कन्वर्शन सांस्कृतिक हिंसा है.किसी दूसरे धर्म,संस्कृति को नष्ट कर उस सभ्यता की हत्या की कोशिश.आरक्षण देश के भविष्य से राजनैतिक विश्वासघात.
दोनो दूषित मानसिकता है
माननीय मुख्यमंत्री जी -
मेरे मन में एक आशंका है,
वाराणसी से लेकर दिल्ली तक ढेरों मराठी रहते हैं।
कल को लोग उन्हें भोजपुरी, बुंदेलखंडी, हरियाणवी, मारवाड़ी या गुजराती सीखने पर प्रेशर डालने लगे तो कैसा लगेगा ?
हम “एक भारतीय, श्रेष्ठ भारतीय” बनकर रहते हैं तो कितना अच्छा लगता है।
पहली बार जंतर-मंतर पर ऐसा आंदोलन हो रहा है, जिसका समर्थन कोई पार्टी नहीं कर रही है।
ये आंदोलन इस देश की सभी राजनीतिक दलों की पारंपरिक दोगली राजनीति के खिलाफ है और ये इस राजनीति के अंत की शुरुआत भी है।
आरक्षण सुधार आंदोलन के लिए बड़ी संख्या में जंतर मंतर पर जुटे आंदोलनकारी
कैसा है माहौल? क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग? पुलिस ने क्यों लगाए बैरिकेड्स?
@Keshavmalan93 ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं, पूरी ग्राउंड रिपोर्ट जल्द आ रही है OpIndia के सभी प्लेटफॉर्म्स पर
बधाई हो सवर्णो आपके संघर्ष की जीत हुई ✊
RHA संयोजक ठाकुर शिवम् सिंह व हर्ष दुबे को जंतर मंतर पर बैठने की मिली परमिशन
मंच भी लगेगा और टेंट भी लगेगा
बिना पुलिस के दबाव में आए आप जंतर-मंतर पर जनसैलाब लाए हो, पुलिस प्रशासन को भी झुकना पड़ा आपकी ताकत के सामने 🔥
#21AugReservationHataoAndolan
वाह @BJP4India सरकार! ये नए पैंतरे तिलचट्टों के लिए तो नहीं आज़माए थे! उनको तो दामाद बनाए घूम रहे थे! आज हमारे लिए बैरिकेड्स? याद रखना @DelhiPolice सारे बैरिकेड्स धरे रह जाएँगे, ये दोगलापन त्यागो, लोगों को स्टेज तक पहुँचने दो। मैं भी आ रहा हूँ!
अपने हक़ के लिए लड़ो
लड़ नहीं सकते तो लिखो।
लिख नहीं सकते तो बोलो।
बोल नहीं सकते तो साथ दो।
साथ भी नहीं दे सकते तो जो लिख बोल और लड़ रहे है उनका सहयोग करो।
ये भी ना कर सको तो उनका मनोबल ना गिराये क्योकि वो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे है।
#studentmovement#studentmovement
#StudentProtestJharkhand
#फर्क_पड़ता_है_साहब.…
#पार्टी_का_राष्ट्रीय_अध्यक्ष किसी को भी बना देंगे....?,
क्या फर्क पड़ता है ?
#अनपढ़ विरोधी दल के नेता की पढ़ाई पर सवाल उठाएंगे और खुद एक अनपढ़ को मुख्यमन्त्री बना देंगे...?
क्या फर्क पड़ता है ?
#विधायक_दल की बैठक में एक #पर्ची भेजेंगे और किसी को भी सीएम बना कर देश को चौंका देंगे...?
क्या फर्क पड़ता है ?
#बिना_जरूरत_UGC_Act लेकर आयेंगे, जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ #भेदभाव करेंगे, सोचेंगे कि थोड़ा बहुत विरोध कर ये तो हमें ही वोट देंगे...?
क्या फर्क पड़ता है ?
#बड़े_बड़े_भ्रष्टाचारी नेताओं के खिलाफ आंदोलन चला कर वोट हासिल करेंगे, बाद में उन्हीं भ्रष्टाचारियों के साथ गठबंधन कर लेंगे...?
क्या फर्क पड़ता है ?
#पड़_गया_फर्क ?
#आ_गया_स्वाद ?
वैसे तो ये छोटा सा #ट्रेलर था, नहीं सुधार किया तो पूरी पिक्चर भी #रिलीज हो सकती है..!
साभार
SC/STआरक्षण में क्रीमी लेयर का विरोध बताता है, सरकार समानता से ज़्यादा चुनावी गणित को प्राथमिकता दे रही है आरक्षण उद्देश्य वंचितों का उत्थान था,न कि अनंतकाल तक एक ही सक्षम वर्ग में केंद्रित रहना।वास्तविक ज़रूरतमंदों तक आरक्षण के लाभ हेतु क्रीमी लेयर पर गंभीर चर्चा होनी ही चाहिए।
योग्यता और मेरिट को जगह नहीं तो देश कैसे बढ़ेगा? एक देश, एक परीक्षा फिर कट-ऑफ में इतना बड़ा धोखा क्यों?
राजनीति के लिए प्रतिभा की बलि बंद करो।आरक्षण और असमानता के बोझ तले पिसते देश के प्रतिभा भविष्य को बचाओ..
यही असल मुद्दा यह है..
मुझे व्यक्तिगत स्तर पर बहुत दुःख हुआ, हमारे पीएम साहब के वीडियो देख कर जिसमें वो NEET पेपर लीक पर कल रात को बोले, उनकी मुख मुद्रा ऐसी थी जैसे कोई विश्वविजेता हारने लगा हो या उसे हारने का अंदेशा हो, आभास होने लगा हो, हताशा, थकान ओर चिंता की अनेकों लकीरें सब जाहिर करती लगी ।
अब तक कई आंदोलन/प्रदर्शन हुए पर एक बार भी पीएम ने जनता को संबोधित नहीं किया, उन्होंने केवल नजरअंदाज किया, उनकी जगह सोशल मीडिया पर उनके तथाकथित भक्तों ने ये बीड़ा उठाया ओर जोरदार तरीके से हर आंदोलन की बाल की खाल निकाली ओर आंदोलनजीवियों को जनता के सामने एक्सपोज किया जिसके चलते आमजन उन आंदोलनों से स्वयं को जोड़ नहीं पाया ।
किंतु जब उनके ही प्रधानमंत्रित्व कालखंड में अभी कुछ माह पहले अपने ओर विरोधी दलों के वोटर्स को रिझाने के लिए देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को ठेका/सुपारी दी गई जिसमें नए #UGC रेगुलेशन चुपचाप लागू करने की कोशिशों को उन्हीं सोशल मीडिया इन्फ्लेंसुअर्स/ भक्तों ने एक्सपोज कर दिया जिसमें विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग #UR के बच्चों को जातिवादी, अराजक ओर अन्य आरक्षित वर्ग के छात्रों से लड़ाई झगड़ा करने वाला पूर्व घोषित कर दिया गया, जिसमें सामान्य वर्ग के छात्रों की कोई सुनवाई का क्लाज नहीं जोड़ा गया, बस किसी भी आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी ने सामान्य वर्ग के छात्र की शिकायत की ओर उसका कैरियर खत्म, जेल अलग ।
#UGC की नई गाइडलाइन का विरोध हुआ, पूरे देश भर में हुआ जिसमें आरक्षित वर्ग के लोगों ने भी साथ दिया, पर न तो सरकार के ओर न ही किसी अन्य नेता के कान पर जूं रेंगी, सामान्य वर्ग की चिंताएं सरकार के "नक्कारखाने में तूती" जैसी हो गई, न शिक्षामंत्री ने कोई स्पष्टीकरण दिया न ही पीएम ने कोई वीडियो बना कर संबोधित ही किया,
बल्कि जब सोशलमीडिया इंफ्लूएंसरो को ओर न ही सवर्ण छात्रों के साथ स्टेकहोल्डरों को या आवाज उठाने वालों को इसी जंतर मंतर पर या देश में कहीं भी सभा/प्रदर्शन/धरने की इजाजत नहीं दी, अपितु सभी को उनके घरों में नजरबंद कर दिया, कई कई दिन तक बाहर नहीं निकलने दिया गया ।
वहीं दूसरी तरफ #UGC समर्थन के लिए भीम आर्मी ओर अन्यों को स्थान दिया, धरने प्रदर्शन करने के लिए परमिशनें दी, नेताओं को बकने के लिए खुल्ला छोड़ दिया, साक्षी महाराजों जैसों को सवर्णों के खिलाफ विषवमन करने की जैसे छूटें दी गई, मंचों से सवर्ण/अनारक्षित वर्ग की गलियाँ बकवाई गयी।
कॉकरोच पार्टी के संस्थापक को अमेरिका से आने पर हवाई अड्डे पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया, धरने प्रदर्शन की अनुमति लेटर स्वयं सरकार ने सौंपा ओर कहीं कोई प्रतिबंध नहीं लगाया, मनमानी करने की खुली छूट दी ओर अब हमारे पीएम साहब स्वयं आ गए अपने मोबाइल से दुःखी मन से वीडियो बनाया ओर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया ।
ये सब अभी हाल की ही घटनाएं है।
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अब सामान्य वर्ग के हालात क्या है पता है ??
वो हर मोदी विरोध या प्रदर्शन पर चिल्ला चिल्ला कर डीप स्टेट, फॉरेन फंडिंग, विदेशी साजिश सबको समझाते रहते थे, आज शांत है क्योंकि वो स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं
दूसरी तरफ सरकार जाकर प्रदर्शन वालों से बात कर रही है, अपने घर बुला कर समझौते कर रही है, शर्तों को सुन रही है, ज्ञापन ले रही है ओर हड़ताल वालों को जूस पिला रही है ।
ये किसकी सरकार है ??
क्या इसी के लिए आपने जीतोड़ मेहनत की थी, सपने देखे थे
सोचो 🤔
@narendramodi@PMOIndia
सोनम वांगचुक के लिए पूरा देश खड़ा हो गया, लेकिन रविन्द्र जी के समर्थन में एक आवाज़ तक नहीं उठी।
जो कल तक UGC के मुद्दे पर आपको गालियाँ दे रहे थे, आज आप उन्हीं के लिए लाठियाँ खा रहे हो! ऐसे नेतृत्विहीन protest,जहां "जय भीम"का नारा लगे उससे आपका कुछ भला नहीं होने वाला है।
Equality is not a privilege, it's a right!!
Every student in this country should be treated equally, fairly and without any discrimination!!
#EndReservation
आत्महत्या करने वाले अधिकांश बच्चे ‘सामान्य वर्ग’ से आते हैं क्योंकि उन पर ज़्यादा मानसिक दबाव होता है, उनके पास बैक अप नहीं है, आरक्षण पर बात कब होगी ?
- हर्ष दुबे (NEET छात्र)
माननीय प्रधानमंत्री जी,
घटिया नियम-कानून के कारण आम जनता हताश, निराश और अत्यधिक परेशान है
कृपया प्रत्येक माह संसद का विशेष सत्र बुलाइए और पुलिस रिफार्म, ज्यूडिशियल रिफार्म, इलेक्शन रिफार्म, एडमिनिस्ट्रेटिव रिफार्म, एजुकेशन रिफार्म और टैक्स रिफार्म करिए
@PMOIndia@narendramodi