❗सिर्फ अहल-ए-सुन्नत कहना काफी नहीं !
बल्के *अहल-ए-सुन्नत बरेलवी* या *सुन्नी बरेलवी* होना जरूरी है क्योंकि *मुसलमानों को धोखा देने के लिए देवबंदी भी खुद को अहल-ए-सुन्नत कहते हैं!* और
सुन्नी बरेलवी वह है जो नबी ए पाक ﷺ की सच्ची अज़मत व मुहब्बत अपने दिल में रखता हो और देवबंदियों
इमामे अहले सुन्नत इमाम अह़मद रजा़ खा़न फा़ज़िले बरेलवी रह़मतुल्लाह अलैहि ने देवबंदियत दीन के बानी मौलवी रशीद अहमद गंगोही को 16 साल तक मुनाज़रे का चैलेंज देते रहे मगर पूरी जिंदगी में 1 बार भी आला हजरत के मुकाबला में मुनाज़रा के लिए रशीद अहमद गंगोही नहीं आया।
इसके अलावा
आपने हमारा वोट चोरी करने के लिए हमसे परमिशन नहीं ली तो हमें प्रदर्शन करने के लिए सिर्फ संविधान की परमिशन की जरूरत है और वो अधिकार हमें संविधान ने दिया है। कोई पुलिस हमें रोककर ज्ञानेश को नहीं बचा सकती।
- नेहा बोरा
आजकल के जजों के पक्षपाती और धार्मिक आधार पर फ़ैसले को देखकर कुछ ऐसा ही लगता है,हाइ कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इंसाफ़ ने दम तोड़ दिया है। निर्दोष जेलों में बंद हैं और अपराधी और बलातकारी आज़ाद घूम रहे है।
ऐसी अदालत का क्या मतलब है जहाँ न्याय ही न हो....!!
क़ासिम नानोतवी उलमा ए देवबंद की नज़र में...!!🔥
देवबंदी मज़हब के बानी और क़ायम करने वाले क़ासिम नानोतवी की इल्मी अख़्लाक़ी और मु'आशरती हैसियत क्या है....!!
क़ासिम नानोतवी की हक़ीक़त...!!🔥
देवबंदी फिरका एक बातिल और गुस्ताख़ फिरका है यह दुनिया में किसी से छुपा नहीं है और इस फिरके का बानी क़ासिम नानोतवी है .....!!
ये वही लाल रुमाल ख़बीस मौलवी #मुजफ़्फ़र_बिहारी है जो कहता है कि नबी ए करीम ﷺ की कब्र की जिय़ारत की नियत से मत आओ यह जायज़ नहीं है।
लेकिन जब बात उसकी माँ की आती है तो ये लाल रुमाल मरदूद अपनी माँ की क़ब्र पर जिय़ारत के लिए पहुंच जाता है। अब सवाल यह है कि
यह मोदी/योगी का नया भारत है, जहाँ पुलिसकर्मी वर्दी में 'मुजरा' तो कर सकते हैं, लेकिन...
कोई मुसलमान पुलिस वाला सलाम नहीं कर सकता वरना, लाइनहाजिर और ट्रांसफर तय है!!
उसने अपना ईमान खोया वो अपनी पहचान खोएगा !!
*सय्यदी सरकार ताजुश्शरिया (अलैहि रहमा)*
`इस पैगाम को अपनी ज़िन्दगी में सख़्ती के साथ अमल कीजिये इसी में कामयाबी है`..
दुनिया इधर से उधर हो सकती हैं, आसमान फट सकता हैं फट के रहेगा, और जमीन फट सकती हैं और फटेगी,, कयामत आयेगी, लेकिन सुन्नी और गैर सुन्नी का इत्तेहाद नहीं हो सकता ! जो ये इत्तेहाद मनायेगा और जो ये इत्तेहाद को कहेगा, और जिसने कहा के कब्र में मसलक नहीं पूछा जायेगा,
ये सभी अपराधी, बलात्कारी और दंगाई,BJP सांप्रदायिक पार्टी से जुड़े हुए हैं।
सबसे पहली बात तो यह है कि इन अपराधियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करने में पुलिस प्रशासन सक्षम नहीं ; अगर भारी दबाव में उन्हें गिरफ़्तार भी कर लिया जाता है, तो BJP उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश करती है
विक्टोरियन अहले हदीस चूंकि जाहिलों का गिरोह है, और फ़ितना उनके फ़ितरत में शामिल है। सादा -लौह सुन्नी मुसलमानों का अक़ीदा ख़राब करने के लिए ये नित नए फितना फैलाते रहते हैं जिनमें से एक फ़ितना अल्लाह तआला को अर्श पर बैठाना है।
ये ख़बीस सिफत लोग आयत ए मुताशाबिहात को पेश कर के
"कादयान और देवबंद अगरचे एक दूसरे की ज़िद हैं, लेकिन दोनों का सर-चश्मा एक है और दोनों उस तहरीक़ की पैदावार हैं जिसे 'उर्फ़-ए-'आम में "वहाबियत" कहा जाता है।"
यानी अगर हम ये कहें कि देवबंदी और कादयानी आपस में भाई-भाई हैं तो कुछ ग़लत नहीं होगा !!