भीड़ का विज्ञान....
सत्य की तलाश भीड़ के साथ रहकर नहीं की जा सकती... ���्योंकि अगर भीड़ सही होती तो दुनिया स्वर्ग से सुंदर होती....
इस भीड़ तंत्र ने दुनिया को नरक बना रखा है....
"ऐसा भोजन खाने में कोई बुद्धिमत्ता नहीं है जिसे उपभोग करने से पहले गर्मी द्वारा बदला (पकाया) जा��ा पड़े।"
"प्रकृति हमें भोजन तैयार रूप में प्रदान करती है।"
देश की कई जगहों पर लाखों लोग अप्राकृतिक मौसम का सामना कर रहे है.
क्या आप तैयार हो ??
और हा....
कोई ये गलत फहमी में ना रहे के यहां कुछ ��हीं होगा.
कही पे कुछ भी हो सकता है.
@ajitanjum इनको सब पता है....
लोगों को सोचना और समझना चाहिए.
अगर ऐसा होता है...ऐसा कहने के बाद...ऐसा होता है...तो ऐसा क्यों होता है....
उनकी जानकारी का स्रोत क्या है ?
@iluminatibot इनको सब पता है....
लोगों को सोचना और समझना चाहिए.
अगर ऐसा होता है...ऐसा कहने के बाद...ऐसा होता है...तो ऐसा क्यों होता है....
उनकी जानकारी का स्रोत क्या है ?
महान क्रांतिकारी भगतसिंह जी की बहन प्रकाश कौर जी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि....
"जब मैं उनसे आखिरी बार जेल में मिलने गई, तब उन्होंने कहा कि मैं तो गोरों से लड़ रहा हूँ, पर तुम सबको उन कालों से लड़ना है, जो देश आज़ाद होने के बाद भ्रष्टाचार करेंगे"
डोली चाय वाला
पढ़ा-लिखा होने के कारण ही लोग डोज लेने के प्रति जागरूक दिखे, तो आपको तय करना है कि क्या पढ़ा-लिखा होना हमारे लिए फायदेमंद रहा या नुकसानदेह ?
वैसे मेरी समझ से पढ़ाई लिखाई का सिस्टम इस दुनिया को चलाने वालों ने अपनी सुविधा के लिए बनाया है न कि लोगों की भलाई के लिए.