@GMNWRailway@RPF_INDIA@RpfNwr@rpfnwrjp@SrDCMJaipur@RailwaySeva पैसेंजर ट्रेन में सवार है और आश्चर्य जनक बात है कि त्वरित एक्शन का दावा करने वाली रेलवे पुलिस फोर्स का एक भी जवान अभी तक पीड़ित के पास नहीं पहुंचा है जबकि पीड़ित का पर्स चोरी हुए आधा घंटे से अधिक का समय हो गया हैइतने देर बाद चोर कैसे पकड़ पाएगी रेलवे पुलिस और grp यह समझ से परे है
एक-एक शब्द सच और दिल से निकला हुआ
प्राइवेट अस्पतालों में मरीज को जिस तरह नोंचा जाता है, उस पर कोई लगाम नहीं है। परिवार एक ही बार में यहां से गरीब बनकर लौटता है
युवा दिलों की धड़कन एवं प्रदेश के लोकप्रिय, ऊर्जावान, जननेता, उद्योग एवं खेल मंत्री ( कैबिनेट) राजस्थान सरकार को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।
राहुल भारद्वाज
@ra_thore@BJP4Rajasthan@BJP4India#Jaipur#rajasthan
मीडिया की जो थोड़ी-बहुत इज्जत बची हुई है, उसे ये प्रतिदिन नए उगने वाले पत्रकार मिट्टी में मिलाकर छोड़ ही देंगे। सच में, बिना प्रिंट की ट्रेनिंग के छुट्टे सांड जैसे ही होते हैं रिपोर्टर
#दौसा: एसपी कार्यालय दौसा के नवीन भवन का आज होगा लोकार्पण
दोपहर 2 बजे आयोजित होगा कार्यक्रम, मेहंदीपुर बालाजी महंत नरेशपुरी महाराज करेंगे लोकार्पण, जयपुर रेंज आईजी राघवेंद्र सुहासा, एसपी सागर राणा, एडिशनल एसपी हेमंत कलाल भी होंगे शामिल.
@DausaPolice@rb700383#Dausa#Rajasthan
मोटर वाहन अधिनियम में आगे और पीछे के शीशों में 70% दृश्यता और साइड के शीशों में 50% दृश्यता होना अनिवार्य है , पुलिस आजकल काली फ़िल्म वालों पर बहुत कड़क कार्यवाही कर रही है , लेकिन सफेद पर्दों में रहने वाले सरकारी गाड़ियों पर कोई कार्यवाही नहीं होती, सफेद पर्दों से दृश्यता 0% रह जाती है। इन पर कब कार्रवाई होगी ?
मृत्यु की बिना आधिकारिक पुष्टि के श्रद्धांजलि संदेशों की दौड़ केवल जल्दबाज़ी नहीं, हमारी सार्वजनिक संवेदना और नैतिकता पर गहरा सवाल है। श्रद्धांजलि मूलतः शोक, सम्मान और सत्य पर आधारित क्रिया है; लेकिन जब यह ‘पहले देने’ की होड़, सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा या राजनीतिक और सार्वजनिक छवि चमकाने का औज़ार बन जाती है तो वह श्रद्धांजलि नहीं, एक क्रूर प्रदर्शन होता है।
सबसे पहले समझना होगा कि मृत्यु की ख़बर कोई “ब्रेकिंग” या “एक्सक्लूसिव” कंटेंट नहीं, किसी व्यक्ति के अस्तित्व की अंतिम सूचना है। परिवार, मित्र, प्रियजन, इलाज कर रही मेडिकल टीम; इन सबके लिए यह क्षण अत्यंत नाज़ुक होता है। ऐसे में अपुष्ट या अधकचरी जानकारी के आधार पर सार्वजनिक मंचों से “हार्दिक श्रद्धांजलि” देने वाले लोग केवल तथ्यात्मक गलती नहीं करते, वे पीड़ित पक्ष पर अतिरिक्त मानसिक अत्याचार भी थोपते हैं।
कल्पना कीजिए, जब परिजन अभी उम्मीदों के टुकड़े जोड़ रहे हों और टीवी स्क्रीन, ट्वीट, फेसबुक पोस्ट, व्हाट्सऐप स्टेटस पर अपने ही किसी प्रिय की “मृत्यु” की घोषणा देख लें; यह किस स्तर की क्रूरता है?
यह संवेदनहीनता तीन स्तरों पर दिखती है।
पहला, तथ्य का अनादर। पत्रकारिता, राजनीति, प्रशासन या किसी भी ज़िम्मेदार सार्वजनिक भूमिका की बुनियाद ‘वेरिफिकेशन’ है। अगर हम मृत्यु जैसी अंतिम सच्चाई पर भी पुष्टि का इंतज़ार नहीं कर पा रहे, तो यह पेशेवर ईमानदारी की विफलता है। जो सिस्टम मेडिकल बुलेटिन, आधिकारिक बयान या परिवार की पुष्टि का इंतज़ार नहीं कर सकता, वह सूचना नहीं, अफ़वाह फैला रहा है।
दूसरा, यह मानवीय गरिमा का अनादर है। किसी इंसान के जीवित होने की संभावना के बीच उसकी “श्रद्धांजलि” लिख देना, उसे सामाजिक रूप से पूर्व-घोषित रूप से मृत कर देना है। यह उस व्यक्ति के संघर्ष, इलाज, संभावना और परिवार की प्रार्थनाओं पर प्रतीकात्मक पत्थर फेंकने जैसा है। संवेदना का अर्थ है इंतज़ार करने की क्षमता; तथ्य के स्पष्ट होने तक संयम रखना। जो समाज यह संयम खो दे, वह संवेदनशील कहने लायिक नहीं बचता।
तीसरा, दिखावे की संस्कृति। बहुत से संदेशों में सच्चा शोक नहीं, “मैं ख़बरों के बीच में हूँ”, “मैं जुड़ा हुआ हूँ”, “मैं सबसे पहले हूँ” वाली स्वार्थपरक चपलता दिखती है। नेताओं से लेकर सेलेब्रिटीज़ तक, कई लोग बिना जाँच-पड़ताल के श्रद्धांजलि लिखकर अपनी ‘इमेज’ चमकाने में जुट जाते हैं। यह शोक का निजीकरण नहीं, शोक का बाज़ारीकरण और शोक का राजनीतीकरण है।
श्रद्धांजलि एक गंभीर, धीमा, विनम्र और सत्य पर आधारित कर्म है। इसे जल्दबाज़ी, अज्ञान और दिखावे की बलि चढ़ाना, मृतक ही नहीं, जीवित समाज के लिए भी अपमानजनक है। जो समाज मौत के मामले में भी सत्य की प्रतीक्षा नहीं करता, वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में न्याय की उम्मीद कैसे कर सकता है? मृत्यु का समाचार किसी भी प्रेमी या स्वजन को मूर्च्छित कर देने वाला होता है। मन सिसक उठता है और सम्भलता नहीं है। लेकिन उस दौर को क्या ही कहा जाए, जब मृत्यु भी दिखावे और शोक संवेदना की नग्न विकलता बन चुकी हो!
इस युग का नायक हमारे बीच स्वस्थ और सकुशल रहे!
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