छपरा डूबा, जिम्मेदार कौन? 5 साल पहले शुरू हुआ था समाधान का रास्ता, पर फाइलों में दब गया “यूटिलिटी कॉरिडोर;
इन तस्वीरों को देखकर किसी को भी अंदाजा हो जाएगा कि आज छपरा मुख्यालय शहर किस बदहाल स्थिति में है। सड़कें नालों में बदल चुकी हैं, घरों के सामने पानी भरा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। लेकिन सवाल यह है कि जब इस समस्या का समाधान पांच साल पहले ही सोचा जा चुका था, तो आज भी छपरा इस हालत में क्यों है।
साल 2020 में छपरा के सांसद माननीय @RajivPratapRudy जी ने एक दूरदर्शी योजना की पहल की थी -बिहार का पहला “यूटिलिटी कॉरिडोर प्रोजेक्ट”। इस परियोजना का उद्देश्य था कि शहर की बिजली, पानी, गैस, इंटरनेट और अन्य आवश्यक सेवाओं की लाइनों को एक ही भूमिगत कॉरिडोर में डाला जाए ताकि बार-बार सड़क खुदाई, अव्यवस्थित वायरिंग और जलजमाव जैसी समस्याओं से स्थायी समाधान मिल सके। यह योजना न केवल छपरा को एक आधुनिक शहर बनाने की दिशा में कदम था, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक मॉडल साबित हो सकती थी।
लेकिन दुख की बात यह है कि पांच साल बीत जाने के बाद भी इस परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। फाइलें दफ्तरों में घूमती रहीं, और आज वही शहर जलजमाव और अव्यवस्था से त्रस्त है। अगर यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू हो गया होता, तो शायद आज छपरा की गलियां तालाब में नहीं बदलतीं और नागरिकों को इस कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता।
अब सवाल उठता है -
कौन है इस देरी के लिए जिम्मेदार?
क्यों प्रशासन और राज्य सरकार ने जनता की सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दी?
कब तक छपरा वासी इस तरह की अनदेखी झेलते रहेंगे?
अब समय है कार्रवाई का।
प्रशासन से जनता की यह स्पष्ट मांग है कि “यूटिलिटी कॉरिडोर” परियोजना को तत्काल स्वीकृति दी जाए और कार्यान्वयन की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। छपरा को अब वादों की नहीं, वास्तविक काम और जवाबदेही की आवश्यकता है।
@Saran_dm, @SIGRIWALBJP, @NitishKumar, @BiharCabinet, @narendramodi, @officecmbihar, @PMOIndia
#SaranDivisionDemands
We Should Start Calling Actors As 'Entertainers' And Our Army & Police As 'Heroes' for Our Next Generation To Know The Actual Meaning Of Real Heroes !!!