निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
एक पत्रकार, इस देश की एक बेटी को थाने ले जाकर पीटा गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि वह मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही थी।
4PM की पत्रकार शाहीन जो कह रही है, यह सिर्फ पुलिस की ज्यादती नहीं, सत्ता के डर का सबूत है।
क्या अब पत्रकारिता की कीमत पुलिस की लाठियां तय करेंगी..?
सिर पर ‘सत्ता-सजातीय’ हाथ है
इसीलिए इनकी मूंछों पर ताव है
ऐस लोगों से क्या होना इंसाफ़ है
पर अब ये कुछ दिनों की बात है
क्योंकि दस्तक दे रहा बदलाव है
हम निलंबन की माँग नहीं करेंगे!
बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं? पटना में आधी रात शराब के नशे में युवक ने पॉलिटेक्निक छात्रा को उसके पिता के सामने ही कथित तौर पर अगवा करने की कोशिश की। समय रहते हस्तक्षेप होने से बड़ी घटना टल गई।
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