#balsanskarkendra बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सुंदर शुरुआत!
माता-पिता! बाल संस्कार केंद्र बच्चों के लिए ऐसी जगह है, जहाँ अच्छी आदतें, संस्कार, आत्मविश्वास, जागरूकता और जीवन जीने की कला सरल व आनंददायक तरीके से सिखाई जाती है।
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@Balsanskarsewa बचपन में मिले अच्छे संस्कार ही जीवनभर की मजबूत नींव बनते हैं। 🌸 बाल संस्कार केंद्र बच्चों में सद्गुण, आत्मविश्वास और जीवन-मूल्यों को सहज व आनंदमय ढंग से विकसित करने का सुंदर प्रयास है। 🙏
#BalSanskarKendra#SanskariBachche#BrightFuture
जिनको गुरु का ज्ञान पक्का हो गया कि मैं आत्मा हूँ, चाहे सारी दुनिया के लोग उल्टा बात करें। अरे ब्रह्मा जी भी बोल दें कि तू जीव है, तो भी उनको संदेह नहीं होता। ऐसा पक्का ज्ञान जिनको हो गया, उनको बोलते हैं ब्रह्मज्ञानी। वो पहले नंबर का सत्संग करते हैं।
#RishiDarshan#AsharamjiBapu
गर्भपात को पाप ही नहीं, महापाप माना गया है। जो 84 लाख योनियों में भटक के आपके जैसे पवित्र कुलों में आया उसीको आप पैसे देकर मरवा दोगे?
गर्भपात के महापाप से बचो और दूसरों को भी ज्ञान दो,बचाओ ।
नवम्बर 2015,अंक 275,पेज 26
#RishiPrasad#AsharamBapu#SantShriAsharamjiBapu#ProtectLife
उद्देश्य अगर वाहवाही पाना बनता है तो जलाता है, उद्देश्य अगर भोगप्राप्ति बनता है तो सताता है और उद्देश्य अगर भगवत्प्राप्ति बन जाता है तो युद्ध करना भी तार लेता है, रसोई बनाना भी तार लेता है । #AsharamjiBapuQuotes
उद्देश्य अगर वाहवाही पाना बनता है तो जलाता है, उद्देश्य अगर भोगप्राप्ति बनता है तो सताता है और उद्देश्य अगर भगवत्प्राप्ति बन जाता है तो युद्ध करना भी तार लेता है, रसोई बनाना भी तार लेता है । #AsharamjiBapuQuotes
संस्कृति की रक्षा केवल कानून से नहीं, संस्कारों से भी होती है। आइए अपने बच्चों और युवाओं को सम्मान, मर्यादा और आत्मसंयम का महत्व समझाएँ।उनका भविष्य उज्ज्वल बनाएं। #अश्लीलता_पर_लगाम_कब
दुनिया में 200 देश हैं लेकिन भारत जितना सत्संग प्रेमी, अतिथि प्रेमी और भगवान के भरोसे आराम से नींद करनेवाले लोग तो आपको भारत में मिलेंगे, अमेरिका में नहीं मिल रहे हैं, कैनेडा में नहीं मिल रहे हैं, भारत में तो श्रद्धा के साथ विचार है, श्रद्धा के साथ ज्ञान है।
#AsharamjiBapuQuotes
भारत की धरती पर सत्संग और संतों के प्रति प्रेम सदियों से जीवन को दिशा देता आया है। श्रद्धा और विवेक का सुंदर संगम ही हमारी संस्कृति की शक्ति है। 🪷
#AsharamjiBapu#RishiDarshan#SanatanDharma
दुनिया में 200 देश हैं लेकिन भारत जितना सत्संग प्रेमी, अतिथि प्रेमी और भगवान के भरोसे आराम से नींद करनेवाले लोग तो आपको भारत में मिलेंगे, अमेरिका में नहीं मिल रहे हैं, कैनेडा में नहीं मिल रहे हैं, भारत में तो श्रद्धा के साथ विचार है, श्रद्धा के साथ ज्ञान है।
#AsharamjiBapuQuotes
प्रेम पैदा कैसे होता है कि पहले आशा करो कि मुझे भगवत् प्रेम चाहिए। प्रेम का प्रागट्य कैसे होता है? पहले आशा हो, आशा तो एक राम की और आश निराश।
दूसरा फिर दृढ़ता। आशा तो किया लेकिन दृढ़ निश्चय नहीं है तो फिर जरा सिगरेट का रस, जरा फलाने का रस, जरा टीवी का रस। नहीं, ये सब छोड़ो। मुझे तो भगवत प्रेम रस चाहिए। आज सुबह भगवत प्रेम रस थोड़ा चखाया था। जिसको अच्छा लगा हाथ ऊपर करो। अभी भी मैं करवाता हूँ । तो एक तो आशा करो कि हमें भगवत् प्रेम रस चाहिए। दूसरा दृढ़ संकल्प करो। तीसरा उत्कंठा और चौथा व्याकुलता। व्याकुलता, उत्कंठा, दृढ़ संकल्प और आशा, ये प्रेम रस के प्रागट्य की पूर्व भूमिका है। अब प्रेम रस का रसायन क्या है ? उद्दीपन क्या है ? बोले विरह, भगवान के नहीं मिलने का विरह, ये रसायन है और भगवान में शांति भगवान में प्रीति। और प्रेम रस में कभी तृप्ति नहीं होती। जिसको सत्संग में तृप्ति होती है उसने सत्संग का रस नहीं जाना। और जिसको प्रेम रस में तृप्ति हो गई तो उसने प्रेम रस नहीं जाना।
#AsharamjiBapu
प्रेम रस ऐसा अमृत है जिसकी प्यास कभी समाप्त नहीं होती। सत्संग और प्रभु-स्मरण से हृदय में प्रेम की ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहे—यही मंगलकामना है। 🌸🪷
#AsharamjiBapu#SatsangMahima#BhagwatPrem
प्रेम पैदा कैसे होता है कि पहले आशा करो कि मुझे भगवत् प्रेम चाहिए। प्रेम का प्रागट्य कैसे होता है? पहले आशा हो, आशा तो एक राम की और आश निराश।
दूसरा फिर दृढ़ता। आशा तो किया लेकिन दृढ़ निश्चय नहीं है तो फिर जरा सिगरेट का रस, जरा फलाने का रस, जरा टीवी का रस। नहीं, ये सब छोड़ो। मुझे तो भगवत प्रेम रस चाहिए। आज सुबह भगवत प्रेम रस थोड़ा चखाया था। जिसको अच्छा लगा हाथ ऊपर करो। अभी भी मैं करवाता हूँ । तो एक तो आशा करो कि हमें भगवत् प्रेम रस चाहिए। दूसरा दृढ़ संकल्प करो। तीसरा उत्कंठा और चौथा व्याकुलता। व्याकुलता, उत्कंठा, दृढ़ संकल्प और आशा, ये प्रेम रस के प्रागट्य की पूर्व भूमिका है। अब प्रेम रस का रसायन क्या है ? उद्दीपन क्या है ? बोले विरह, भगवान के नहीं मिलने का विरह, ये रसायन है और भगवान में शांति भगवान में प्रीति। और प्रेम रस में कभी तृप्ति नहीं होती। जिसको सत्संग में तृप्ति होती है उसने सत्संग का रस नहीं जाना। और जिसको प्रेम रस में तृप्ति हो गई तो उसने प्रेम रस नहीं जाना।
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