सबको एक आंख से देखना और एक ही आंख से दिखाई पड़ने में अंतर होता है।कुछ को तो आंख होते हुए भी दोनो आंख से नहीं दिखता है। ऐसे लोग कीचड़ में सन जाते है। कीचड़ की सौंधी खुशबू के दीवाने हो जाते हैं।
फिर क्या सुवर उसकी दीवानगी .. दोनों कमाल की।.
सबको एक आंख से देखना और एक ही आंख से दिखाई पड़ने में अंतर होता है।कुछ को तो आंख होते हुए भी दोनो आंख से नहीं दिखता है। ऐसे लोग कीचड़ में सन जाते है। कीचड़ की सौंधी खुशबू के दीवाने हो जाते हैं।फिर क्या सुवर क्या उसकी दीवानगी ...
राघव चड्ढा जी ने राज्य सभा में बजट पर जो सवाल पूछा, वो कमाल का था!
शांत, तथ्यों पर आधारित और सीधे दिल को छूने वाला अंदाज़!
Raghav Chadha जी बताया कि पहली बार इतिहास में व्यक्तिगत आयकर (Personal Income Tax) ₹11 लाख करोड़ हो गया, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स सिर्फ ₹9.8 लाख करोड़ है!
मतलब, आम आदमी और सैलरीड क्लास अब बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स से ज़्यादा टैक्स दे रहा है!
इन्फ्लेशन 6.8% है, स्लैब में कोई बदलाव नहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं बढ़ा!
मिडिल क्लास को और कुचला जा रहा है!
सवाल ये है,
क्या ये सरकार आम जनता की है या बड़े बिजनेसमैन की??
कॉमन मैन टैक्स देता है, लेकिन राहत किसे मिल रही??
राघव चड्ढा जैसे युवा, पढ़े-लिखे और मुद्दों पर बोलने वाले नेता की ज़रूरत आज देश को है!
Raghav Chadha आम आदमी नहीं बल्कि क्रांति हैं
कल तक Airport पर जो चाय ₹300 में और समोसा ₹350 में मिलता था
आज वही ‘‘उड़ान यात्री कैफे’’ में ₹10 की चाय और ₹20 का समोसा बेच रहा हैं
Raghav Chadha ने संसद में ये मुद्दा उठाया और सरकार ने उनकी बात सुनी
आम आदमी की परवाह करने वाला जन सेवक ही बदलाव ला सकता हैं वही आम आज Raghav Chadha कर रहे हैं
देश को ऐसे ही युवा सरपंच, विधायक, सांसद और प्रधानमंत्री चाहिए
तलाश उनकी पूरी हुई,
भटकते _भटकते ..
हम कहां जाएं..
वादे यहीं,उनके पास छोड़ता हूं,
शायद किसी के काम आ जाएं...
इतनी नैतिकता का हम क्या ही करें...
जो बेजुबान कर जाएं
बे मौसम बारिश में नहीं भीगना ..
उनकी वफा के बस कहीं फूल खिल जाएं..