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काम। -:- ऑफिस वर्क स्टाफ
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विश्व युद्ध होने की संभावना है लेकिन पता कर लीजिए मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा कौन है
6 अगस्त 1945 – हिरोशिमा
9 अगस्त 1945 – नागासाकी
दो बम… दो शहर… लाखों लाशें।
बच्चे जलते रहे
माँएं चीखती रहीं
अमेरिका बोला – ज़रूरी था।
•• लेकिन जापान पहले ही झुक चुका था
•• तो बम क्यों गिराया गया?
ताकि पूरी दुनिया देखे — कौन मालिक है।
🔥 वियतनाम (1955–1975)
नेपाम बम गिरा
बच्चों की खाल तक पिघली
तीन मिलियन से ज़्यादा मौतें
•• वजह – "कम्युनिज़्म से डर"
डर के नाम पर तबाही —
अमेरिकन नीति यही रही।
🔥 ईरान (1953)
चुनी हुई सरकार — हटवा दी
तेल के सौदों में दिक्कत थी
•• इसलिए शाह को गद्दी दी
•• और जनता को गोलियां मिलीं
नाम था 'गवर्नेंस'
असल में था ‘तेल व्यापार’
🔥 अफगानिस्तान (2001–2021)
20 साल की चढ़ाई
लाखों मरे
देश मरा
फिर एक दिन…
•• अमेरिका चुपचाप निकल गया
"माफ कीजिए…
मिशन पूरा नहीं हुआ"
🔥 इराक (2003)
"विनाश के हथियार हैं" — झूठ बोला
युद्ध हुआ
सद्दाम को फाँसी
इराक को नर्क
•• 2020 में खुद माना — कोई हथियार था ही नहीं
🔥 लीबिया (2011)
"तानाशाही हटानी है"
गद्दाफी हटाया
देश बर्बाद कर दिया
आज तक टूटा पड़ा है
•• और अमेरिका अगली दुकान पर बढ़ गया
🔥 अब 2025 – ईरान
न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद
तेल के जहाज़ रुके
बाज़ार हिला
•• और अमेरिका बोला – “विश्व सुरक्षा के लिए था”
अब सुनिए…
अगर निर्दोषों को मारना, डर फैलाना आतंक है —
तो फिर
हिरोशिमा क्या था?
वियतनाम क्या था?
इराक, ईरान क्या हैं?
बस फर्क इतना है –
एक आदमी मारे – आतंकवादी
एक देश मारे – सुपरपावर
"क्या अमेरिका मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन नहीं है?" तय आप कीजिए…
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#Iran
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2011 में जब मेरी शादी हुई तो मेरी पत्नी कश्मीर जाना चाहती थी, मगर नही जा पाए !- उसके बाद मेरे बच्चें हो गए, इसलिए काम -धंधे में उलझ गए ! पिछले कुछ सालों में कश्मीर में आतकंवाद खत्म हो गया था। अच्छा माहौल था, पर्यटन बढ़ रहा था, आम कश्मीरी भी खुश थे। इस बार मैंने भी पत्नी से कह दिया था कि चलेंगे ! बच्चे भी बड़े हो गए हैं !
लेकिन मेरे दिमाग़ से यह तस्वीर नही निकल रही है ! कभी कभी अहसास होता है कि यह मैं ही हूँ, पास में मेरी पत्नी है ! किसी भी आतंकवादी हमले का कोई न कोई बड़ा राजनीतिक मक़सद होता है ! इस हमले से कश्मीरियत को बहुत नुकसान है ! जिस विश्वास को सालों मेहनत करके वापस पाया गया था वो विश्वास इसी एक घटना से टूट गया है।
जिन कायर आतंकवादियों ने यह हमला किया है उन्हें और उनके आकाओं को सबक सीखा दिया जायेगा! भारत न ही तो कमज़ोर है और न ही किसी के बाप से डरता है, मगर यह दर्द जो हमें मिला है , यह बहुत तकलीफ़ दे रहा है। मूर्खता यह है कि हम इस कठिन समय मे भी एक वर्ग विशेष के विरुद्ध जहर परोस रहे हैं, क्या फायदा होगा इससे, आम कश्मीरी पर्यटन के फलने -फूलने से खुश है, पर्यटकों की बढ़ती हुई तादाद से उसकी संपन्नता बढ़ती है।
एक बड़ी पत्रकार ने लिखा है कि हमलावरों की पहचान लगभग हो गई है, ये चार लोग थे जिनमें से 2 पाकिस्तानी है, वो लश्कर ए तैयबा के संगठन टीआरएफ से जुड़े है ! टीआरएफ ने इस घटना जिम्मेदारी ली है ! पीएम मोदी सऊदी अरब का दौरा बीच मे छोड़कर आ गए हैं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी अमेरिका में है, उन्हें भी वापस आ जाना चाहिए।
देश एकजुट है, हमला बड़ा है, दुश्मन धूर्त है ! हम मानसिक रूप से दृढ़ होकर लड़ना होगा ! यह सम्पूर्ण भारत और इंसानियत पर हमला है ! इसका निंदा भी की जाती है और इसके दोषियों को जड़ से समाप्त करने की उम्मीद भी ! नाम लेकर मारना और यह कह देना कि जाओ बता देना मोदी को ! यह सिद्ध करता है कि हमलावर न केवल ज़ालिम है बल्कि देश मे अविश्वास पैदा करने के षड़यंत्रकारी भी है !
तो सुनो मूर्ख ज़ालिमों !
हाँ हम सब है मोदी के साथ ! हमारा पीएम है वो ! बता दिया है मोदी को ! आ रहा है तुम्हारा बाप !
#पहलगाम #Pahalgam #PahalgamTerroristAttack