वर्षों से असंगठित हिंदू समाज को संगठित करने का प्रयास किया, अपना खून पसीना लगाया, घर परिवार छोड़ा, नौकरी छोड़ी, सारा जीवन सिर्फ इसी उद्देश्य की पूर्ति में लगाया कि समाज कैसे संगठित हो, और आज जब हिंदू समाज में संगठन का भाव उत्पन्न हुआ है, आज जब हिंदू समाज की स्थिति अच्छी होने लगी है, तो उसी के कुछ लोग आज समाज को तोड़ने की कोशिश में लग गए और उन्हीं लोगों को गाली देने लग गए जिन लोगों की वजह से आज ये संपूर्ण हिंदू समाज बोलने के काबिल हुआ है, इसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है या लोगों में ये भाव उत्पन्न हुआ है कि हाँ हम एक शक्ति है।
चल रहे हैं लंबे-लंबे भाषणबाजी, बड़ी-बड़ी वीडियोस बन रही हैं, बड़े-बड़े लेख लिखे जा रहे हैं।आज जो तुम बोलने का आनंद उठा रहे हो, इसके लायक़ कैसे बने हो सोचना चाहिए।
और जिसने पाल पोस कर बड़ा किया अगर कुछ बोल भी दे तो भी बाप तो वही रहेगा।