ये तो होना ही था!
ED ने शेखर सुमन शो से जुड़े बिजनेसमैन पर रेड मारा। हैरानी की बात है कि इतना देर कैसे हुआ!
वैसे मुझे अभी भी लग रहा है कि ED राम मंदिर चंदा घोटाला में ताबड़तोड़ छापे मारेगी और चंपत रायसहित सारे मेम्बर को कम से कम 6 महीने जेल रखेगी!
Interesting details out of NZ:
“It’s also understood Modi’s age (75) provides extra complexities, with requests for his schedule to allow for nap times and a preference for venues without stairs he’d need to use (which likely stems from when he fell on stairs during an event six years ago).” https://t.co/hInibdtJ7a
मैं आपके सामने RTI के कुछ दस्तावेज और लोगों का मृत्यु प्रमाण पत्र रख रहा हूं।
ये दस्तावेज साबित करते हैं कि कैसे मर चुके लोगों के अंगूठे लगाकर ग्राम सभाओं के प्रस्ताव प्रस्तावित किए गए।
कुछ उदाहरण देखिए 👇
⦁ बृजभान सिंह जी की मृत्यु 2014 में हुई, लेकिन 2021 में उनसे अनुमति ली गई
⦁ फुलेश्वरी सिंह जी की मृत्यु 2018 में हुई, इनसे सहमति 2021 में ली गई
⦁ जग बंधन सिंह गोंड जी की मृत्यु 2015 में हुई, लेकिन इनका अंगूठा 2021 में लिया गया
⦁ चंद सिंह जी की मृत्यु 2017 में हुई, लेकिन 2021 में इनकी अनुमति ली गई
इन सबसे अलग एक और उदाहरण है- सुमारू सिंह जी और सोनमती सिंह जी का। ये सिंगरौली कोल ब्लॉक के खिलाफ डेलिगेशन लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी जी से मिलने दिल्ली आए थे।
लेकिन BJP सरकार का फर्जीवाड़ा देखिए कि इनका अंगूठा भी ग्राम सभा के प्रस्ताव में मौजूद है।
साफ है कि BJP सरकार में मरे हुए लोगों को जिंदा दिखाकर, फर्जी ग्राम सभाओं के जरिए आदिवासियों के अधिकार छीने जा रहे हैं।
: @INCAdivasi के चेयरमैन @VikrantBhuria जी
📍 दिल्ली
Day 13 of @Wangchuk66’s hunger-strike:
“Any attempt by the authorities to remove me from Jantar Mantar would amount to a violation of my rights.” - Sonam sir
सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ वह दुखद है। माननीय जस्टिस ने संयम और उदारता का परिचय देते हुए उचित ही कोई एक्शन नहीं लिया। यह बात तारीफ़ के क़ाबिल है। सुप्रीम कोर्ट का कंधा चौड़ा होना चाहिए और दिल बड़ा। इस बात को भी संज्ञान में लेना चाहिए कि समाज में न्याय को लेकर हताशा फैलती जा रही है। उसकी निष्पक्षता पर संदेह बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होती। कोई किसी का एनकाउंटर कर दे रहा है, किसी का घर गिरा दे रहा है। नागरिक अपने सवालों को लेकर कोर्ट की सीढ़ियाँ चढ़ता है लेकिन दीवारों से टकरा जा रहा है। इन्हीं कारणों से हताशा बढ़ती जा रही है। उम्मीद है, ऐसी घटना दोहराई नहीं जाएगी। यह भी कि न्याय व्यवस्था अपनी उदारता के साथ साथ विश्वसनीयता को बेहतर करेगी। उम्मीद की आख़िरी मंज़िल कोर्ट है और उस मंज़िल का बने रहना ही हताशा का इलाज है।