विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) पर पूर्ण रूप से भारत (भारतीय रिज़र्व बैंक / भारत सरकार) का ही मालिकाना हक और कानूनी अधिकार होता है। इसी कारण यह देश की सॉवरेन परिसंपत्ति (Sovereign Asset) कहलाती है, न कि कोई बाहरी देनदारी। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इसका हिस्सा 85% है।
शेष 15 प्रतिशत ��िस्सेदारी में लगभग 10-12% स्वर्ण भंडार की होती है।
और शेष 2-3 प्रतिशत SDR और TRP की होती है।
लेकिन वामपंथ के सबसे कुख्यात अड्डे JNU के सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग (CESP) में 31 साल अर्थशास्त्र पढ़ाता रहा है यह धूर्त। और देश के विदेशी मुद्रा कोष के बारे में सुनिए यह क्या बता रहा है।
सोच लीजिए कि, कांग्रेसी राज में कैसे कैसे गधो ने कितना जमकर पंजीरी खायी है, और अब उस पंजीरी का कर्ज उतारने में बेशर्मी ���े जुटे हैं।
2मिनट के इस वीडियो में यह मोदी विरोध में ऐसा सुलगा है कि, और भी कई सफेद झूठ बोले हैं जिनकी धज्जियां रात को उड़ाऊंगा।
राहुल गाँधी मानते हैं सरकार पर एंटी इन्कंबेंसी या मोहभंग का असर न होने का मतलब वोट चोरी है। क्या वाकई मोहभंग नहीं हो रहा या विपक्ष सही विकल्प नहीं रख पा रहा? शिक्षा परीक्षा रोजगार खेती कान���न-व्यवस्था महँगाई और चुनाव सुधार को लेकर ऐसा क्या है जिससे वोटर विपक्ष पर भरोसा करे? पढ़िए:
जस्टिस भुइयां ने कमाल किया है - सीजेआई की बेंच को ऑर्डर ही डिक्टेट कर दिया है ? और दिन कौन सा है जब अगले दिन सीजेआई की बेंच मामला सुनेगी, लेकिन इतना नहीं है - ये ��ो उस नालसार हैदराबाद के कैंपस में बोल रहे है जहाँ कुछ हफ़्ते पहले सीजेआई के आने का बहिष्कार कर उनका प्रोग्राम रद्द कराया था , और इतना ही नहीं जस्टिस भुइयाँ असम से है जहाँ छात्र आंदोलन में SIR जैसी व्यवस्था की माँग की गई थी और मणिपुर में आज NRC की माँग हो रही है और इतना ही नहीं वो 2011 में हाईकोर्ट में नियुक्त हुए जहाँ राज्य हो या केंद्र दोनों। में कांग्रेस की डबल इंजन की सरकार थी और इतना ही नहीं वो उस राज्य से आते है जहाँ से बहरूल इस्लाम आते है ? अब बहरूल इस्लाम को नहीं जानते है तो आप न्याय पालिका के काले अध्याय को नहीं जानते है । धन्यवाद लिख तो और भी सकता हूँ लेकिन आज यही तक।
सरकार देवी-देवता, ऋषि-महर्षि और धर्म ग्रंथों के अपमान के खिलाफ SC-ST ऐक्ट जैसा कानून क्यों नहीं बना रही है?
सरकार ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, जैन, सिख के जाति सूचक अपमान के खिलाफ SC-ST ऐक्ट जैसा कानून क्यों नहीं बना रही है?
@PMOIndia@HMOIndia
नफ़रत क्या होती है इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण फ्लाइदुबई की उड़ान को बचाने के लिए गुजराती मूल के कैप्���न स्मित मछार के अदम्य साहस पर भारत के एक वर्ग विशेष का मौन है!
#धन्य_हो_सवर्णों 🙏
जस्टिस संजीव खन्ना जी की तीखी टिप्पणियाँ, मोदी सरकार को सख्त चेतावनी।
#जाति की पूरी व्यवस्था आपने #सवर्ण_समाज पर मढ़ कर समाज में नफरत घोल दिया है।
क्या #मुस्लिमों और ईसाई की जातियाँ भी #सवर्णों ने बनाई हैं?
अगर सवर्ण की जातियों से इतनी दिक्कत है तो आज ही अपने नाम से जाति हटा लीजिए, और जाति के नाम पर आरक्षण लेना बंद करो।
कौन आपको अपने नाम के आगे जाति लगाने के लिए विवश कर रहा है?
अगर एक समाज, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद बनकर भी
खुद को शोषित ही मानता है 👇👇
तो इसमें गलती सवर्ण समाज की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है।
सवर्णों एकता बनाए रखना अभी तो शुरुआत है, आगे आगे देखो होता है क्या??
💪 सवर्ण शेरों दहाड़ लगा दो
🔥 UGC ROLLBACK
⚖️ SC/ST ACT
💥 RESERVATION REFORM
कितने कमाल की बात है कि भर दुनिया को पता चल च���का है कि प्लेन बचाने वाला भारतीय पायलट था लेकिन इतनी देर बाद भी इस बात पर सन्नाटा है कि प्लेन गिराने की कोशिश करने वाला पायलट कौन था।
अभी तक की खबरों के मुताबिक हमलावर को-पायलट ओमान का था।
सोचिए अगर हीरो और विलेन अगर इंटरचेंज हो जाते तब देखते कि कैसे पूरा इकोसिस्टम घोड़े खोल देता माहौल बनाने के लिए।
बेगूसराय के एक स्कूल में छात्र खुल्लम-खुल्ला मोबाइल से नकल कर रहे हैं। कोई इनविजीलेटर नहीं है।
आईआईटी बॉम्बे की घटना के बाद किसी इनविजीलेटर की हिम्मत नहीं पड़ रही है कि छात्रों को नकल करने से रोके।
उन्हें एससी एसटी एक्ट में फस जाने का डर सता रहा है।
यह डर नकल करने वालों के लिए अच्छा है।
जितने गुजरे फर्जी और घुसपैठियों के नाम भारत की वोटर लिस्टों में हैं उतनी तो बहुत देशों की आबादी नहीं है! मिलावट और फर्जीवाड़े के लिए बदनाम देश में 25 साल से SIR नहीं हुआ! फिर भी उसके खिलाफ जैसा हाहाकार मचा है वह घाना के सिवा कहीं नहीं देखा! संविधान बचा रहे हैं या हार नहीं पच रही?
जब इनकी सरकार नहीं थी- "सरकार दो, 3 महीने में नशा खत्म।"
सरकार आई तो 'चिट्टा' बेचने वाले बेखौफ घूम रहे हैं और ड्रग माफिया का भंडाफोड़ करने वालों को कुचला जा रहा है।
अरविंद केजरीवाल झूठ बोलने में इतना माहिर है कि अपने बच्चों की भी झूठी कसम खा जाए।
IIT बॉम्बे की टॉपर प्रिया मिश्रा का बयान चर्चा में है।
तीसरे साल की छात्रा प्रिया मिश्रा ने कहा —
“छात्र के परिवार के लिए दुख है। लेकिन सूर्यनारायण सर को सजा क्यों मिल रही है? अगर नकल नहीं होती, तो सर कोई कार्रवाई नहीं करते।
30-40 पर्सेंटाइल लेकर IIT में आ जाते हो, और फिर परीक्षा मे��� मोबाइल से नकल करना चाहते हो क्योंकि दबाव नहीं झेल सकते। मैं 90 प्रतिशत ला सकती हूँ, लेकिन मेरे पास आईफोन खरीदने के पैसे नहीं हैं।
विशेषाधिकार मुझे मिलना चाहिए, ऐसे बच्चों को नहीं।
केस उनके माता-पिता पर होना चाहिए। केस उस सिस्टम पर होना चाहिए जिसने एक कमजोर और अनपढ़ बच्चे को इतने बड़े संस्थान में भेज दिया, जहाँ दिमाग, IQ और दबाव झेलने की हिम्मत चाहिए।
अगर दबाव नहीं झेल सकते तो घर बैठो। सीट बर्बाद मत करो। सूर्यनारायण सर का इस्तीफा इस देश के हर ईमानदार शि���्षक का अंत है, और अब नकल शर्मनाक काम भी नहीं रहेगी।”
IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े परीक्षा में मोबाइल लेकर पकड़े गए। IIT के मुताबिक प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर जवाब लेने की कोशिश की गई.
ड्यूटी पर मौजूद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने पकड़ लिया। IIT का दावा है कि न सस्पेंड किया, न कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की—काउंसलिंग करके वापस भेज दिया.
फिर साहिल की मौत हो गई। परिवार ने जातिगत उत्पीड़न के ���रोप लगाए और अब प्रोफेसर पर SC/ST Act और आत्महत्या के लिए उकसाने की FIR दर्ज है। IIT ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है.
अब जरा इस व्यवस्था पर सवाल पूछिए...
परीक्षा में नकल रोकना अपराध है या जाति देखकर नकल रोकनी चाहिए?
क्या IIT में परीक्षा के नियम भी अब जाति देखकर लागू होंगे ?
मोबाइल लेकर परीक्षा में बैठना—नियमों का उल्लंघन
AI पर प्रश्नपत्र डालकर जवाब लेना—गंभीर सवाल
प्रोफेसर का पकड़ना—उसका क���म
लेकिन छात्र की मौत के बाद अगर हर सवाल का जवाब SC/ST Act में खोजा जाएगा, तो कल शायद परीक्षा में नकल पकड़ने से पहले invigilator को यह पूछना पड़े “पहले जाति बता दीजिए, फिर नकल रोकूं”
जातिगत भेदभाव के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले किसी को दोषी घोषित करना भी न्याय नहीं है।
नकल रोकने वाला शिक्षक अपराधी और नकल करने वाला पीड़ित—क्या यही नया अकादमिक मॉडल है?
#IITBombay #SahilWakode #SCSTAct #ChatGPT
@iitbombay
@iitalumni
सोनीपत में गेट खुलते ही सामने खड़ी महिला के गोद से बच्चे को छीनकर पिटबुल कुत्ते ने नोच डाला, ख़तरनाक कुत्ते लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं और हम सब मजबूर हैं..
मुद्दा सभ्यता पेश करने से अधिक सभ्यता बचाने का है! जलवायु ��ैज्ञानिक शाकाहार अपनाने के लिए कह रहे हैं क्योंकि मांसाहार उससे 8 गुना ग्रीनहाउस गैसें छोड़ता है! धान भी मिथेन छोड़ता है इसलिए श्रीधान्य परोसा गया! यदि नेता ही मांस के लिए लपलपाएँगे तो लोग क्यों जलवायु रक्षा को आगे आएँगे?
UGC के विरोध में जो भी कंटेंट क्रिएटर , नेता , अभिनेता ,कवि वीडियो बना रहे है। उन सबको सपोर्ट करो। उनका वीडियो शेयर और पोस्ट करके उनका मनोबल बढ़ाओ।
ताकि के खिलाफ माहौल बने और ये यूजीसी नामक काला कानून वापस हो।
वरिष्ठ पत्रकार श्री प्���दीप सिंह जी ने वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा, बीजेपी ने कोर्स करेक्शन की बजाय इस मुद्दे को और बढ़ाकर समाज के दो वर्गों को आमने-सामने खड़ा कर दिया।
तात्कालिक राजनीतिक लाभ किसी को मिल सकता है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नुकसान अंततः समाज को ही भुगतना पड़ेगा।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं कि गैर-जाटव दलितों को अब किसी पार्टी की ज़रूरत नहीं है, वे ऑटो-पायलट मोड पर हैं। बस उनका SC/ST कानून नहीं बदलना चाहिए। उनको अपना हथियार मिल गया है ,ऐसा हथियार, जिससे वे हर पार्टी को ठीक कर सकते हैं।
मोदी सरकार ने दलितों के एक वर्ग को रोजगार का नया अवसर दे दिया है। कुछ करने की ज़रूरत नहीं है, ��ुबह उठो, थाने जाओ और जिस पर मन हो, उस पर FIR करा दो।
16 लाख कुल आपको मिलना है। तुरंत आपको 8 लाख तुरंत मिल जाएगा, फिर केस की सुनवाई पर और 25 प्रतिशत, और बाकी 25 प्रतिशत फैसला आने पर।
और सबसे बड़ी बात, अगर आपका आरोप झूठा साबित हुआ तो आपको मिले हुए पैसे लौटाने भी नहीं हैं। तो इसलिए वे परवाह ही नहीं करते कि झूठा आरोप लगा रहे हैं या सही आरोप लगा रहे हैं।
पैसा तो मिलेगा ही, बस वो आखिरी वाला 25 प्रतिशत नहीं मिलेगा। बस इतना ही नुकसान है। मतलब, मुनाफे में घाटा ���ै।
सवाल यह है कि अब देखना है BJP इसे कहाँ तक लेकर जाती है।