What nonsense is this? @AmazonHelp would you please look at this delivered item? What I got is packed stone and also colour is different which I ordered? Is this the degradation or customer trust breach? Just want a resolution on it.
@JaikyYadav16 And Jaiky is retired scientist from NASA doing some charity to this platform by feeding his nosnsense logic. One of the Bul***sh*t persona trying with brainless thoughts.
मैं नाम किसी का नहीं लिख रहा हूं, आप लोग गूगल कर लीजिएगा कि मैं किसके बारे में लिख रहा हूं।
UGC प्रकरण के बाद मुझे अब ये 3 बातें बहुत अच्छे से पता चल गई हैं कि:-
- उन्हें उड़ीसा का मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया गया।
- ख़ुद को बहुत बड़ा बड़ा OBC चेहरा दिखाने के बावजूद उन्हें BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया
- भविष्य में अब उन्हें बड़े स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जाएगी
UGC पर मोदी जी, उनका पूरा कैबिनेट, कार्यालय, सूचना-प्रौद्योगिकी सेल लगभग चुप रहा। चौदह दिन तक चूँ-चाँ नहीं। टीवी पर प्रवक्ता नहीं भेजे, कोई खंडन वाला मुख्यालयी प्रेस वार्ता नहीं। केवल चुप्पी।
आज एप्सटीन फाइल में नाम आया, कॉन्ग्रेस ने दो कौड़ी की बात का बतंगड़ किया, सीधे विदेश मंत्रालय द्वारा स्टेटमेंट लिखित में जेपेग फाइल के साथ आया। ट्विटर पर शेयर हुआ, हर प्रवक्ता बता रहा है कि कॉन्ग्रेस ***पा कर रही है।
सामान्य वर्ग के नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा कुढ़ रहा था, गरिया रहा था, उत्तर माँग रहा था… मोदी ने एक बार भी पूरे तंत्र के किसी भी हिस्से से कोई सहानुभूति नहीं दिखाई। केवल चुप्पी कि तुम साले थक कर बैठ जाओगे, तुम्हारी यही औकात है।
नरेन्द्र मोदी आपदा प्रबंधन दल यह जानता है कि नीतिगत विषयों से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत छवि है क्योंकि उसे बचाएँगे तब ही आगे की नीति बन पाएगी। तब ही बिहार की रैली में कुर्मी, कानू, मल्लाह, दुसाध, डोम, मुसहर, रविदास, बढ़ई, माली का नाम ले कर उसके परिजन होने की बात हो पाएगी।
सामान्य वर्ग, इनके स्कीम ऑफ थिंग्स में केवल टैक्सदाता है। टैक्सपेयर जब ‘टैक्सदाता’ हो जाता है तो उसमें एक देवत्व का भाव आ जाता है। मोदी जी ने ‘दाता’ लगा कर बहुत काटा है, यह हर दूसरे दिन स्पष्ट हो रहा है।
संभवतः, यह नीति देश के लिए बढ़िया हो, समाज के हर वर्ग (मायनस जेनरल) का सरकारी उत्थान हो रहा हो, मोदी क्लास अपार्ट और लेजेंडरी नेता हों, पर ‘दाता’ का धैर्य किसी दिन तो टूटेगा!
सामान्य वर्ग के दो तिहाई बच्चे शिक्षा लोन ले कर पढ़ाई कर रहे हैं, ये @narendramodi को नहीं दिखा। फीस में कोई छूट नहीं, बढ़ता ब्याज और सरकारी उपेक्षा में पिसता सामान्य वर्ग का बैल, देश की गाड़ी ढो रहा है। उसकी कमाई का दशांश भी यदि उसके भाई को मिल रहा है तो उसे मोदी की किसी निजी संपत्ति का हिस्सा मान कर ढोल पीटा जा रहा है।
अन्य वर्ग (अल्पसंख्यक सहित) के लोग शिक्षा लोन ले कर डिफॉल्ट कर दें, न चुकाएँ, कुछ विशेष नहीं होता, सामान्य वर्ग की कुर्की-जब्ती होती है। आगे वह कभी लोन लेने लायक नहीं रहता।
हर उद्यमी योजना, हॉस्टल, निःशुल्क कोचिंग, विशेष स्कूल-कॉलेज SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक के लिए क्यों? आरक्षण का तो समझ में आता है कि जब अवधारणा आई तो आर्थिक और जातिगत पिछड़ापन समानांतर ही था, पर अब इसे अन्य योजनाओं में जातिगत क्यों बनाया जा रहा है?
ये योजनाएँ तो संवैधानिक नहीं हैं, न कोई ऐसी बाध्यता है, फिर मोदी जी, जो विजनरी नेता हैं, उनकी सोच चुनावी संकुचन में डूबी क्यों है? यहाँ आप कोचिंग में आर्थिक मापदंड क्यों नहीं लगा पा रहे? क्योंकि जो बात ‘हिसाब चुकता’ करवाने वाले भाषण की प्रतिक्रिया से मिलने वाली किक में है, वो अन्यत्र नहीं।
नरेन्द्र मोदी की यह चुप्पी समाज को तोड़ने वाली है, हिन्दुओं को इस्लामी/वामपंथी फॉर्मूले से बाँटने वाली है। यह व्यक्ति आज भी चुप है, इसके पास सहानुभूति के शब्द नहीं हैं, इनके प्रवक्ता अभी भी सुप्रीम कोर्ट का नाम ले कर ‘जय मोदी, तय मोदी’ कह कर नाच रहे हैं।
ऐसी ‘छवि प्रबंधन’ का क्या लाभ जब समाज आपकी नीतियों से टूटने लगे?
Hello @RailMinIndia Train Number 03223 is already delayed by 5 hr 55 min and still it is not started from source station. Is it the expected behaviour or are these trains running as a formality?
Really pathetic and unfair to passengers #IndianRailways
We are very disappointed by the omission of Nitish Mishra and Shahnawaz Hussain from the ministry list, especially given their commendable performance during their short tenures.
@BJP4India@BJP4Bihar@NitishKumar@JPNadda
आज का ज्ञान:
आप चाहे कितने ही बड़े पत्रकार हों, चाहे किसी भी मीडिया में काम करते हों,
व्यक्ति अगर आपकी जाति का हो तो बिना पैंट पहने भी टेलीविज़न पर बैठ जाए, तब भी वह “सभ्य” कहलाता है।
व्यक्ति अगर आपकी जाति का हा तो अगर उसने किसी की माँ को गाली दे दी हो, तब भी वह “सभ्य”।
भाई, बात तो जाति की ही है।
ज्ञान समाप्त।
नोएडा में तो मज़ा ही अलग है — कुछ मीडिया हाउसों ने अपना खुद का “फैंटेसी काउंटिंग लीग” चालू कर दी है, जहाँ रिज़ल्ट इलेक्शन कमीशन से नहीं, सीधे उनके सुप्रीम कमांड सेंटर से डाउनलोड होकर आ रहा है।