आवश्यक जानकारी :~
—————————
यह चार नंबर हर भारतीय के फोन में सेव होना चाहिए।
• 1930 : कोई आपको मैसेज/ व्हाट्सएप या सोशल साइट्स पर गाली दे या कॉल पर धमकी दे या कोई ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो साइबर क्राइम के हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करके रिपोर्ट दर्ज कराए।
• 1073 : अगर किसी का रोड पर एक्सीडेंट हो जाए तो रोड एक्सीडेंट इमरजेंसी सर्विस 1073 तुरंत कॉल करें।
• 1915 : अगर किसी दुकानदार, ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स, कॉलेज अथवा स्कूल से वस्तुओं के बढ़ी हुई कीमत, गुणवत्ता, गारंटी व वारंटी या अन्य कोई भी समस्या हो तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर तुरंत कॉल करके रिपोर्ट दर्ज कराए।
• 1064 : अगर कोई आईएएस, पीसीएस, पुलिस या अन्य कोई भी सरकारी अधिकारी/ सरकारी कर्मचारी आपसे रिश्वत मांगे तो एंटी करप्शन ब्यूरो के हेल्पलाइन नंबर 1064 पर कॉल करें, तुरंत कार्यवाही होगी।
"Embark on a journey of enchantment! 🏝️✨
Discover the breathtaking beauty of the Indian Islands – a paradise waiting to be explored. From serene beaches to vibrant culture, there's something for every adventurer.
#ExploreIndianIslands#Lakshdweep
इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें : जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी :-
◾जब बाल झड़ रहे हों तब...
(1). नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।
(2). बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा।
(3). दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।
◾कफ और सर्दी जुकाम हो जाये तो...
सर्दी जुकाम, कफ आए दिन की समस्या है।
आप ये घरेलू उपाय आजमाकर इनसे बचे रह सकते हैं।
(1). नाक बह रही हो तो काली मिर्च, अदरक, तुलसी को शहद में मिलाकर दिन में तीन बार लें। नाक बहना रुक जाएगा।
(2). गले में खराश या ड्राई कफ होने पर अदरक के पेस्ट में गुड़ और घी मिलाकर खाएं। आराम मिलेगा।
(3). नहाते समय शरीर पर नमक रगड़ने से भी जुकाम या नाक बहना बंद हो जाता है।
(4). तुलसी के साथ शहद हर दो घंटे में खाएं। कफ से छुटकारा मिलेगा।
◾शरीर एवं सांस से दुर्गंध आ रही हो तो...
यह परेशानी भी आम है।
कई बार तो हमें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ जाता है।
(1). नहाने से पहले शरीर पर बेसन और दही का पेस्ट लगाएं। इससे त्वचा साफ हो जाती है और बंद रोम छिद्र भी खुल जाते हैं।
(2). गाजर का जूस रोज पिएं। तन की दुर्गध दूर भगाने में यह कारगर है।
(3). पान के पत्ते और आंवला को बराबर मात्रा में पीसे। नहाने के पहले इसका पेस्ट लगाएं। फायदा होगा।
(4). सांस की बदबू दूर करने के लिए रोज तुलसी के पत्ते चबाएं।
(5). इलाइची और लौंग चूसने से भी सांस की बदबू से निजात मिलता है।
उच्च रक्त चाप से परेशान हों तब...
(1)- कुछ दिनों तक लगातार आधा चम्मच मैथी दाना का पॉउड़र पानी के साथ लेने से उच्च रक्त चाप में लाभ होता है।
(2)- तुलसी के पाँच पत्ते और नीम के दो पत्ते कुछ दिनों तक लेने से उच्च रक्त चाप मे लाभ होता है।
(3)- तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से उच्चरक्त चाप में लाभ होता है।
(4)- दो कली लहसुन की खाली पेट लेने से उच्च रक्त चाप में फायदा होता है।
(5)- लौकी का एक कप रस सुबह खाली पेट लेने से उच्च रक्त चाप कम होने में फायदा करता है।
(6)- प्रतिदिन एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस लेना सभी रोगों में लाभकारी होता है।
पैर में मोच आ जाये तो...*
(1)- आक या पान का पत्ता या आम का पत्ते को चिकना कर नमक लगा कर उस स्थान पर बांधने से काफी लाभ होता है।
(2)- चोट लगने पर नमक में काले तिल, सूखा नारियल और हल्दी मिला कर पीस कर गरम कर चोट वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है।
घुटनों के दर्द के कुछ और बेहतरीन घरेलू उपाय...*
(1)- सुबह खाली पेट तीन चार अखरोट की गिरियां निकाल कर कुछ दिनों तक खाना चाहिए। इसके नियंत्रित सेवन से घुटनों के दर्द में आराम मिलता है। नारियल की गिरी भी खाई जा सकती है। इससे घुटनों के दर्द में राहत मिलती है।
अस्थमा की समस्या से जूझ रहे हो तो...*
(1)- तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी काली मिर्च डालकर खाने के साथ देने से दमा नियंत्रण में रहता है।
(2)- गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी दमे को नियंत्रित करने में राहत मिलती है।
*किडनी में पथरी की समस्या हो तो...*
तीन हल्की कच्ची भिंड़ी को पतली पतली लम्बी लम्बी काट लें। कांच के बर्तन में दो लीटर पानी में कटी हुई भिंडी डाल कर रात भर के लिए रख दें। सुबह भिंडी को उसी पानी में निचोड़ कर भिंडी को निकाल लें। ये सारा पानी दो घंटों के अन्दर अन्दर पी लें। इससे किडनी की पथरी से छुटकारा मिलता है।
◾पेट में वायु की अधिकता हो तो...
(1)- ऐसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए भोजन के बाद 3-4 मोटी इलायची के दाने चबा कर ऊपर से नींबू पानी पीने से पेट हल्का होता है।
(2)- सुबह-शाम 1/4 चम्मच त्रिफला का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट नर्म होता है।
(3)- अजवायन और काला नमक को समान मात्रा में मिला कर गर्म पानी से पीने से पेट का अफारा ठीक होता है।
नाभि के अपने स्थान से खिसक जाने पर...
(1)- मरीज़ को सीधा लिटाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आंवले का आटा बना कर उसमें अदरक का रस मिलाकर बांध दें और दो घंटों के लिए सीधा ही लेटे रहने दें। दो बार ऐसा करने से नाभि अपने स्थान पर आ जायेगी। दर्द और दस्त जैसे कष्ट भी दूर होंगे।
(2)- ऐसे समय में मरीज़ को मूंग की दाल वाली खिचड़ी खाने में देनी चाहिए।
(3)- अदरक और हींग का सेवन भी फायदा करता है।
दस्त की समस्या से परेशान हों तो...
(1)- खाना खाने के बाद एक कप लस्सी में एक चुटकी भुना ज़ीरा और काला नमक ड़ाल कर पीएं। दस्त में आराम आयेगा।
(2)- अदरक का रस नाभि के आस-पास लगाने से दस्त में आराम मिलता है।
इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें : जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी :-
1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
2- कुल 13 अधारणीय वेग हैं
3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है
4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है।
10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
13- दूध(चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क हो हानि पहुँचती है।
17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।
18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।
23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।
24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।
27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी,
सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औषधियां हैं।
28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
31- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएंआदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
35- भोजन पकने के 48 मिनट के
अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोषकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।।
36- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोषकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
37- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।
38- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड , समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
39- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
40- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।
41- सरसों, तिल,मूंगफली , सुरजमुखी या नारियल का कच्ची घानी का तेल और देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और
वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
42- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
43- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
44- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
45- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।
46- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।
47-बर्तन मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए।
गांजा का चमत्कार...
1914 का वर्ष है प्रथम विश्व युद्ध के वर्ष और अमेरिकी डॉलर के लिए "भांग" की खेती करने वाले किसान इसे ध्यान में रखें और पढ़ते रहें। औद्योगिक भांग सिर्फ एक कृषि संयंत्र नहीं है यह तेल और डॉलर के खिलाफ मारk है गांजा कैसे प्रतिबंधित किया गया था?
1. भांग का एक टुकड़ा खेत 25 एकड़ जंगल के बराबर ऑक्सीजन पैदा करता है।
2. फिर से, एक एकड़ गांजा 4 एकड़ पेड़ों के बराबर कागज़ का उत्पादन कर सकता है।
3. जहां भांग को 8 बार कागज में बदला जा सकता है, वहीं लकड़ी को 3 बार कागज में बदला जा सकता है।
4. गांजा 4 महीने में उगता है, पेड़ 20-50 साल में।
5. कैनबिस विकिरण का एक वास्तविक पकड़ने वाला है।
6. भांग को दुनिया में कहीं भी उगाया जा सकता है और इसके लिए बहुत कम पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा, चूंकि इसे कीड़ों से बचाया जा सकता है, इसलिए इसे कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती है।
7. यदि भांग का कपड़ा व्यापक हो जाता है, तो कीटनाशक उद्योग पूरी तरह से गायब हो सकता है।
8. पहली जींस भांग से बनी थी; यहां तक कि "कानवास" शब्द भी भांग उत्पादों को दिया गया नाम है।
गांजा रस्सियों, डोरियों, बैगों, जूतों, टोपियों के निर्माण के लिए भी एक आदर्श पौधा है।
9. भांग, एड्स और कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी और विकिरण के प्रभाव को कम करना; यह गठिया, हृदय, मिर्गी, दमा, पेट, अनिद्रा, मनोविज्ञान और रीढ़ की बीमारियों जैसे कम से कम 250 रोगों में प्रयोग किया जाता है।
10. भांग के बीज का प्रोटीन मूल्य बहुत अधिक होता है और इसमें दो फैटी एसिड प्रकृति में और कहीं नहीं पाए जाते हैं।
11. सोयाबीन की तुलना में गांजा का उत्पादन और भी सस्ता है।
12. जिन जानवरों को भांग खिलाया जाता है उन्हें हार्मोनल सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती है।
13. सभी प्लास्टिक उत्पादों को भांग से बनाया जा सकता है, और भांग प्लास्टिक प्रकृति में वापस आना बहुत आसान है।
14. अगर कार की बॉडी गांजा की बनी हो तो यह स्टील से 10 गुना ज्यादा मजबूत होगी।
15. इसका उपयोग इमारतों के इन्सुलेशन के लिए भी किया जा सकता है; यह टिकाऊ, सस्ता और लचीला है।
16. गांजा साबुन और सौंदर्य प्रसाधन पानी को प्रदूषित नहीं करते हैं; इसलिए यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है।
अमेरिका में 18वीं शताब्दी में इसका उत्पादन अनिवार्य था और गैर-उत्पादक किसानों को बंद कर दिया गया था। लेकिन अब स्थिति इसके उलट है. कहां से? -डब्ल्यू। आर. हर्स्ट 1900 के दशक में अमेरिका में समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और मीडिया के मालिक थे। उनके पास जंगल थे और कागज़ का उत्पादन करते थे। अगर कागज भांग से बना होता, तो उसे लाखों का नुकसान हो सकता था। रॉकफेलर विश्व के सबसे धनी व्यक्ति थे। एक तेल कंपनी थी। बेशक, जैव ईंधन, भांग का तेल, उसका सबसे बड़ा दुश्मन था। मेलन ड्यूपॉन्ट में एक प्रमुख शेयरधारक था और उसके पास पेट्रोलियम उत्पादों से प्लास्टिक के उत्पादन के लिए एक पेटेंट था। और भांग उद्योग अपने बाजार को खतरे में डाल रहा था। बाद में मेलॉन अमेरिकी राष्ट्रपति हूवर के कोषागार के सचिव बने। हमने जिन बड़े नामों के बारे में बात की, उन्होंने उनकी बैठकों में तय किया कि भांग दुश्मN है। और उन्होंने उसका सफाया कर दिया। मीडिया के माध्यम से, उन्होंने मारिजुआना शब्द के साथ-साथ लोगों के दिमाग में एक Zहरीली दवा के रूप में मारिजुआना का इंजेक्शन लगाया है। भांग की दवाओं को बाजार से वापस ले लिया गया है और उनकी जगह आज इस्तेमाल होने वाली रासायनिक दवाओं ने ले ली है।
कागज उत्पादन के लिए जंगलों को काटा जा रहा है।
कीटनाशक और कैंसर का Nशा बढ़ रहा है। और फिर हमने अपनी दुनिया को प्लास्टिक कचरे, खतरनाक कचरे से भर दिया साभार...
पोस्ट स्वास्थ्य जनहित स्वास्थ्य जानकारी हेतु रिट्वीट शेयर फालो जरूर करें धन्यवाद 😇💌
माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोचक जानकारी :-
लक्षण:-
इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर के आधे भाग में तेज दर्द होता है तथा सिर में दर्द होने के साथ-साथ रोगी को उल्टी होने की इच्छा भी होती है। इसके अलावा रोगी को चिड़चडाहट तथा दृष्टिदोष भी उत्पन्न होने लगता है। इस रोग का प्रभाव अधिकतर निश्चित समय पर होता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।
माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का कारण-
1. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग रोगी व्यक्ति को दूसरे रोगों के फलस्वरूप हो जाता है जैसे- नजला, जुकाम, शरीर के अन्य अंग रोग ग्रस्त होना, पुरानी कब्ज आदि।
2. स्त्रियों को यदि मासिकधर्म में कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसके कारण स्त्रियों को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
3. आंखों में दृष्टिदोष तथा अन्य रोग होने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
4. यकृत (जिगर) में किसी प्रकार की खराबी तथा शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण व्यक्ति को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
5. असंतुलित भोजन का अधिक उपयोग करने के कारण रोगी को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो सकता है।
6. अधिक श्रम-विश्राम करने, शारीरिक तथा मानसिक तनाव अधिक हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्तियों को हो सकता है।
7. औषधियों का अधिक उपयोग करने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
माइग्रेन रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
1. इस रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को रसाहार (चुकन्दर, ककड़ी, पत्तागोभी, गाजर का रस तथा नारियल पानी) आदि का सेवन भोजन में करना चाहिए और इसके साथ-साथ उपवास रखना चाहिए।
माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में फल, सलाद तथा अंकुरित भोजन करना चाहिए और इसके बाद सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए।
3. रोगी व्यक्ति को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को भोजन संबन्धित गलत आदतों जैसे- रात के समय में देर से भोजन करना तथा समय पर भोजन न करना आदि को छोड़ देना चाहिए।
4. रोगी व्यक्ति को मसालेदार भोजन का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा इसके अलावा बासी, डिब्बाबंद तथा मिठाइयों आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
5. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग में रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ सुबह के समय में चाटना चाहिए तथा इसके अलावा दूब का रस भी सुबह के समय में चाट सकते हैं। जिसके फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
6. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) का इलाज करने के लिए पीपल के कोमल पत्तों का रस रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम सेवन करने के लिए देने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
7. माइग्रेन रोग का इलाज करने के लिए रोगी व्यक्ति के माथे पर पत्ता गोभी का पत्ता प्रतिदिन बांधना चाहिए, जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
8. प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाप लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
9. माइग्रेन रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकर के स्नान भी हैं जिन्हे प्रतिदिन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है। ये स्नान इस प्रकार हैं-रीढ़स्नान, कुंजल, मेहनस्नान तथा गर्मपाद स्नान।
10. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग का इलाज करने के लिए प्रतिदिन ध्यान, शवासन, योगनिद्रा, प्राणायाम या फिर योगासन क्रिया करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:
जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी..... 🙏
1. बीपी: 120/80
2. पल्स: 70 - 100
3. तापमान: 36.8 - 37
4. सांस : 12-16
5. हीमोग्लोबिन: पुरुष -13.50-18
स्त्री- 11.50 - 16
6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200
7. पोटेशियम: 3.50 - 5
8. सोडियम: 135 - 145
9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220
10. शरीर में खून की मात्रा: पीसीवी 30-40%
11. शुगर लेवल: बच्चों के लिए (70-120) वयस्क: 80- 130
12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम
13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC: 4000 - 11000
14. प्लेटलेट्स: 1,50,000 - 4,00,000
15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC: 4.50 - 6 मिलियन.
16. कैल्शियम: 8.6 -10.3 मिलीग्राम/डीएल
17. विटामिन D3: 20 - 50 एनजी/एमएल.
18. विटामिन B12: 200 - 900 पीजी/एमएल.
वरिष्ठ यानि 40/ 50/ 60 वर्ष वालों के लिए विशेष टिप्स:
1- पहला सुझाव:
प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 3 लीटर न्यूनतम प्रति दिन.
2- दूसरा सुझाव:
शरीर से अधिक से अधिक काम ले, शरीर की calories burn होती रहनी चाहिए, भले ही केवल पैदल चलकर, या तैराकी या किसी भी प्रकार के खेल से।
3-तीसरा सुझाव:
खाना कम करो...अधिक भोजन की लालसा को छोड़ दें... क्योंकि यह कभी अच्छा स्वास्थ्य नहीं देता अपने आप को वंचित न करें, लेकिन मात्रा कम करें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आधारित खाद्य पदार्थों का अधिक प्रयोग करें।
4- चौथा सुझाव:
जितना हो सके वाहन का प्रयोग तब तक न करें जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो. आप कहीं जाते हैं किराना लेने, किसी से मिलने या किसी काम के लिए अपने पैरों पर चलने की कोशिश करें। लिफ्ट, एस्केलेटर का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियां चढ़ें।
5- पांचवां सुझाव* क्रोध छोड़ो, चिंता छोड़ो,चीजों को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करो. विक्षोभ की स्थितियों में स्वयं को शामिल न करें, वे सभी स्वास्थ्य को कम करते हैं और आत्मा के वैभव को छीन लेते हैं। सकारात्मक लोगों से बात करें और उनकी बात सुनें।
6- छठा सुझाव
अपने आस-पास के लोगो से खूब मिलें जुलें हंसें बोलें!हँसे खुश रहे...... Positive रहे हर situation में खुद को mentally strong बनाएँ
7-सातवां सुझाव
अपने आप के लिए किसी तरह का अफ़सोस महसूस न करें, न ही किसी ऐसी चीज़ पर जिसे आप हासिल नहीं कर सके, और न ही ऐसी किसी चीज़ पर जिसे आप अपना नहीं सकते।
इसे अनदेखा करें और इसे भूल जाएं।
8- आठवां सुझाव पैसा, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सुन्दरता, जाति की ठसक और प्रभाव;
ये सभी चीजें हैं जो अहंकार से भर देती हैं. विनम्रता वह है जो लोगों को प्यारसे आपके करीब लाती है।
9- नौवां सुझाव
अगर आपके बाल सफेद हो गए हैं, तो इसका मतलब जीवन का अंत नहीं है। यह एक बेहतर जीवन की शुरुआत हो चुकी है। आशावादी बनो, याद के साथ जियो, यात्रा करो, आनंद लो। यादें बनाओ!
10- दसवां सुझाव
अपने से छोटों से भी प्रेम, सहानुभूति ओर अपनेपन से मिलें! कोई व्यंग्यात्मक बात न कहें! चेहरे पर मुस्कुराहट बनाकर रखें !
अतीत में आप चाहे कितने ही बड़े पद पर रहे हों वर्तमान में उसे भूल जाये और सबसे मिलजुलकर रहें!
स्वस्थ रहो, मस्त रहो
खूब हँसें और हँसाये
क्योंकि
हँसी फ़्री का हेल्थ टॉनिक है , इसका भरपूर उपयोग
छोटी छोटी बातों का करो उपयोग रहो निरोगः
🙏
पानी पीने को लेकर काफ़ी विरोधाभास होता है।
कितना पियें, कब पियें, कैसे पियें, खाने से पहले पियें या खाने के बाद पियें।
आइये इस बार बात करें।
1) सामान्य व्यक्ति को 35 ml per body weight पानी की ज़रूरत होती है। अर्थात् अगर आपका वजन 60 kg है तो क़रीब 2100 ml पानी। ये लेकिन strict amount नहीं है। आपके दिनचर्या के हिसाब से ये थोड़ा कम या ज़्यादा हो सकता है।
लेकिन अगर आपको किडनी की कोई बीमारी है तो डॉ के सलाह के अनुसार ही पानी पियें।
प्यास लगे तो पानी पी लीजिये। प्यास लगने पर भी आलस से बैठे मत रहें।
2) लेट के पानी कभी ना पियें। खड़े हो कर या बैठ कर पानी पीने से कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता।
3) खाने के कुछ देर पहले भी पानी पीना चाहिये हैं और खाने के कुछ देर बाद भी। दोनों अच्छा है।
4) सवेरे हल्का गर्म पानी पीना सामान्यतः अच्छा माना जाता है।
5) पानी उबाल कर और फिर ठंडा कर पीना काफ़ी बेहतर और सुरक्षित तरीक़ा है।
6) प्लास्टिक के बॉटल में पानी पीने से कहा जाता है कि इससे कैंसर का ख़तरा है। लेकिन इस बात की कोई प्रामाणिकता नहीं है। आप जिस bottle से भी पानी पीते हैं उसे रोज़ साफ़ करना लेकिन काफ़ी ज़रूरी है।
7) आपके Urine का रंग आपके शरीर के hydration status बताने का काफ़ी अच्छा indicator है। इसका चार्ट नीचे दिया गया है।
8) Alkaline water, hydrogen water इत्यादि marketing के तरीक़े हैं जो सिर्फ़ आपके पैसे की बर्बादी है।