बीजेपी प्रवक्ता और एंकर तो लड़ने लगे हमसे ... दोनों एक साथ बोल रहे है की हम @INCIndia की तरफ से देश के सामने झूठ बोल रहे है, ऐसा हुआ ही नहीं है
आप लोगो से निवेदन है इनको सच बताइये की क्या सच है
इनको पता नहीं है...
सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि चुनाव आयोग ने Form 6 में जोड़े गए तीन नए सवाल सही हैं.
फिर चुनाव आयोग ने ऐसा कैसे कहा? चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के जवाब को X पर पोस्ट क्यों नहीं कर देता?
इसमें तो सिर्फ़ कुछ सेकंड लगेंगे.
पहले केवल ज्ञानेश कुमार दोषी थे, लेकिन अब संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर में ऐसा लगता है कि बाकी दोनों चुनाव आयुक्त भी अब कुछ नहीं बोलेंगे.
ऐसे में तीनों चुनाव आयुक्तों पर इम्पीचमेंट होना चाहिए और उन्हें उनके पद से हटा देना चाहिए.
ज्ञानेश कुमार ने 'वोट चोरी' कर देश से गद्दारी की है, ऐसे देशद्रोही को माफ नहीं किया जा सकता।
इसलिए आज पूरे देश से एक ही आवाज आ रही है- ज्ञानेश को गिरफ्तार करो ✊
📍 मध्य प्रदेश
चुनाव आयोग पर इंवेस्टिगेशन करने वाली @RitikaChopra__ ने बताया कैसे पूरी हुई रिपोर्ट
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WhatsApp यूनिवर्सिटी के झाँसे में मत आइए. इनवेस्टिगेटिव पत्रकारिता को सेलिब्रेट करने वाले संस्थान की जाँबाज़ रिपोर्टर से ही सुनिए कि लोकतंत्र से छेड़खानी कैसे की गई और कैसे करोड़ों लोग Universal Adult Franchise से साज़िशन बाहर किये गये.
@IndianExpress@RitikaChopra__
🚨लोग सोचते हैं कि पूरा मामला सिर्फ ज्ञानेश कुमार को लेकर है। ऐसा नहीं है। वह तो सिर्फ एक हिस्सा है।
2024 को देखिए।
लोकसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले केजरीवाल गिरफ्तार हुए।
हेमंत सोरेन भी चुनाव से पहले गिरफ्तार हुए।
कांग्रेस के बैंक खाते चुनाव प्रचार से ठीक पहले फ्रीज कर दिए गए।
विपक्षी नेताओं पर ED और CBI की छापेमारी लगातार होती रही।
इलेक्टोरल बॉन्ड की बात करें तो इसमें BJP को सबसे बड़ा हिस्सा मिला जब तक कि सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को रद्द नहीं कर दिया।
और फिर आता है वोटर लिस्ट का मुद्दा। नाम हटाए गए। मतदान खत्म होने के बाद वोटिंग प्रतिशत बढ़ने के दावे किए गए।
इन सबके साथ-साथ 'गोदी मीडिया' की मदद से प्रचार भी फैलाया गया।
इन सभी चीजों को अलग-अलग मत देखिए।
इन्हें एक साथ जोड़कर देखिए।
भाई, जरा सोचिए..हर एक मुद्दे के लिए अपनी-अपनी सफाई दी जा सकती है लेकिन जब इन सभी कड़ियों को एक साथ जोड़कर देखा जाता है, तो यह एक बड़ी योजना जैसा दिखाई देता है
विपक्ष एक हाथ बंधा होने की स्थिति में चुनाव लड़ता है फिर BJP इसे निष्पक्ष जीत बताती है