@ArjunsinghWB Certain municipal employees specifically laborers and clerks are being assigned high-level duties under the guise of fictitious UDC (Upper Division Clerk) posts. These employees belong to the Bhatpara Municipality. (Source from their appointment letter)
योजनाएँ तो बनती हैं जनता के लिए,
पर जब नीयत बीच में बदल जाती है
तो सुविधाएँ रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं,
सरकारी नियमों को भी दरकिनार कर दिया जाता है,और यही कारण है कि योग्य का हक मार लिया जाता है।
लोकतंत्र में मीडिया का काम सत्ता से सवाल करना है, ��� कि उसके साथ हाथ मिलाना।
जब मीडिया निष्पक्षता छोड़कर सत्ता का पक्ष लेने लगता है, तब लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता की आवाज दब जाती है।
स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार मीडिया ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
“जब जनकल्याण की योजना जनता के सपनों के लिए बने, लेकिन ज़मीन पर सि���्फ़ ठेके और कमीशन ही दिखें,तो सवाल उठना स्वाभाविक है!क्या यह विकास की योजना है या नेताओं की कमाई की स्कीम?”
तृणमूल कांग्रेस हर सीट पर बीजेपी की चुनौती दे रही है, और अगर वह स्थानीय मुद्दों को सही ढंग से लोगों तक पहुंचाती है, तो वह भी भाटपाड़ा में वापसी कर सकती है।
“उपनाम ‘सिंह’ नहीं, बल्कि असली जाति तय करती है कि कोई SC है या नहीं। अगर फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे कोई नौकरी और पदोन्नति पा रहा है,तो यह सिर्फ नियमों का नहीं संविधान का अपमान है।”
“चंद पैसों और संरक्षण के लिए अपनी कलम, कैमरा और आवाज़ मत बेचिए। सच दिखाना ही आपकी असली जिम्मेदारी है। नेता बदल जाते हैं, लेकिन जनता का टूटा भरोसा वापस नहीं आता।”
बंगाल में सवाल किसी पार्टी का नहीं, लोकतंत्र के भरोसे का है। जब पैसा नौकरी दिलाए, हिंसा चुनाव जिताए और प्रशासन मूकदर्शक बने तब जनता के हक़ की रक्षा के लिए राष्ट्रपति शासन ही आख़िरी विकल्प रह जाता है।
जब राजनीति का उद्देश्य सेवा नहीं, सत्ता हो जाए; जब कूटनीति का स्थान षड्यंत्र ले ले; और जब लूटनीति क��� नीति बना दिया जाए — तब समाज में शांति नहीं, केवल संघर्ष उपजता है।#मुर्शिदाबाद #पश्चिमबंगाल # india