बहुत-बहुत बरसों बाद
जब बादल ख़ूब बरसते हैं
धरती बरसते रस को
आँखें बंद किए सोखती रहती है
वह भूल जाती है वे सारे दुःख
जो उसे बादल से कहने थे
वे सारे उलाहने
जो बादल को देने थे
वह उसे ऐसे देखती है
कि बादल बेआब हो जाता है
और धरती की आँखें समंदर
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#सरस#बज़्म#सुप्रभात
भागदौड़ में बीता दिन
घर में रहा उजियारा
मन के किसी कोने में
पसरा रहा अंधियारा
कसक पुरानी यादों की
रुकी नहीं भी इक पल
माँ पापा की कमी
उठती रही बराबर
लब रहे मुस्कुराते
जहन रहा बिलखता
अश्कों को थामने की
समझ ना पाई विवशता
✍️✍️
🌹 लफ़्ज़ दिल से 🌹
कोई बतलाओ कि इक उम्र का बिछुडा महबूब।।
इत्तेफ़ाकन कहीं मिल जाये तो क्या कहते हैं...
जब तलक दूर है तू, तेरी ईबादत कर लें।।
हम जिसे छू ना सकें, उसको खुदा कहते हैं।।
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सब कुछ देखते क्यों आ गया दामे-मुहब्बत में
चलो दिल हो गया था यार का....
पर आंखे तो मेरी थी।।।
ऐसी ग़ज़ल पहले मैंने न लिक्खी होगी।।
ख़ुद पढ़के लगता है..
क्या ये काविश मेरी थी।।
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