@CMOMaharashtra@mieknathshinde मिसिंग लिंक जर लोकांना वापरायला दिला, उद्या उद्घानात करायला काय हरकत आहे. लोकांनीच दमाने घ्यावे असे सांगत आहेत नेते. पहाटे शपथविधी होतो तर उद्घाटन पहाटे होऊ शकते. आपल्या कडून खुप अपेक्षा आहेत छोट्या गोष्टी मुळे नाव नको खराब व्हायला
After 8 yr, road work finally started,but now it’s been 2 moth with ZERO progress.
Potholes, mud, dust, and daily traffic jams are making life miserable for residents.
Ironically, a perfectly good society cement road was broken by NHAI & PCMC, and now left incomplete.
🚨 Sai Arcade Road, Wakad (near Mumbai-Pune Highway service road) is in terrible condition.
Construction stopped midway; due to rains it’s now full of mud, deep potholes & open drainage. Vehicles getting stuck daily.
Request urgent temporary repair & resume work.
@pitamaha_b52862 वो दान पेटी की चावी तो कलेक्टर या कोई पार्टी के नेता के पास होती है. आप कोई अन्य देश की बात कर रहे हो. भारत मे तो सारे मंदिर सरकार के हात मैं हैं और वो टॅक्स भी देते हैं.
@airtelindia I took your paid static IP service & from last 9 days I am facing issues with port forwarding, two times raised complaints but yet no luck. Can you please assign some trained engineer to my ticket.
@Airtel_Presence
@HansrajMeena कल से आप मत चढाना, मेहनत हम करे पैसा हम चढाये, और आप बाताएंगे हमारे पैसे का क्या करे. अरे हा मंदिर का एक पाठशाला, मेडिकल कॅम्प और सामाजिक कार्य मे सहभाग है परंतु हमे वो नाही देखना है
स्वयंसेवक कोई भी कार्य करने में नहीं
हिचकते, इस बात का प्रमाण है निर्मल वारी अभियान। संत तुकाराम जी की जन्मस्थली देहू से पंढरपुर तक चलने वाली इस यात्रा में
स्वयंसेवक अपने साथ चलित शौचालय लेकर चल रहे हैं ताकि हर वर्ष होने वाली गंदगी
से गांव वालों को बचाया जा सके।
800 स्वयंसेवकों ने इसमें जिम्मेदारी संभाली, कोई सफाई कर रहा था तो कोई मेडिकल की चिंता कर रहा था।
महाराष्ट्र में पुणे के नजदीक स्थित देहूगांव के निवासी इस बार जब यात्रा गुजर जाने के बाद अपने अपने गांव पहुंचे तो उन्हें गांव साफ सुथरा मिला। 800 स्वयंसेवकों के इस अथक
परिश्रम को देखकर उन्होंने हृदय से नमन किया।
देहू (पुणे) के निवासियों को वर्षों से जिस समस्या का सामना करना पड़ रहा था, इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस) के "निर्मल वारी अभियान" ने उन्हें इससे मुक्ति दिलाई है। ग्रामीणों ने बताया कि वारी (यात्रा) के दौरान उन्हें मजबूरन गांव छोड़कर बाहर रहना पड़ता था और वारी गुजर जाने के बाद पूरे गांव में गंदगी का अंबार लग जाता था। वे 15 दिनों तक गांव में प्रवेश नहीं करते थे क्योंकि हर जगह गंदगी फैली होती थी। "लेकिन इस बार वारी के गुजरने के बाद पूरा गांव साफ-सुथरा था। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 800 स्वयंसेवकों के प्रयास का ही परिणाम था जो तीन दिनों तक अथक रूप से 'निर्मल वारी अभियान' चला रहे थे।यह अभियान केवल देहू तक ही सीमित नहीं है। आगे वारी के प्रत्येक पड़ाव पर लगभग 500 स्वयंसेवक 'निर्मल वारी अभियान' को सफलतापूर्वक चला रहे हैं।
इस वर्ष संघ ने आषाढ़ी वारी को 'निर्मल वारी' के रूप में मनाने का संकल्प लिया था और आश्चर्यजनक रूप से हजारों स्वयंसेवकों की एक बड़ी फौज तैयार हो गई। पहले जब पालकियां (दिंडियां) पड़ाव वाले गांवों से आगे बढ़ती थीं तो पीछे शौच और गंदगी का साम्राज्य रह जाता था। लेकिन श्री माउली पर श्रद्धा और हिंदू धर्म के प्रति प्रेम के कारण वारी मार्ग के सभी गांव इस गंदगी को चुपचाप सहन करते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने गांवों की इस समस्या को पहचाना और 'निर्मल वारी' की योजना शुरू की। रास्ते में कई कठिनाइयों के पहाड़ खड़े हुए लेकिन स्वयंसेवकों ने हार नहीं मानी। ये स्वच्छता के वारकरी (स्वयंसेवक) पालकियों के साथ चलित शौचालय लेकर चल रहे हैं। जिस गांव में पालकियां रुकती हैं वहां ये शौचालय पहले से ही तैयार कर दिए जाते हैं। परिणामस्वरूप, वारी अब निर्मल हो गई है। संघ के निस्वार्थ भाव से काम करने वाले स्वयंसेवकों को आशीर्वाद देते हुए पालकियां आगे बढ़ रही हैं। स्वयंसेवक वही है जो असंभव को संभव बनाता है और उसे इतना दृढ़ बनाने वाला "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" और उसकी नियमित शाखा है।
#निर्मलवारी
#निर्मलवारी_अभियान
#पंढरपुर_यात्रा
#पालखी_सेवा
#स्वयंसेवक
#वारकरी
#संघ
#स्वच्छता
#सेवा
#RSS
#सेवाकार्य
@RSSorg