एक यूजर ने बताया कि 2 दिसंबर को उसकी ट्रेन 8 घंटे लेट थी। उसने यात्रा नहीं की और ट्रेन के डिपार्चर से काफी पहले TDR फाइल कर दिया। आज जब TDR स्टेटस पर शिकायत की तो रेलवे का जवाब आया — “आपने यात्रा की है, इसलिए रिफंड नहीं मिलेगा।” सबूत , स्क्रीनशॉट और रिक���र्ड होने के बावजूद यह दावा किया जा रहा है कि यात्री ने सफर किया।
@RailMinIndia
जब ट्रेन 8 घंटे लेट थी, TDR समय पर फाइल है और पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, तो रेलवे किस आधार पर कह रहा है कि यात्रा की गई? यह सिस्टम की गलती है या जानबूझकर रिफंड रोकने की नीति? नियम यात्रियों के लिए हैं या सिस्टम की नाकामी छिपाने के लिए?
@IRCTCofficial
अब बताइए , क्या इसे भी “misinformation” कहकर नकार दिया जाएगा? यात्रियों की समस्या सुनने और समाधान देने के बजाय हर शिकायत को अफवाह बताकर पल्ला झाड़ लेना कब से प्रशासन बन गया? काम करना नहीं है, जवाबदेही लेनी नहीं है — बस यात्रियों को ही कटघरे में खड़ा करना है। यही आज का रेलवे सिस्टम बन चुका है।
👉🏻 @IRCTCofficial कह रहा है कि Tatkal Ticket Booking को लेकर misinformation फैलाई जा रही है।
> @RailMinIndia@RailwaySeva तो फिर सवाल यह है— ये स्क्रीनशॉट क्या हैं: अफ़वाह या ज़मीनी सच्चाई?
इन स्क्रीनशॉट्स मे��� साफ़ दिख रहा है—
>> 10:01 AM: No seats available – Transaction dropped (134317082)
>> 10:01 AM: Passenger details भरने के बाद भी
Book Ticket → “Please wait…” और सिस्टम वहीं अटक गया।
>> 10:06 AM: Unable to perform transaction due to internal error (134318730) यानि 10 बजे के बाद भी तत्काल टिकट नहीं बन पा रहा।
>> 10:10 AM: Aadhaar आधारित authentication के बाद “Please wait…” ना payment आगे बढ़ा, ना टिकट बनी।
>> 11:02 AM: Sending OTP → “Please wait…”
OTP भेजने के स्टेज पर ही सिस्टम फ्रीज़।
Convenience fee दिख रही है, Pay का बटन सामने है,
लेकिन OTP नहीं, आगे कोई रास्ता नहीं।
>> हर स्क्रीनशॉट एक ही कहानी कह रहा है—
• सिस्टम फ्रीज��� होता है
• Transaction drop होता है
• Error code आता है
• Session expire हो जाता है
• और यात्री बाहर हो जाता है
>• यह एक दिन की तकनीकी गड़बड़ी नहीं है। यह हर दिन, हर शहर, ठीक 10–11 बजे दोहराया जाने वाला पैटर्न है।
>>अगर Aadhaar आधारित OTP से यात्री “grossly benefitted” हैं, तो-
• OTP भेजने में ही मिनटों क्यों लग रहे हैं?
• OTP stage पर ही सिस्टम क्यों बैठ जाता है?
• Payment page तक पहुँचकर भी transaction क्यों नहीं होता?
>> अगर Tatkal tickets अब “लंबे समय तक उपलब्ध” हैं, तो
• आम यात्रियों के लिए 30–40 सेकंड में Sold Out क्यों?
• Telegram पर आज भी “Confirmed Tatkal” कैसे बिक रहा है?
• एजेंटों को यही error क्यों नहीं दिखते?
>> IRCTC कहता है—
• 3.03 करोड़ User IDs deactivate
• 2.70 करोड़ User IDs suspend
>> तो सीधा सवाल—
• क्या ये सभी आम यात्री फर्जी थे?
• क्या इन स्क्रीनशॉट्स वाले यूज़र भी दलाल हैं?
• अगर नहीं, तो सिस्टम की सज़ा आम यात्री क्यों भुगत रहा है?
> यह misinformation नहीं है।
> यह system design failure है।
> यह peak-time load mismanagement है।
> यह agent–software nexus को छूने से बचने की नीति है।
👉🏻“Please wait…” अब सिर्फ़ एक error message नहीं,
Tatkal booking का स्थायी जवाब बन चुका है।
•> यात्री बयान नहीं मांग रहा।यात्री काम करता हुआ सिस्टम मांग रहा है।
>> जब तक—
• Peak hours (10–11 AM) का independent audit public नहीं होगा
• Failed Tatkal booking पर automatic refund और compensation नहीं मिलेगा
• Agent access पूरी तरह खत्म नहीं होगा
तब तक ऐसे स्पष्टीकरण समाधान नहीं, आम यात्रियों के अनुभव का खंडन माने जाएंगे।
• स्क्रीनशॉट बोल रहे हैं।
• यात्री कहानी नहीं बना रहा।
• सिस्टम खुद गवाही दे रहा है।
#TatkalTicketBooking
यह ट्रेंड अफ़वाह नहीं, सबूतों के साथ जवाबदेही की मांग है।
@Khurpench_ 266 rs ka यूरिया का कट्टा 350 में मिल रहा है।
दे उसी को रहे है जो उसी दुकान से सारी दवाएं खरीदता है।
1200 रुपए d a p का कट्टा 1800 में दे रहे है।
सरकारी देशी शराब की दुकान पर कभी कमी नहीं होती।
लाइन लगी रहती है, बोतलें भरी रहती हैं, रोज़ सप्लाई आती है।
लेकिन वही किसान जो देश को खाना देता है, जब खाद लेने सहकारी समिति जाता है तो हर बार एक ही जवाब मिलता है 👇
“खाद खत्म है, बाद में आना।”
ये कोई इत्तेफ़ाक नहीं है , यही सिस्टम की सच्चाई है।
सीधी-सी बात समझिए 👇
शराब से सरकार को पैसा मिलता है , इसलिए उसकी सप्लाई कभी नहीं रुकती
खाद नहीं मिली तो किसान की फसल खराब, कर्ज बढ़ा , नुकसान अलग समय पर खाद न मिले तो पूरा सीजन बर्बाद हो जाता है।
सहकारी समितियों में स्टॉक रहते हुए भी किसान को खाली हाथ लौटाया जाता है।
बाद में वही खाद प्राइवेट दुकानों पर महंगे दामों में मिलती है।
शराब दुकान पर स्टॉक खत्म हो जाए तो तुरंत हंगामा होता है।
लेकिन किसान को कहा जाता है — जुगाड़ कर लो।
सवाल साफ है 👇
सरकार के लिए शराब ज़्यादा ज़रूरी है या किसान?
जब तक किसान को खाद, बीज और पानी
शराब जितनी अहमियत नहीं मिलेगी,
तब तक खेती और किसान दोनों यूँ ही पिसते रहेंगे।
वंदे भारत की लगातार देरी यात्री भुगत रहे हैं, जवाबदेही शून्य।
पिछले एक हफ्ते से वंदे भारत रोज़ाना
दिल्ली ↔ बनारस रूट पर 3 से 6 घंटे लेट चल रही है।
यह अब अपवाद नहीं, नियम बन चुका है।
यात्री का सीधा नुकसान >>
समय पर न पहुँच पाने से ऑफिस , मीटिंग , परीक्षा , इलाज सब प्रभावित।
आगे की कनेक्टिंग जर्नी छूट रही है—फ्लाइट, दूसरी ट्रेन , बस।
पैसे भी बर्बाद और हर जगह यात्री को ही जवाब देना पड़ता है कि देरी क्यों हुई।
बुज़ुर्ग , बच्चे और बीमार यात्रियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम अलग।
सिस्टम की विफलता >>
कोहरा एक वजह हो सकता है, लेकिन लगातार दिनों तक 3–6 घंटे की देरी साफ़ तौर पर मिसमैनेजमेंट दिखाती है।
शेड्यूल प्लानिंग, लोको/क्रू मैनेजमेंट, ट्रैक प्रायोरिटी सब फेल।
यात्री की जेब कटती है, रेलवे को कोई नुकसान नहीं, न ही किस��� की जवाबदेही तय।
सीधा सवाल >>
अगर सेवा समय पर नहीं, तो पूरा किराया क्यों?
रेलवे की गलती से देरी हो तो रिफंड ऑटोमैटिक क्यों नहीं?
रात में फँसने पर होटल और कैब का खर्च कौन देगा?
न्यायसंगत मांगें 👇
1. 2 घंटे से ज़्यादा देरी पर आंशिक/पूरा रिफंड।
2. 4+ घंटे या ओवरनाइट डिले पर होटल + कैब खर्च रेलवे वहन करे।
3. देरी का रियल-टाइम कारण और जिम्मेदार अधिकारी सार्वजनिक हों।
4. बार-बार देरी वाले रूट पर पेनल्��ी और सुधार योजना।
रेलवे सिर्फ़ मुनाफ़ा नहीं कमा सकता।
अगर आपकी वजह से यात्रियों का समय, पैसा और स्वास्थ्य बर्बाद हो रहा है,
तो भरपाई भी आपकी जिम्मेदारी है।
द पैनेशिया हॉस्पिटल कानपुर।
कानपुर का एक सुविख्यात न्यूरो अस्पताल जिसके बारे में मै आपको स्वयं का अनुभव शेयर करूंगा।
यहां जाने से पहले आप पूर्णतया इन बातों का ध्यान रखें-
1- अगर आप कोई फ्रॉड करके पैसे कमाए हों तभी जाएं, क्योंकि यहां पर 8 से 10 दिन का बिल लगभग 5 से 6 लाख रुपए हो सकता है।
2- अगर कुछ खेत आपके नाम है तो उसे बेचकर आएं।
3- बीवी के गहने भी गिरवी रखकर आएं।
4- अस्पताल के मुख्य डॉ विकास शुक्ला से आप कोई भी सवाल न पूछें नहीं तो आपको गाली भी सुननी पड़ सकती है।
5- कोई भी मरीज कम से कम 15 दिन तो रखना ही पड़ेगा, यानी कि ��जट 10 लाख हो तभी जाएं।
6- मरीज की कंडीशन कितनी भी अच्छी क्यों न हो, आपको 5 दिन आईसीयू वार्ड में रखना पड़ेगा, ध्यान रहे आईसीयू का एक दिन का खर्च लगभग 60 से 70 हजार रुपए है।
7- आपका मरीज अगर दवा से भी ठीक हो सकता है तब भी ऑपरेशन करवाना ही पड़ेगा।
8 - आपको इस कदर डरा दिया जाएगा, कि आपको ऑपरेशन के अलावा को विकल्प ही नहीं दिखेगा।
9- इतना पैसे खर्च करने के बाद भी आपको नर्सिंग स्टाफ को बार बार बोलना पड़ेगा कि , बीपी, ऑक्सीजन चेक करते रहो।
10- आपका मरीज अगर रिकवर भी हो रहा है तो बेहोशी का इंजेक्शन देकर उसे सीरियस दिखाया जाएगा ताकि आप डिस्चार्ज न करवा सको।
डियर @IRCTCofficial और रेल मंत्रालय @RailMinIndia जवाब दीजिए , बहाने नहीं।
ट्रेन 12560 शिवगंगा एक्सप्रेस (नई दिल्ली → वाराणसी)
अपने तय समय 06:00 बजे से 6 घंटे से ज्यादा लेट चल रही है।
हालत ये है कि अभी तक कानपुर भी नहीं पहुँची, फिर भी रास्ते में इसे रोक-रोक कर दूसरी ट्रेनों को पास दिया जा रहा है।
सवाल साफ है:
जब ट्रेन पहले ही लेट है, तो उसे और पीछे क्यों धकेला जा रहा है?
क्या यात्रियों को मान लेना चाहिए कि ये ट्रेन 5 दिन बाद बनारस पहुँचेगी?
यात्री कोई एहसान नहीं मांग रहे —
समय, प्राथमिकता और जवाबदेही मांग रहे हैं।
IRCTC और रेलवे को स्पष्ट जवाब देना होगा,
घिसे-पिटे बहाने अब स्वीकार्य नहीं।
IRCTC से तत्काल टिकट बुक करना = रेगिस्तान में पानी ढूँढना।
कागजो में नियम है >>
एक आधार कार्ड से 3 से ज़्यादा तत्काल टिकट नहीं।
जमीनी हक़ीक़त ये है कि टिकट तभी मिलेगी जब सिस्टम काम करेगा।
09:45 बजते ही IRCTC का सर्वर घुलने लगता है >
पेज घूमता है , OTP अटकता है,
पेमेंट से पहले “Connection Lost”.
और जैसे ही सारे टिकट बिक जात��� हैं ,
सर्वर अचानक ठीक होकर वापस आ जाता है।
सवाल ये है >>
एजेंटों पर रोक सिर्फ़ आम यात्रियों के लिए है क्या?
क्या एजेंटों का सर्वर अलग चलता है?
क्या रेलवे को ये नहीं दिखता कि डिमांड सप्लाई नहीं, सिस्टम फेल है?
हर रोज़ लाखों लोग परेशान हैं ,
लेकिन देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट सिस्टम के पास
एक ढंग की , भरोसेमंद टिकट बुकिंग व्यवस्था तक नहीं।
सरकार डिमांड-सप्लाई सुधारे न सुधारे ,
कम से कम IRCTC का ऐप औ��� सर्वर तो ठीक कर ले।
📍 वाराणसी के रामनगर ���ें एक फैक्ट्री से 60 लाख रुपए का जहरीला सिरफ पकड़ा गया।
इसकी जड़े कितनी गहरी है आप सोच भी नहीं सकते, अब तक करोड़ों लोग इस सिरफ को पी चुके हैं, भगवान ही मालिक है उनका क्योंकि जांच एजेंसियों ने कसम खा रखी है भारत को कैंसर की राजधानी बनाने की।
यह सिर्फ एक फैक्ट्री का मामला नहीं है—यह पूरे सप्लाई चेन में फैला हुआ संगठित मेडिकल माफिया है।
कौन-कौन अधिकारी इसको छुपा रहे थे?
इतने बड़े स्तर पर सिरफ क�� उत्पादन हो रहा था, तो ड्रग विभाग सो क्यों रहा था?
क्या अस्पतालों के बाहर बैठे एजेंट भी इसी जहरीले सिरफ को धकेल रहे थे?
बाजार में बिक रही सिरफ की MRP, बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की नियमित जांच क्यों नहीं हो रही?
इतने लोगों के शरीर में क्या असर हुआ इसकी कोई हेल्थ स्क्रीनिंग की जाएगी?
देशभर में नकली दवाओं पर ज़ीरो टॉलरेंस की बात होती है, लेकिन क��र्रवाई सिर्फ तब होती है जब मीडिया में मामला उछलता है।
जब तक हर जिले में दवा की सैंपलिंग, लाइसेंस की रद्दीकरण प्रक्रिया और अधिकारियों की जिम्मेदारी फिक्स नहीं होती—ऐसी फैक्ट्रियाँ रोज़ खुलेंगी और लोग रोज़ मरेंगे।
"मोदी का दूसरा प्रहार आ रहा है, धारा 30 समाप्त हो सकती है!"
मोदी ने हिंदुओं के साथ नेहरू द्वारा किए गए विश्वासघात को सुधारने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
क्या आपने "धारा 30" के बारे में सुना है?
क्या आप जानते हैं कि धारा 30 का मतलब क्या है?
'धारा 30' एक ह��ंदू-विरोधी कानून है,
जिसे नेहरू ने अन्यायपूर्ण तरीके से संविधान में शामिल किया था!
जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने का प्रयास किया,
तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा था,
"यह कानून हिंदुओं के साथ विश्वासघात है;
अगर यह कानून संविधान में लाया गया तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा!"
आखिरकार, नेहरू को सरदार पटेल के प्रतिरो��� के सा��ने झुकना पड़ा।
लेकिन दुर्भाग्यवश, इस घटना के कुछ समय बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल का अचानक निधन हो गया...!!
पटेल की मृत्यु के बाद नेहरू ने तुरंत इस कानून को संविधान में शामिल कर दिया!
अब जानिए धारा 30 की विशेषताएँ 👇
इस कानून के अनुसार,
हिंदू अपने 'सनातन धर्म' की शिक्षा स्कूलों और कॉलेजों में न तो दे सकते हैं और न ही ले सकते हैं!
क्या यह अजीब नहीं लगता?
"धारा 30" के तहत, मुसलमान और ईसाई अपने धर्म की शिक्षा देने के लिए इस्लामिक (मदरसा) और ईसाई (कॉन्वेंट) स्कूल चला सकते हैं,
लेकिन हिंदू अपने गुरुकुल या वैदिक शिक्षा पर आधारित पारंपरिक स्कूल नहीं चला सकते,
जो देश के मुख्य धर्म सनातन या हिंदू धर्म और संस्कृति को संरक्षित कर सके।
यदि वे ऐसा करते हैं,
तो उन्हें इस कानून के तहत दंडित किया जाएगा!
साथ ही, मस्जिदों और चर्चों में दान से जमा सारा पैसा और सोना केवल उन्हीं का ��ोता है।
वे उस संपत्ति का उपयोग अपने अनुयायियों को बढ़ावा देने और अशिक्षित या कम शिक्षित हिंदुओं को धन के लालच में धर्मांतरण के लिए करते हैं।
लेकिन हिंदू मंदिरों में जमा धन और सोने पर सरकार का नियंत्रण होता है!
नेहरू ने यह सब उस कुटिल गांधी के साथ मिलकर किया ताकि मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदुओं के धर्मांतरण में सुविधा हो सके।
"धारा 30" हिंदुओं के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया विश्वासघात है!
��ुस्लिम बच्चों के लिए अपनी धार्मिक पुस्तक,
कुरान पढ़ना और सीखना अनिवार्य है,
और यही नियम ईसाइयों पर लागू होता है! लेकिन हमारे हिंदुओं के बारे में क्या? हमें अपने एकमात्र धर्म,
जो इस प्राचीन विज्ञान पर आधारित है,
की सही समझ भी नहीं है!
आइए 👇
हम सभी सनातन धर्म की रक्षा करें। इस लेख को पढ़ें, समझें और नेहरू और कुटिल गांधी द्वारा किए गए इस अन्याय के बारे में हर जगह जागरूकता फैलाएँ।
क्योंकि धारा 30 के कारण,
हम अपने स्कूलों और कॉलेजों में भगवद गीता नहीं पढ़ा सकते हैं,
जबकि ��ह हमारा सनातन धर्म देश है।
यदि आप इस लेख को पढ़कर इसे पसंद करते हैं और सनातन धर्म में विश्वास और स्नेह रखते हैं,
तो कृपया इसे जितना संभव हो सके उतना साझा करें!
जय भारत 🇮🇳
यात्री: "मैं बहुत ही ग़रीब परिवार से हूँ और आपात स्थिति में टिकट खरीदने के लिए मुझे क़र्ज़ लेना पड़ा, लेकिन अब @flyspicejet न तो रिफ़ंड दे रही है और न ही टिकट उपलब्ध करा रही है।
मुझे ऑपरेशन के लिए बिहार जाना है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ।"
सच कहूं तो –
हमारे देश में चाहे किराया बढ़ोत्तरी का मामला हो या फिर अपने फायदे के लिए किसी रूट पर ट्रिप बढ़ाने तो किसी पर फ्लाइट रद्द करने का.... ये एयरलाइंस वाले बेलगाम हो चुके हैं। अब सरकार को चाहिए कि इनके लिए मजबूत नियम व कानून बनाए।
~ साभार: @NCIBHQ
इंडिगो एयरलाइंस ने जो किया है !
वहीं भारतीय टेलीकॉम कंपनी कर सकती है ?
jio 28 दिन का प्लान :- 349
BSNL 30 दिन का प्लान :- 325
Airtel :- 979
jio :-1199
BSNL :- 599
84 दिन 3 GB डेटा प्रति दिन
मार्किट में हिस्सेदारी :-
Airtel :- 33.69%
jio :- 40.60%
BSNL :- 7.80%
जिस दिन BSNL खत्म उसी दिन मार्किट के बाप दोनो कम्पनी रह जाएगी ।
क्योंकि Vi अंतिम सांस ले रही है !
क्या होगा :- प्लान म��हगे होंगे अगर सरकार ने दबाव डाला तो देश का सिस्टम ठप हो जाएगा ।
एयरलाइंस से केवल 10% लोगो पर फर्क पड़ा लेकिन टेलीकॉम से 99.9% लोगों को फर्क पड़ेगा ।
बस अभी अलार्म नहीं बजा है , इसलिए हम गहरी नींद में सो रहे है !
संसद में पैकेज्ड फूड माफिया की पोल खुलते ही तस्वीर पूरी तरह साफ है—भारत की पैक्ड फूड इंडस्ट्री खुलेआम जनता को गुमराह कर रही है, और सरकार-रेगुलेटरी एजेंसियां आँखें मूँदकर बैठ�� हैं।
• Taller, Stronger, Sharper वाली चॉकलेट ड्रिंक में चीनी + एडिटिव्स = बच्चों का मोटापा, डायबिटीज, लिवर डैमेज।
• दाने-दाने में केसर-इलायची सिर्फ पैकेट का झांसा—असल में सिंथेटिक फ्लेवर।
• इस noodles में है आटा असलियत : मैदा + MSG + कलर्स।
हर दूसरी चीज में खतरनाक कलर, ट्रांस-फैट, HFCS, सिंथेटिक केमिकल, सूडान डाई—जो कैंसर, लिवर फेल्योर और हार्मोनल गड़बड़ी का रास्ता खोलते हैं।
श्रावणी मेले में पेड़े में 15% मिट्टी मिली और सच यह है कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा की पूरी लाश सामने पड़ी है।
मिठाई मिलावटी।
पनीर मिलावटी।
खोया मिलावटी।
दूध में डिटर्जेंट।
मसालों में रंग और केमिकल।
तेल में रिफाइंड की जगह जहरीला मिश्रण।
यहां तक कि बच्चों की चॉकलेट और टॉफियों तक में हानिकारक रसायन।
क्यों?
क्योंकि भारत में मिलावटखोरों को न सख्त सजा मिलती है, न जेल में ठूस दिया जाता है, न लाइसेंस रद्द होते हैं।
हर बार वही कहानी — छापा , नमूना , रिपोर्ट… और फिर पैसे देकर बच निकलना।
सिस्टम इतना बीमार ��ै कि
• जिसे खाने का सामान शुद्ध रखना था, वही घोर लापरवाही करता है।
• FSSAI की टेस्टिंग लैब्स कम , स्टाफ कम , केसों का निपटारा सालों तक लंबित।
• जिन राज्यों में मिलावट सबसे ज्यादा है, वहीं पर कार्रवाई सबसे कम।
• उपभोक्ता को न जानकारी, न इंसाफ, न सुरक्षा।
जब तक मिलावटखोरों को
कड़ी जेल ,
कड़का जुर्माना ,
लाइसेंस की आजीवन रद्दी ,
और फास्ट-ट्रैक में 90 दिन में फैसला —
ये देश इसी जहरीले खाने पर चलने के लिए मजबूर रहेगा।
यही कड़वा सच है।
हमारे मारवाड़ में बरसात सबसे कम होती है…!!
और 80% मारवाड़ में ट्यूबवेल से खेती करने लायक़ मीठा पानी भी नहीं है…
फिर भी आपको सुदूर मारवाड़ की ढाणियों में आज भी ऐसे लोग मिल जाएँगे….
जो खाने पीने की कोई भी चीज बाज़ार से नहीं ख़रीदते…
धान से लेकर सब्ज़ियाँ तक खेतों मे उगा लेते हैं, और भंडारण कर��े साल भर चला लेते हैं…
गाय के घी से लेकर कच्ची घाणी के शुद्ध तेल का इस्तेमाल साल भर करते हैं…!!
हैडफ़ोन लगा लीजिए- वॉल्यूम को थोड़ा बढ़ा लीजिए
केवट और राजा राम का अद्भुत संवाद भजन के ज़रिए
सुनकर तो देखिए, आपका दिन न बन जाये तो कहना
जय जय श्री राम !!