13-15 स्टूडेंट्स के हताहत होने की खबर है ।
अब सारे विभाग कूद कूद के बिल्डिं��� मालिक को और इधर उधर कीलोगी को उठा के पकड़ेंगे और उनको जेल भेजेंगे , पेनल्टी लगायेंगे । बतायेंगे कि फायर सेफ्टी नॉर्म्स का उल्लंघन था , इलेक्ट्रिसिटी का उल्लंघन था , कोचिंग चलाने की परमिशन नहीं थी blah blah ..
लेकिन जिस तंत���र को नागरिकों ने संविधान के माध्यम से बनाया है , संस्थाओं का निर्माण किया है । जिनकी सुख सुविधाओं के लिए सैलरी का खर्च नागरिक वाहन करता है , उसकी कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं होगी ?
LDA और नगर निगम के अधिकारी क्या केवल पैसा कमाने के लिए है । डीएम क्या देखने के लिए हज़रतगंज में महल जैसा घर दिया गया है ? ये व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है ? जब भवन पर कमर्शियल टैक्स लिया जाता है तो सारे मानक कौन देखेगा ?
त��� दोषी कौन है ? डीएम ? नगर निगम कमिश्नर ? एलडीए का अध्यक्ष ?
तो नागरिक अब सब बिल्डिंग में घुसने से पहले काग़ज़ देखे की सारे नॉर्म्स पूरे है की नहीं ?
@myogiadityanath @CMOfficeUP @PMOIndia @khurpenchh @VivekGa54515036 @narendramodi #Lucknow #lucknowfire
इनका तो केवल ACR ख़राब किया गया क्योंकि ये अंग्रेज़ अफसरशाही में शामिल है । लोग नैरेटिव सेट करते है कि एक नौकरशाह हीरो है पढ़ा लिखा है और राजनेता विलेन है। लेकिन भारत के असली विलेन ये अंग्रेज़ी नौकरशाही है ये आईएएस आईपीएस आईआरएस है जो नागरिकों का जम कर शोषण कर रहे है और हज़ारों करोड़ सुरक्षित एवं संगठित गैंग बना कर कमा रहे है ।
नौकरशाही सुधार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना और इस संगठित गैंग को बदलना लगभग असंभव सा है ।
इनका तो APaR ही ख़राब हुआ, मुझे तो नौकरी से निकाल दिया 10 से ज़्यादा इंक्रीमेंट कम किए थे पूरा गैंग पीछे पड़ा था, क्योंकि मैं भारत��य ग़ुलाम था और इन अंग्रेज़ नौकरशाहों के VVIP संस्कृति, टैक्सपेयर के पैसों की लूट, मनमानी और संगठित भ्रष्टाचार के मूल पर प्रहार कर इनको एक्सपोज़ कर रहा था । जब भ्रष्टाचारियों को सज़ा दिलाना असंभव हो और एक आम नागरिक को प्रताड़ित करना आसान तो ऐसे तंत्र में तो भ्रष्टाचार फलेगा फूलेगा ही ।
APAR ग्रे��िंग कम करने को तो मैं नुक़सान मानता भी नहीं । लेकिन ये नेशनल न्यूज़ है ।
अंग्रेज़ों के तंत्र में अंग्रेज़ों को सज़ा नहीं मिलती क्योंकि अंग्रेज गैंग बना के राज करता है । वैसे ही आज़ाद भारत के काले अंग्रेजों ने इस सामंतवादी अंग्रेज़ी तंत्र का खूब फ़ायदा उठाया है । आईएएस आईआरएस आईपीएस का विजिलेंस उन्ही के कैडर का आदमी देखता है जिसका काम होता है इनको भ्रष्टाचार का सुरक्षित माहौल देना । आप सज़ा दिला ही नहीं सकते जब सब एक गैंग के एक साथ है भ्रष्टाचार पर फलने फूलने को।
@khurpenchh @VivekGa54515036
हर हथियार उठाने वाला बदमाश या अपराधी नहीं होता।
भ्रष्टाचारी तंत्र, अन्याय और हालात भी हो सकते है ।
भरत तिवारी का ना कोई आपराधिक रिकॉर्ड था और ना ही वो किसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल था और ना कोई अपने लिए अवैध माँग कर रहा था । भरत तिवारी के जितने भी वीडियोज आ रहे है उसमें वो भ्रष्टाचार और अंग्रेज़ी शासन के अन्यायों से परेशान लग���े है और उनको ये लगता है कि कुछ बड़ा करने की जरूरत है । गन जरूर उठायी लेकिन किसी की जान नहीं ली ना वो इंसान डरा ।
जब तक फेसबुक लाइव था , पुलिस उससे सरेंडर करने को बोलती रही । वो अपनी मांग पर अड़ा रहा कि नेता जो वादा करें वो निभाये । जहाँ जब भी इनकी कोई रिकॉर्डिंग है वो केवल देश के लिए , देश की बेहतरी के लिए । समाधान भले ही सतही हो , लेकिन तंत्र से उकता हुआ आदमी को क्या ही पता कि तंत्र कैसे काम कर रहा क्य�� सुधार चाहिए ?
तो फेसबुक लाइव तक तो पुलिस अपने को अच्��ा दिखाती रही । जब पुलिस ने आश्वासन दिया कि आपकी बात मानी जाएगी वो हथियार डालने को तैयार हो गए । और उसी लाइव वीडियो में हथियार पुलिस के पास फेंक दिया । फिर जैसा अनुमान लगाया जा सकता है ये कायर पुलिस वाले एक अच्छे निहत्थे अकेल आदमी को पकड़ लिए उसको चार गोली मार दिए । ये कोई एनकाउंटर नहीं है ये सीधे सीधे हत्या है और ऐसी हत्या केवल वहाँ खड़ी पुलिस ने नहीं करायी है , बल्कि ऊपर से आदेश पर ही की गई प्रतीत होती है।
अब आप सोचिए क्या देश आज़ाद है , क्या इसी व्यवस्था के लिए लोगो ने अंग्रेजों से आज़ादी ली थी ? एक हथियार डाल चुके तंत्र से परेशान शख़्स को पकड़ के गोली मार दो ? और फिर भी देश में लोग सोच रहे है कि कोई व्यवस्था है । विवश और लाचार है एक आम नागरिक इस अंग्रेज़ी व्यवस्था के सामने , न्याय कहीं नहीं है , सब लूटने में लगे है , पत्रकार सरकारों का गुणगान कर रहे है , न्यायालय नागरिकों को कॉकरोच कह रह है , आ���टीआई एक्टिविस्ट को कह रहा है कि अथ��रिटी क्या है , एक ऐसा सिस्टम जहाँ अपराधी , भ्रष्टाचारियों के सुरक्षा के नियम बनाये गए है , सब सत्ता के लोग अपनी जाँच ख़ुद करते है । पुलिस की जाँच पुलिस करती है , आईएएस का विजिलेंस आईएएस और आईपीएस का विजिलेंस आईपीएस देखता है , न्यायाधीशों का न्यायाधीश देखते है । एक नागरिक एक जिले स्तर के अधिकारी को सज़ा नहीं दिला सकता उल्टा उसके सामने गिड़गिड़ाना पड़ता है । ईमानदारों को प्रताड़ित किया जाता है , औ��� एक देश के लिए बातें करने वाले कुछ करने के जुनून वाले इंसान को हथियार डालने के बाद गोली मार देना , ये क्या है भाई ?
भरत तिवारी का रास्ता ग़लत सही होगा, लेकिन उसकी पीड़ा झूठी नहीं थी। उसकी बेचैनी झूठी नहीं थी। उसका देश के लिए जुनून झूठा नहीं था। असली अपराधी कौन है ? हत्या करने वाले या सिस्टम से पीड़ित व्यक्ति ?
सवाल यह है कि इस देश में अरबों डकारने वाले माननीय और साहब है और बाक़ी सब कीड़े मकौड़े ?
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इनका तो केवल ACR ख़राब किया गया क्योंकि ये अंग्रेज़ में शामिल है । हमें तो नौकरी से निकाल दिया क्योंकि मैं भारतीय था । जब भ्रष्टाचारियों को सज़ा दिलाना असंभव हो और एक आम नागरिक को प्रताड़ित करना आसान तो ऐसे तंत्र में तो भ्रष्टाचार फलेगा फूलेगा ही । अंग्रेज़ों के तंत्र में अंग्रेज़ों को सज़ा नहीं मिलती क्योंकि अंग्रेज गैंग बना के राज करता है । वैसे ही आज़ाद भारत के काले अंग्रेजों ने इस सामंतवादी अंग्रेज़ी तंत्र का खूब फ़ायदा उठाया है । आईएएस आईआरएस आईपीएस का विजिलेंस उन्ही के कैडर का आदमी देखता है जिसका काम होता है इनको भ्रष्टाचार का सुरक��षित माहौल देना । आप सज़ा दिला ही नहीं सकते जब सब एक गैंग के एक साथ है भ्रष्टाचार पर फलने फूलने को ।
गरीबों का कोटा ये कुछ अजीब है । ये आरक्षण का एक विकृत और अतार्किक रूप है ।
आरक्षण एक गरीबी मिटाओ योजना नहीं है बल्कि जो सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से पिछड़ा वर्ग है , सत्ता से दूर रहा है, उसके लिए विशेष प्रावधान है कि उसकी भी सत्ता में भागीदारी हो और उसको भी आगे आने का अवसर मिल सके । जैसे कि ऐसे पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले जो जागरूक नहीं है , अवसरों को नहीं जानते और सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित है ।
जो जागरूक, सामाजिक रूप से सशक्त अगड़ा लेकिन गरीब है उसके लिए आरक्षण का असल में concept ही नहीं है । ये वर्ग पढ़ाई का महत्त्व जानता है । अवसरों को जानता है ।
तो असल में सामाजिक अगड़े गरीब को आरक्षण देना तो ऐसा है कि सरकार कह रही है कि हम स्कूल नहीं बना सकते , हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे सकते , हम अच्छे विश्वविद्यालय नहीं बना सकते, हम मुफ्त पुस्तकालय नहीं दे सकते इसलिए आरक्षण दे देते है । तो फिर सरकार की जिम्मेदारी क्या है ? लोगो ने सरकार किस लिए बनाई है ? आरक्षण ग़रीबी उन्मूलन नहीं , सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से वंचित समाज को आगे बढ़ाने का विशेष उपाय है , अगड़ा ग़रीब सामाजिक रूप से वंचित नहीं है ।
जरूर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के आरक्षण का लाभ पा चुके परिवारों पर समीक्षा की जरूरत है ।
पर इस EWS का तो पूरी तरह ग़लत फ़ायदा उठाया जा रहा है । विडंबना तो ये है कि एक बार भारत में IAS सामंत बनने और लॉबी में एंट्री करने के बाद, ये लोग इतना ताक़तवर हो जाते है कि सीधे सीधे फ्रॉड होने पर भी अभी त��� कोई कार्यवाही नहीं हो पायी और ये लगातार करोड़ो रुपैये की अवैध कमाई करते हुए सब कुछ मैनेज करते रहते है । जबकि इस फ्रॉड में इनको बर्खास्त करने जेल भेजना चाहिए ।
The 8th Central Pay Commission must answer the real question.
When officers belonging to a dominant administrative cadre, particularly the Indian Administrative Service, are placed
in positions that influence or shape the recommendations of the Commission, a structural conflict of interest arises.
The IAS cadre occupies the highest levels of administration, exercises control over policy, postings, resource allocation, and vigilance mechanisms, and is also the principal beneficiary of hierarchical expansion and financial escalation within the system. In such a situation, any participation in the evaluative process relating to pay structures cannot be
viewed as neutral.
This is not a question of individual conduct but of institutional design. A
system cannot be considered fair if those who benefit from its structure also determine its continuation.
The tendency within this framework to accumulate salary related advantages over time has already distorted the pay architecture. Unless the process is insulated from such influence, meaningful reform will remain unattainable.
The Constitution does not permit inequality to be created and sustained through administrative design. Articles 14 and 16 guarantee equality. Article 38 mandates reduction of inequality in income and status. Yet the present system rewards hierarchy, service tag and position more than actual function, responsibility and contribution.
In departments such as @cbic_india , scrutiny, audit, investigation, examination of records, drafting of orders, adjudication support and revenue related work are overwhelmingly performed by lower and middle tiers, particularly Group B executive cadres. But authority, pay progression, staff, resources, postings and vigilance control remain concentrated at IRS cadre.
At entry level, the pay difference may be modest, such as ₹56,100 and ₹44,900. But over service, this gap expands to around ₹1.5 lakh to ₹2 lakh per month or more. Where is the corresponding difference in measurable output, workload or accountability?
Authority is retained at the top. Work is performed below. Accountability is imposed downward.
Higher officers control administration, policy, resources, postings and vigilance. But when corruption, inefficiency, red tapism and structural failure occur, accountability does not travel along the same chain of command.
The vigilance system itself operates within the same administrative structure it is expected to oversee. This creates protection at particular cadre like IaS IPS IRS and disproportionate scrutiny at lower levels. Administrative authority and vigilance become captured to provide internal shelter, including in cases of wrongdoing and corruption.
This is why the system has acquired a feudal character. Privilege is determined by position. Authority is insulated. Work is concentrated below. Accountability is selectively imposed.
NFU is another distortion. Financial advancement without corresponding work, responsibility or accountability is contrary to the principle that pay must follow function. It creates discrimination, litigation and cascading financial burden.
Public pay must reflect public value. Authority must be inseparable from accountability. Financial progression must be linked to responsibility and measurable contribution, not hierarchy, cadre dominance or service tag.
India needs a pay and accountability framework insulated from cadre influence.
Taxpayers fund governance, not a protected feudal administrative order.
@PMOIndia@FinMinIndia@DoPTGoI@CVCIndia@cbic_india@dgovcbic@khurpenchh@VivekGa54515036@SuparnaSharma@sgaiceia@AIASCT_AIB@aiceia_lko@narendramodi@RahulGandhi@BJP4India@INCIndia@bstvlive@fpjindia@TimesNow@the_hindu@IndianExpress@ndtv@pbhushan1@_YogendraYadav@ippatel
#8thPayCommission #PayCommission #AdministrativeReforms #CivilServiceReform #IAS #CBIC #GroupB #NFU #VigilanceReform #PublicAccountability #TaxpayersMoney #ConstitutionalFairness
करोड़ों अरबों की ट्रांसफर पोस्टिंग इंडस्ट्री - 3 @cbic_india
एक तरफ़ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर के लेवल पर मलाईदार पोस्टिंग में खेल की सबूतों के शिकायत हुई।
दूसरी तरफ़ जैसे @cusprevpatna जैसी मलाईदार पोस्टिंग में ��िसी मकसद से चीफ कमिश्नर की पोस्टिंग @cbic_india की है।
इनके नख़रे आते ही शुरू हो गए। पहले लखनऊ में कैम्प ऑफिस , फिर एक मेम्बर के साथ परिवार का पहाड़ों पर घूमने का ऑफिसियल टूर बनाना । और फिर ट्रांसफर पोस्टिंग पर क़ब्ज़ा करना । इंस्पेक्टर, सुपरिंटेंडेंट, हवलदार सब की ट्रांसफर पोस्टिंग का अप्रूवल ये देंगे । मलाईदार LCS के लिए भी समिति समिति इन्हें हटाने का आदेश दे कर सीधे अपने ख़ुद से ट्रांसफर करने के लिए मांगा लिया । आख़िर आयुक्तालय लेवल के इंस्पेक्टर सुपरिंटेंडेंट हवलदार के ट्रांसफर पोस्टिंग में इनको इतना इंटरेस्ट क्यों आ रहा है, समझा जा सकता है । आप आईआरएस को केवल ट्रांसफर पोस्टिंग सर्विस क्यों नहीं घोषित कर देते और कोई काम तो ये करते नहीं ।
तो मेरे पास इनका एक और क्रियाकलाप का मेसेज आया है जिसकी जांच जरूरी है । पता चला है कि सुपारी तस्कर धीरज घोष 12/05/2026 को ऑफिस खत्म होने के बाद 6 बजे इनसे मिलने आया था। ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज से इसकी पुष्टि हो सकती है । लोगो का कहना है कि अब चीफ कमिश्नर भी known तस्करों से मिलने लगे है ।
एक तरफ़ ये हैं जिनकी लगातार ख़बरें मिल रही है । दूसरी तरफ़ कम से कम एक अच्छी ख़बर कल मिली जब @cgstluckzone के नए चीफ कमिश्नर की तारीफ़ सुनी । इनके बारे में ज़्यादा जानता तो नहीं और अभी तक कोई ख़राब न्यूज़ नहीं मिली लेकिन सुनने को मिला कि उन्होंने @CGST_LUCKNOW में 7:30 बजे तक कल बहुत ही प्रोडक्टिव मीटिंग करी । एक एक ऑफिस के मुख्य कार्यों के पॉइंट को अच्छे से डिस्कस किया । एक्सपर्ट्स के तरह अच्छे सुझाव और निर्देश दिए जो इस स्तर पर एक्स्पेक्ट किए जाते है । आगे देखते है किस तरफ़ जाएँगे ।
@FinMinIndia @narendramodi @PMOIndia @khurpenchh @RahulGandhi @DoPTGoI @nsitharaman @news24tvchannel @newzhit @bstvlive
करोड़ों अरबों की ट्रांसफर पोस्टिंग इंडस्ट्री - 3 @cbic_india
एक तरफ़ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर के लेवल पर मलाईदार पोस्टिंग में खेल की सबूतों के शिकायत हुई।
दूसरी तरफ़ जैसे @cusprevpatna जैसी मलाईदार पोस्टिंग में किसी मकसद से चीफ कमिश्नर की पोस्टिंग @cbic_india की है।
इनके नख़रे आते ही शुरू हो गए। पहले लखनऊ में कैम्प ऑफिस , फिर ए�� मेम्बर के साथ परिवार का पहाड़ों पर घूमने का ऑफिसियल टूर बनाना । और फिर ट्रांसफर पोस्टिंग पर क़ब्ज़ा करना । इंस्पेक्टर, सुपरिंटेंडेंट, हवलदार सब की ट्रांसफर पोस्टिंग का अप्रूवल ये देंगे । मलाईदार LCS के लिए भी समिति समिति इन्हें हटाने का आदेश दे कर सीधे अपने ख़ुद से ट्रांसफर करने के लिए मांगा लिया । आख़िर आयुक्तालय लेवल के इंस्पेक्टर सुपरिंटेंडेंट हवलदार के ट्रांसफर पोस्टिंग में इनको इतना इंटरेस्ट क्यों आ रहा है, समझा जा सकता है । आप आईआरएस को केवल ट्रांसफर पोस्टिंग सर्विस क्यों नहीं घोषित कर देते और कोई काम तो ये करते नहीं ।
तो मेरे पास इनका एक और क्रियाकलाप का मेसेज आया है जिसकी जांच जरूरी है । पता चला है कि सुपारी तस्कर धीरज घोष 12/05/2026 को ऑफिस खत्म होने के बाद 6 बजे इनसे मिलने आया था। ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज से इसकी पुष्टि हो सकती है । लोगो का कहना है कि अब चीफ कमिश्नर भी known तस्करों से मिलने लगे है ।
एक तरफ़ ये हैं जिनकी लगातार ख़बरें मिल रही है । दूसरी तरफ़ कम से कम एक अच्छी ख़बर कल मिली जब @cgstluckzone के नए चीफ कमिश्नर की तारीफ़ सुनी । इनके बारे में ज़्यादा जानता तो नहीं और अभी तक कोई ख़राब न्यूज़ नहीं मिली लेकिन सुनने को मिला कि उन्होंने @CGST_LUCKNOW में 7:30 बजे तक कल बहुत ही प्रोडक्टिव मीटिंग करी । एक एक ऑफिस के मुख्य कार्यों के पॉइंट को अच्छे से डिस्कस किया । एक्सपर्ट्स के तरह अच्छे ��ुझाव और निर्देश दिए जो इस स्तर पर एक्स्पेक्ट किए जाते है । आगे देखते है किस तरफ़ जाएँगे ।
@FinMinIndia @narendramodi @PMOIndia @khurpenchh @RahulGandhi @DoPTGoI @nsitharaman @news24tvchannel @newzhit @bstvlive
That is the reality of this nation. Doctors, engineers, CAs, academicians, teachers, professors, scientists, and other professionals all have one dream: to become IAS IPS that provides absolute authority, status, and unaccountable power, and that is glorified as something heroic.
It is not about expertise, talent, skill, or public service. It is only about posts, privileges, luxury, and power.
These feudal colonial rulers such as IAS, IPS, and IRS have become the biggest obstacle to democracy and institutional reform in India. They are root cause of corruption and inefficiency. Any politician who dismantles this feudal colonial structure would render a far greater service to the nation.
That is why people ask why officers such as Chakma, who was caught allegedly accepting a ₹10 lakh bribe, or Pooja Singhal, in whose case currency counting machines are reinstated.
For this unaccountable power, India is losing doctors, engineers, scientists, researchers, and other professionals to a generalist examination. I keep saying that this examination is not a test of expertise or talent; it is a competition for posts.
What expertise is demonstrated by memorizing intermediate level History, Geography, Biology, and similar subjects? How does that make someone an expert administrator, police officer, tax officer, or policy maker in democracy?
In functioning democracies, local councils are empowered to hire professionals for specific departments. There are no feudal posts like DM and SP exercising unchecked authority over citizens. If equivalent administrative posts exist, they come under elected local bodies and the communities they serve. They are professionals hired for specific responsibilities, not members of a permanent ruling class.
Instead of glorifying these services, India should be demanding real democratic reforms, professional administration, and genuine accountability.
Just do one test, replace a DM and SP with a simple graduate and intermediate person and you will surprise to find, the administration either gets better or has no effect because ruling having unaccountable needs no expertise as no one can cross question you and deny your order, even subordinates would perform their core work. This is the fight for post only. Thats why all exams are sold. Judiciary makes their own kins as judges. Politicians make their own relatives and son/daughter as politicians. Likewise connected and powerful bureaucrats do.
They thrive on a corrupt system. Why do you think departments are corrupt and inefficient? Because of clerks and the lower bureaucracy?
Why do you think it is almost impossible for a common citizen to hold an IAS or IPS officer accountable? Because of politicians?
Take the police department. From SP to DG, enormous administrative power, vigilance, transfer postings, departmental resources, and overall control remain in the hands of the IPS. Is the corruption, inefficiency, and insensitivity in the police system because of hawaldars, sub inspectors, and inspectors?
This is their design. They thrive on it. They are the biggest beneficiaries of this corrupt system. It is their lobby that moulds the rules and stalls reforms so that holding them accountable becomes nearly impossible. Their vigilance is handled by themselves. IPS officers look after IPS vigilance; the same applies to IAS and IRS. Vigilance is not an anti corruption mechanism but a shield designed to protect cadre officers, allowing them to accumulate wealth fearlessly. They do it because they know they are safe and insulated.
Most are enjoying luxuries at taxpayers’ expense, amassing unimaginable wealth, demanding protocol, displaying arrogance, and behaving like feudal lords who entered public service to rule rather than serve.
Chakma is merely an unfortunate one who got caught. Many bigger sharks and gharials, with hundreds and thousands of crores, continue untouched while citizens keep praying for accountability. @khurpenchh@narendramodi@RahulGandhi@VivekGa54515036
करोड़ों-अरबों की इंडस्ट्री है ट्रांसफर-पोस्टिंग की @cbic_india में। कमिश्नरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में धांधली की शिकायत। विभाग नागरिकों की सेवा के लिए चल रहा है या कमाई और VVIP कल्चर के लिए?
पूरा खेल एक चेन की तरह चलता है। पहले ऊँचे स्तर की पोस्टिंग्स Commissioner//Pr. Comm पर पर करोड़ों-अरबों का खेल होता है। फिर वही अधिकारी नीचे इंस्पेक्टरों और अधीक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का ऑक्शन करते हैं। कमाई वाली सीटों पर तैनाती होती है और वहाँ से महीने का मोटा “कलेक्शन” बंधता है।
सोचिए कितना कमा रहे है केवल सरकारी विभाग में बैठ के, और ये सब खुलेआम है । पहले भी @cbic_india ��ें एक शिकायत “A corruption Saga” 2023 में हुई थी कि कैसे ट्रांसफर पालिसी को ताक पर रख कर कमाई वाली पोस्टिंग की कुछ IRS में बंदर बांट हुई थी। कमाई वाली पोस्टिंग मतलब 50 करोड़ से 200 करोड़ की पोस्टिंग। अब फिर पॉलिसी की ऐसी की तैसी कर कमिश्नर , प्रिंसिपल कमिश्नर की ट्रांसफर पोस्टिंग करी गई।
मस्त कमाई का जरिया है ट्रांसफर पोस्टिंग। केवल कमाई वाली पोस्टिंग का ऑक्शन करो और मोटा माल ले ज���ओ । @cusprevlucknow में तो कमिश्नर चीफ कमिश्नर लाखों ले कर पालिसी बदल के कमाई वाली पोस्टिंग में तैनाती होती है अभी 2023 में भ्रष्ट कटियार ने पालिसी बदल कर कस्टम्स में “मोस्ट सेंसिटिव (महा कमाई वाली पोस्टिंग) के लिए एक साल का “Cooling off” पीरियड जीएसटी से आने वालों के लिए किया था । अब उसको नए चीफ कमिश्नर आने वाले ग्रुप के फायदे के लिए सिर्फ तीसरे साल बदलने का मन बना चुके है । और उसके बाद @CBIHeadquarters ने पटना में १०० करो��़ का फेक एक्सपोर्ट का केस बनाया ।
सिविल सेवा में ये सब कमाई वाली पोस्टिंग रिवॉर्ड होती है और कम कमाई वाली पोस्टिंग सज़ा । जितनी ज्यादा पब्लिक डीलिंग, जितनी ज्यादा discretionary power, उतनी ज्यादा कमाई की संभावना और उतना ही ज्यादा आम नागरिक तथा टैक्सपेयर का शोषण।
जैसे लगता है विभाग के अधिकारियों के यही काम होते है, बस किसी तरह से कमाई वाली पोस्टिंग हथियाना- जुगाड़ से या कनेक्शन से, इसी की गणित चलती रहती है । इसमें देश सेवा और नागरिक सेवा कहाँ है ?
अब देखिए फिर से शिकायत में कैसे बताया गया है की dopt के सेंसिटिव पोस्टिंग के नॉर्म्स और CBIC के पालिसी को दरकिनार कर खाने कमाने को चहेतों की पोस्टिंग की गई , प्रधान आयुक्त की पोस्टिंग्स पर आयुक्त तैनात कर दिए गए ।
अधिकारियों में नाराज़गी भी इसलिए नहीं कि व्यवस्था गलत है, बल्कि इसलिए कि कुछ ही लोग कमा रहे है भाई सबको मौका दो कमाने का ।
सोच���ए ये तो विभाग का हाल है। जो सुधार के लिए आवाज़ उठाते है कि ये कमाई वाली पोस्टिंग हो ही क्यों ? क्यों स्मगलिंग करा के , पान मसाला से महीने का करोड़ो बँधवा के , fake एक्सपोर्ट्स, फेक ITC , फ़र्ज़ी रिफंड करके पैसे कमा रहे हो , क्यों विभागीय संसाधन और विभाग को पूरा लूट खसोट कर रहे हो गैंग बना के , क्यों आईआरएस की भ्रष्टाचार की जाँच आईआरएस करता है, तो उसको नौकरी से निकाल दो जैसे मुझे निकाल दिया ।
मतलब सुधार ���रन��� नहीं है लूट मचानी है इसलिए सरकारी नौकरी में आए है । हद्द है । भाई नौकरशाही में सुधार नहीं करेंगे तो क्या बोलने से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा ?
एसोसिएशन ने खुल के ट्रांसफ़र पोस्टिंग को multi million इंडस्ट्री बोला शिकायत करी और कोर्ट भी गए। ख़ुद ये एक नौकरी छोड़ चुके आईआरएस अपने वीडियो में ट्रांसफ़र पोस्टिंग को करोड़ो अरबों का व्यापार बता रहे। किस देश में ऐसा होता है। पूरा भ्रष्ट तंत्र बना रखा है । ���ब होगा भ्रष्टाचार पर वार? कब बंद होगा ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल और पालिसी का वायलेशन ?
@PMOIndia @narendramodi @nsitharaman @FinMinIndia @DoPTGoI@cbic_india @CVCIndia @CBIHeadquarters @bstvlive @fpjindia @RahulGandhi @DoPTGoI @cgstluckzone@mumbaicus1@mumbaicus3@khurpenchh @VivekGa54515036 @Khurpench_
#CBIC #TransferPostingScam #Corruption #AdministrativeReforms #Taxpayers #GovernanceReform #Accountability
करोड़ों-अरबों की इंडस्ट्री है ट्रांसफर-पोस्टिंग की @cbic_india में। कमिश्नरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में धांधली की शिकायत। विभाग नागरिकों की सेवा के लिए चल रहा है या कमाई और VVIP कल्चर के लिए?
पूरा खेल एक चेन की तरह चलता है। पहले ऊँचे स्तर की पोस्टिंग्स Commissioner//Pr. Comm पर पर करोड़ों-अरबों का खेल होता है। फिर वही अधिकारी नीचे इंस्पेक्टरों और अधीक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का ऑक्शन करते हैं। कमाई वाली सीटों पर तैनाती होती है और वहाँ से महीने का मोटा “कलेक्शन” बंधता है।
सोचिए कितना कमा रहे है केवल सरकारी विभाग में बैठ के, और ये सब खुलेआम है । पहले भी @cbic_india में एक शिकायत “A corruption Saga” 2023 में हुई थी कि कैसे ट्रांसफर पालिसी को ताक पर रख कर कमाई वाली पोस्टिंग की कुछ IRS में बंदर बांट हुई थी। कमाई वाली पोस्टिंग मतलब 50 करोड़ से 200 करोड़ की पोस्टिंग। अब फिर पॉलिसी की ऐसी की तैसी कर कमिश्नर , प्रिंसिपल कमिश्नर की ट्रांसफर पोस्टिंग करी गई।
मस्त कमाई का जरिया है ट्रांसफर पोस्टिंग। केवल कमाई वाली पोस्टिंग का ऑक्शन करो और मोटा माल ले जाओ । @cusprevlucknow में तो कमिश्नर चीफ कमिश्नर लाखों ले कर पालिसी बदल के कमाई वाली पोस्टिंग में तैनाती होती है अभी 2023 में भ्रष्ट कटियार ने पालिसी बदल कर कस्टम्स में “मोस्ट सेंसिटिव (महा कमाई वाली पोस्टिंग) के लिए एक साल का “Cooling off” पीरियड जीएसटी से आने वालों के लिए किया था । अब उसको नए चीफ कमिश्नर आने वाले ग्रुप के फायदे के लिए सिर्फ तीसरे साल बदलने का मन बना चुके है । और उसके बाद @CBIHeadquarters ने पटना में १०० करोड़ का फेक एक्सपोर्ट का केस बनाया ।
सिविल सेवा में ये सब कमाई वाली पोस्टिंग रिवॉर्ड होती है और कम कमाई वाली पोस्टिंग सज़ा । जितनी ज्य��दा पब्लिक डीलिंग, जितनी ज्यादा discretionary power, उतनी ज्यादा कमाई की संभावना और उतना ही ज्यादा आम नागरिक तथा टैक्सपेयर का शोषण।
जैसे लगता है विभाग के अधिकारियों के यही काम होते है, बस किसी तरह से कमाई वाली पोस्टिंग हथियाना- जुगाड़ से या कनेक्शन से, इसी की गणित चलती रहती है । इसमें देश सेवा और नागरिक सेवा कहाँ है ?
अब देखिए फिर से शिकायत में कैसे बताया गया है की dopt के सेंसिटिव पोस्टिंग के नॉर्म्स और CBIC ���े पालिसी को दरकिनार कर खाने कमाने को चहेतों की पोस्टिंग की गई , प्रधान आयुक्त की पोस्टिंग्स पर आयुक्त तैनात कर दिए गए ।
अधिकारियों में नाराज़गी भी इसलिए नहीं कि व्यवस्था गलत है, बल्कि इसलिए कि कुछ ही लोग कमा रहे है भाई सबको मौका दो कमाने का ।
सोचिए ये तो विभाग का हाल है। जो सुधार के लिए आवाज़ उठाते है कि ये कमाई वाली पोस्टिंग हो ही क्यों ? क्यों स्मगलिंग करा के , पान मसाला से महीने का करोड़ो ���ँधवा के , fake एक्सपोर्ट्स, फेक ITC , फ़र्ज़ी रिफंड करके पैसे कमा रहे हो , क्यों विभागीय संसाधन और विभाग को पूरा लूट खसोट कर रहे हो गैंग बना के , क्यों आईआरएस की भ्रष्टाचार की जाँच आईआरएस करता है, तो उसको नौकरी से निकाल दो जैसे मुझे निकाल दिया ।
मतलब सुधार करना नहीं है लूट मचानी है इसलिए सरकारी नौकरी में आए है । हद्द है । भाई नौकरशाही में सुधार नहीं करेंगे तो क्या बोलने से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा ?
एसोसिएशन ने खुल के ट्रांसफ़र पोस्टिंग को multi million इंडस्ट्री बोला शिकायत करी और कोर्ट भी गए। ख़��द ये एक नौकरी छोड़ चुके आईआरएस अपने वीडियो में ट्रांसफ़र पोस्टिंग को करोड़ो अरबों का व्यापार बता रहे। किस देश में ऐसा होता है। पूरा भ्रष्ट तंत्र बना रखा है । कब होगा भ्रष्टाचार पर वार? कब बंद होगा ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल और पालिसी का वायलेशन ?
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कमाई का सिस्टम और कमाई का विभाग । महीने की करोड़ो की है कमाई
अब देखिए कैसे बना रखा है लूट और कमाई का सिस्टम। भारत की सीमा 7 देशों से ज़मीन पर और दो देशों से समुद्र में मिलती है । कस्टम्स में किसी भी जोन में कोई “most sensitive” नाम की पोस्टिंग्स नहीं है। ना ही ये DoPT ने ऑथराइज्ड की है ना @cbic_india ने । लेकिन भारत का दोस्त नेपाल ऐसा बॉर्डर है जहाँ “Most sensitive” postings @cusprevpatna@cusprevlucknow ने कुछ “LCS (Local Customs Stations)” को बना रखा है । गौर कीजिएगा कि नेपाल से ट्रेड में कोई रेवन्यू भारत को नहीं मिलता । एक्सपोर्ट इंपोर्ट पर ड्यूटी नेग्लिजिबल है । ना ही यहाँ LCS में पोस्टे��� ऑफिसर कोई प्रिवेंटिव केस करते है ।
और गौर करियेगा कि नेपाल बॉर्डर के सारे LCS मोस्ट सेंसिटिव पोस्टिंग नहीं है । केवल मुख्य मलाईदार LCS रक्सौल, जोगबनी, सोनौली , नेपालगंज और बड़नी ही है ।
अब इसमें इंस्पेक्टर सुपरिंटेंडेंट की पोस्टिंग करते है महाराज , आजाद भारत के कस्टम्स के सुल्तान ख़ुद चीफ कमिश्नर महोदय । और पूरे भारत में ये काम केवल कमिश्नर कर देते है ।
तो सोचिए कैसे पूरा तंत्र बना रखा है कमाई का । पूरा sanctioned कर रखा है भ्रष्टाचार । एक इंस्पेक्टर सुपरिंटेंडेंट २ साल की सोनाली की पोस्टिंग्स में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपए कमाता है । रक्सौल की पोस्टिंग कम समय की है तो कम समय में करोड़ो अंदर हो जाते है । यहाँ एक अकाउंटेंट designate होता है , जो पूरा पैसे का वितरण देखता है वो 25/30 लाख एक्स्ट्रा कमाता है पोस्टिंग में ।
अब सोचिए इन सबसे बड़ा शेयर कमिश्नर , चीफ कमिश्नर , एडिशनल कमिश्नर , असिस्टेंट कमिश्न��� को जाती है , जिनके संरक्षण में ये कमाई और पोस्टिंग्स होती है । ये लोग अपने टेन्योर में सुपारी , गोल्ड और रिस्ट्रिक्टेड आइटम्स की लाइन ले कर और इन एलसीएस से मंथली 25-50 लाख ले , फेक एक्सपोर्ट्स कर कस्टम्स पोस्टिंग्स में 25-100 करोड़ या ऊपर कमा लेते है ।
ये सब पोस्टिंग्स का बाकायदा ऑक्शन होता है । इसीलिए बार बार पालिसी बदली जाती है । अब इस पोस्टिंग जिसमें १-1.5 करोड़ की सिद्ध कमाई हो जाए उसके लिए इंस्पेक��टर सुपरिंटेंडेंट 5-10-15 लाख तक दे देता है
ग़ज़ब का सिस्टम है ना !
गौर करियेगा @CBIHeadquarters ने इतनी महान पोस्टिंग अरेंजमेंट के बाद १०० करोड़ का फेक एक्सपोर्ट्स पटना कस्टम्स में एक्सपोज़ किया था जो कमिश्नर कटियार की देख रेख में चल रहा था ।
सोनौली LCS में भी फ्लेवर हुक्का के फेक एक्सपोर्ट्स पर करोड़ो बटोरे गए है । लेकिन वो सब बचे हुए है ।
इसी भ्रष्टाचार के सिस्टम के कारण ही एक आईआरएस कस्टम्स में सरकार�� संसाधनों का मनमानदोहना और सब कुछ फ्री में उपयोग करता है ।
आईआरएस के बीच अपनी लड़ाई है आईएनएस सब पोस्टिंग्स को पाने की । अब बताइए विभाग जानता के लिए है या कमाई के लिए ?
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@abhijatindia@cgstluckzone@cusprevlucknow Abhijat Ji, you are crusader and exposing the huge corruption in administration for past few years. But neither honest CBIC or curt n straight forward Madam FM is taking any corrective actions against the system.
इस साल फिर होगा कस्टम्स में जम कर भ्रष्टाचार ।
@cgstluckzone के चीफ कमिश्नर लोगो को ज्ञान दे रहे थे कि प्रमोशन होने के बाद अगर स्टेशन ना सही लेकिन formation बदलता है । उसी जगह उसी ऑफिस में प्रमोशन के बाद पोस्ट नहीं करते है ।
अब देखिए लखनऊ कस्टम्स @cusprevlucknow के एडीसी , कमिश्नर पर प्रमोट हुए और इस कमाई वाली पोस्टिंग का खूब मजा ले लि�� और फिर जुगाड़ से प्रमोट होने के बाद यहीं कमिश्नर बन गए ।
अब तो खुलेआम एलसीएस सोनौली , नेपालगंज, बड़नी, और एयरकार्गो , डिवीज़न नौटंवा आदि बेचे जाएँगे
चीफ कमिश्नर इंस्पेक्टर सुपरिंटेंडेंट के ट्रांसफर पोस्टिंग के किए यहाँ डेरा जमा के ऑफिस सेट कर लिया है ।
एक बार की कमाई का बढ़िया मौक़ा है । इसीलिए और सारे जोन में कमिश्नर कस्टम्स में पोस्टिंग करता है , यहाँ कमाई वाली पोस्टिंग को अलग कर लिया ग���ा है , जिसको बारीकी से जांच के कस्टम्स के महान एक्सपर्ट्स चीफ कमिश्नर ख़ुद अपने हाथों से करेंगे ।
गौर करियेगा अभी सीबीआई ने १०० करोड़ का फेक एक्सपोर्ट्स में एडीसी को पटना कस्टम्स में आरोपी बनाया था । इतनी बारीकी से पोस्टिंग करने के बाद ये हा�� है । सोनाली में भी हुक्के के फ्लेवर के फेक एक्सपोर्ट्स का एक्स पर खुलासा किया गया था ।
सुनने में आ रहा है कि पालिसी चेंज करके अब खूब खुलेआम बेचा जाएगा पोस्टिंग अपने बंदों को सेट करने को पालिसी चेंज हो रही है । अभी २०२३ में कटियार ने एक साल का कूलिंग ऑफ़ लगाया था कुछ को बेनिफिट पहुचाने को । अब ये हटाने की तैयारी में है दूसरे को फायदा पहुचाने में ।
मस्त मजे है । इस भ्रष्टाचार की पालिसी को कैट मे��� एसोसिएशन ने चैलेंज किया था । मुझे निकाल दिया तो ठप्प हो गया ।
चलो भाई विभाग नहीं हो गया अवैध कमाई का अड्डा बना रखा है । स्मगलिंग , लाइन , और ट्रांसफर पोस्टिंग की करोड़ो की इंडस्ट्री ।
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