इस व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए।
पूरा इंप्रेशन खराब कर दिया।
जब भी कोई व्यक्ति पाकिस्तान, आतंकवाद, जिहाद और देशद्रोह जैसे शब्दों का अधिक इस्तेमाल करता है तब मेरा कान खड़ा हो जाता है। फिर थोड़ा रिसर्च शुरू करते है। जानने की कोशिश करते है कि आखिर नब्ज़ कहाँ दबा हुआ?
रौशन आनंद ��ा वकील नीरज सिंह ख़ान बनाम रौशन में पैरवीकार है। उसे चाहिये था की इस केस को उसके मेरिट पर डिफेंड करता। जिसका पक्ष मज़बूत होता वह जीत जाता। लेकिन नीरज सिंह मीडिया के सामने ख़ान का कनेक्शन पाकिस्तान और ISI से जोड़ रहा है।
जबकि इस वकील नीरज के ऊपर चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी की उसकी इंटर्न ब्लात्कार का आरोप लगा चुकी है। पटना हाई कोर्ट ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए मुक़दमा दायर कराया था। वह जेल भी जा चु��ा है। इतना ही नहीं उसका रजिस्ट्रेशन भी सस्पेंड किया गया था कोर्ट में एंट्री पर प्रतिबंध लगा हुआ था। मैंने मीडिया के सारे सोर्सेज को कमेंट में डाला है।
लंबे समय से उसे कोई केस नहीं दे रहा था। इसलिए मौक़ा को ग़नीमत जानते हुए रौशन और ख़ान के केस में कूद गया। अब मीडिया के सामने बाईट देकर अपना PR कर रहा है। इसी बहाने उसे कुछ केस मिलने लगेगा।
रौशन आनंद को चाहिये की ऐसे वकील जो साम्प्रदायिक सोच के साथ-साथ महिला उत्पीड़न का आरोपी है उसको तुरंत हटाये। इससे उन्हीं का नैतिक पक्ष कमजोर होगा। किसी दो व्यक्ति की लड़ाई में पाकिस्तानी, जिहादी, ISI और आतंकी शब्द का प्रयोग करने का मतलब है की पूरे समाज को दुखी किया जा रहा है। क्योंकि यह सारे शब्द एक तरह का स्टीरियोटा���प्स और प्रीज्यूडिसेज़ है जो पूरे मुस्लिम समाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
यह लड़ाई ख़ान से है और ख़ान से ही लड़ा जाये तो बेहतर है। वकील मुवक्किल का पक्ष लेता है। वकील के मुँह से निकला एक-एक बात मुवक्किल का ही समझा जाता है।
राकेश यादव के संस्कार देखिए
एक लड़के ने सिर्फ इतना पूछा कि क्लास लाइव है क्या?
बदले में उसे मिली बहन की गाली,
गाली देने वाले आजकल khan sir को ज्ञान दे रहे हैं
रोशन आनंद और खान सर विवाद में अब एक बड़े शिक्षक की एंट्री हो चुकी हैं।
जिनका नाम राकेश यादव है ,जो कभी इंटरव्यू में खान सर को एक फूल बताते थे ,
जिनका कहना था कि खान सर वो फूल है जिसने लाखों बच्चों को खुशबू दी है
और बिहार में 25 से 30 लाख परिवार होंगे जिनके बच्चों ने खान सर से पढ़कर सरकारी नौकरी ली है।
आज Rakesh Yadav वीडियो के माध्यम से खान सर पर बहुत सारे आरोप लगा रहे हैं।
Neet परीक्षा हो या उत्तर प��रदेश लेखपाल और दरोगा परीक्षा राकेश यादव कभी भी छात्रों के आंदोलन में शामिल नहीं हुआ।
लेकिन अचानक से खान सर पर आरोप लगाकर साबित कर दिया कि राकेश यादव के अंदर कितना जातिवाद भरा हुआ है।
रोशन आनंद और खान सर विवाद में अब एक बड़े शिक्षक की एंट्री हो चुकी हैं।
जिनका नाम राकेश यादव है ,जो कभी इंटरव्यू में खान सर को एक फूल बताते थे ,
जिनका कहना था कि खान सर वो फूल है जिसने लाखों बच्चों को खुशबू दी है
और बिहार में 25 से 30 लाख परिवार होंगे जिनके बच्चों ने खान सर से पढ़कर सरकारी नौकरी ली है।
आज Rakesh Yadav वीडियो के माध्यम से खान सर पर बहुत सारे आरोप लगा रहे हैं।
Neet परीक्षा हो या उत्तर प्रदेश लेखपाल और दरोगा परीक्षा राकेश यादव कभी भी छात्रों के आंदोलन में शामिल नहीं हुआ।
लेकिन अचानक से खान सर पर आरोप लगाकर साबित कर दिया कि राकेश यादव के अंदर कितना जातिवाद भरा हुआ है।
वैसे यें बात सभी पर लागू होती है "रजत जी"
आपको भी देश कि फ़िक्र करनी चाहिए | देश और जन सामान्य के मुद्दों पर न्यूज़ दिखानी चाहिए थी! लेकिन आप भी कुछ लोगों का साथ दें कर, इस ��ेश को और जन सामान्य को कहीं का नहीं छोडेंगे.....
एक डिप्टी CMO को महज़ 55000 रुपयों की घूस लेनी पड़ रही है,
और इतने में पकड़ भी जा रहे हैं।
इतने बुरे दिन अधिकारियों के पहले कभी नहीं रहे,
ऐसे बनेंगे हम विश्वगुरु??
Train No. 22480 | PNR: 2157505364
ट्रेन में लगातार ओवरचार्जिंग हो रही है। ₹20 की Lemon Soda ₹30 में और नकली पानी ₹20 में बेच रहे। बिल मांगने पर बिल नहीं दिया पैंट्री मैनेजर बेचवा रहे है स्टाफ वेंडर का कहना है और किसी स्टॉफ के पास id नहीं स्टाफ यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा है। मेरे पास वीडियो और ऑनलाइन पेमेंट के सबूत मौजूद हैं। कृपया तत्काल जांच कर संबंधित मैनेजर एवं स्टाफ के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
@RailMinIndia@IRCTCofficial@RailwaySeva@RailMadad
@drmdnr@RailwaySeva@rpfecr@rpfecrdnr@DRM_DDU Prompt action was taken in response to the tweet, and the police quickly arrived to remove passengers traveling without confirmed tickets, restoring order in the coach.
A sincere thank you to Indian Railways for the swift response and timely assistance.
I am traveling with my family on Train No. 15946 from Cooch Behar to LTT. In our 2-tier coach A-2 ,a large crowd boarded at Patna,causing severe inconvenience to passengers traveling long distances, especially families with children. It has become difficult.
@AshwiniVaishnaw
@RailwaySeva@drmdnr Prompt action was taken in response to the tweet, and the police quickly arrived to remove passengers traveling without confirmed tickets, restoring order in the coach.
A sincere thank you to Indian Railways & @drmdnr for the swift response and timely assistance.
>नाम शुभम अग्रवाल
>UPPSC से फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट से नायाब तहसीलदार
>2017 से फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट पर लगातार UPSC की परीक्षा दे रहे
>इनकी विकलांगता का प्रतिशत हर दिन बदलता है
>कभी 40 प्रतिशत कभी 1 प्रतिशत तो कभी 67 प्रतिशत
>2024 में इनका UPSC चयन हुआ
>लेकिन जब जब जांच के लिए बुलाया गया तब तब नहीं गए
>अगर पहुचें भी तो वहाँ से फरार हो गए
>जब खुरपेंच और शिकायतकर्ता इनके पीछे लग गए
>अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जाँच कमेटी से जाँच करवाकर इनको विकलांग सर्टिफिकेट से जॉब लेने के लिए अयोग्य माना है
> @DoPTGoI से अनुरोध है कि तत्काल कार्यवाही हो और यूपी गवर्नमेंट से अनुरोध है कि इन्हें पदमुक्त किया जाये
कांग्रेस जैसी भी थी, इतनी उद्ददण्ड नहीं थी, उत्तरदायित्व का पालन करती थी, मंत्रियों के इस्तीफे होते थे! PM प्रेस कांफ्रेंस करता था, मेलोडी नहीं खिलाते फिरता था.... देश कि साख बची हुई थी
कांग्रेस की नाकामी और भ्रष्टाचार से परेशान होकर देश ने बदलाव चुना था। लोगों को लगा था अब समय पर projects पूरे होंगे, corruption कम होगा और जनता के टैक्स का इस्तेमाल सही होगा।
लेकिन आज फिर वही खड़े हैं -
क्यों कई बड़े projects की लागत दोगुनी-तीन गुनी हो जाती है?
क्यों deadlines बार-बार बढ़ती हैं?
क्यों वही बड़ी कंपनियां लगातार मोटे contracts लेती रहती हैं जो चुनावी चंदा देती हैं?
क्या आम जनता सिर्फ टैक्स देने और महंगाई झेलने के लिए है?
Road project हो, smart city हो, pollution control हो या infrastructure ,ground reality और सरकारी विज्ञापनों में इतना फर्क क्यों है?
जनता ने सरकार event management के लिए नहीं चुनी थी।
लोगों को जवाब चाहिए |
वादों का क्या हुआ?
रोजगार का क्या हुआ?
महंगाई कम क्यों नहीं हुई?
और सबसे जरूरी क्या?
सत्ता और चंदा देने वाली कंपनियों का रिश्ता अब नीति तय करेगा?
देश को transparency चाहिए, सिर्फ नारेबाजी नहीं।
रिपोर्टर – जब भारत में मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, तो नॉर्वे भारत पर ���रोसा क्यों क��े?
MEA – हमारे पास गांधी हैं, प्राचीन सभ्यता है, और एक संविधान है जो मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है।
रिपोर्टर – बिल्कुल। मुझे पता है कि भारत में मौलिक अधिकार हैं। इसलिए तो मैंने उनके उल्लंघन पर सवाल पूछा।
MEA – अगर अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो लोग कोर्ट जा सकते हैं।
रिपोर्टर – यही तो मुद्दा है। लोगों को अपने बुनियादी अधिकारों के लिए कोर्ट जाने पर मजबूर क्यों होना पड़ता है?
MEA – यह मेरी प्र��स कॉन्फ्रेंस है। मैं तय करूंगा।
रिपोर्टर – पीएम प्रेस से खुले सवाल कब लेंगे?
MEA – अगला सवाल।
अपने दूसरे बच्चे (मीरा) के जन्म के बाद, ज्वाला गुट्टा ने महसूस किया कि उनके शरीर में उनकी अपनी बच्ची की जरूरत से कहीं अधिक दूध बन रहा था, उन्होंने डॉक्टर और बहन की सलाह पर अतिरिक्त ब्रेस्ट दूध को बर्बाद करने के बजाय नवजात बच्चों के लिए दान देना शुरू कर दिया,
उन्होंने सरकारी अस्पतालों और मिल्क बैंकों को कुल मिलाकर 30 से 50 लीटर तक ब्रेस्ट मिल्क दान किया है,
वह इस डोनर मिल्क ड्राइव के तहत रोजाना लगभग 600 मिलीलीटर दूध निकाल कर अस्पताल में देती थीं,
उन्होंने चेन्नई के Egmore के NICU में भर्ती बच्चों के लिए Amirtham Foundation के माध्यम से भी 14,500 मिलीलीटर (70 पैकेट) दूध पहुंचाया,
उनका ��ह योगदान उन मासूम ��च्चों के लिए साक्षात जीवनदान साबित हुआ, जो जीवन और मौत के बीच आईसीयू (NICU) में जूझ रहे होते हैं, जिनकी माताएं ना रही या उनके शरीर में बीमारी या कुपोषण के कारण पर्याप्त दूध नहीं बन पाता, ज्वाला गुट्टा के इस 'लिक्विड गोल्ड' ने न जाने कितने मासूमों को संक्रमण से बचाया और उन्हें एक नया जीवन दिया है।