वीर बाल दिवस जब याद आए,
बलिदान और साहस सिखाए।
कम उम्र में ही वो किया,
जो न कभी किसी ने किया।
जोरावर और फतेह सिंह दो भाई,
धर्म नहीं बदला तो जान गंवाई।
बलिदान की ऐसी गाथा,
सुनकर हरकोई काँपा।
साहिबजादों ने ऐसा बलिदान दिया,
बलिदान स्वर्णिम पन्नो में दर्ज हुआ।
मुश्किल में भी धैर्य ...