@chupbhikarbitti किसी पेज पर सब लिखकर फेंक दीजिये। जब स्थिति ज्यादा खराब होती है तब यह तरीका थोड़ा असरदार है। जितना हो सके उतना लिखना , जो भी है जैसा भी है बस लिखना।
पहले मेरे लिए ट्विटर अच्छी सकारात्मक बातें, लिखने पढ़ने, ज्ञानबोध आदि का साधन था और अब दिमाग की किचकिच बाहर निकालने का साधन है। परिवर्तन तो हुआ है दोनों ही जगह, चाहे वो ट्विटर हो या मेरा दिमाग।
कुछ लोगों के लिए स्वत: ही हृदय से आशीर्वाद निकलता है, मानो उस समय ईश्वर उनको संसार के सारे सुख दे दें ; और वास्तविक रूप में वो हमारे लिए अभी भी अपरिचित हैं, संभवतः पूर्व जन्म की भावातिरेकता इस जन्म में भी साथ है।