शिक्षा को सिद्धांतः
अच्छा करने के नाम पर
बर्बाद किया जा सकता है ?
जब
सहायक चीजें
बाधक बन जाए।
सोच की दिशा बदल जाए।
और
जिम्मेदारी केवल निम्नतर
अग्रसारित होने लगे।
तो ????
जब बड़े स्तर पर भीड़ बढ़ती है।तो उसे मर्यादित या शालीन रखने की बड़ी चुनौती होती है।
नेतृत्व को
इसका ख्याल नहीं होने पर
मुद्दे का भटकाव होना स्वाभिक है।
खास कर के अभी के समय
मुद्दा कोई हो।
मगर
उसमें अप्रासंगिक नारे लगने लगते हैं।
जो भटकाव का कारण बनने लगता है??
सर
Udise plus student login में विद्यालय द्वारा स्टूडेंट का एडमिशन सिर्फ क्लास 1 में होता है यदि विद्यालय को हर वर्ग में नामांकन और विद्यार्थी के डिटेल में एडिट की सुविधा मिल जाता तो सुविधा होती है।
@OfficeDp
#सवाल सिर्फ न्याय (सेवा के 25 साल बाद योग्यता का मापदंड बदलना)की है कि बाकी टेट क्या चीज है ? हम सभी बीपीएससी का दो दो exam कंप्लीट करके आए हैं।तब शिक्षक बने हैं । सरकार टेट निकाले तो हम सब फतह करेंगे।
#railminister झारखंड की उपराजधानी कही जाने वाली दुमका से दिल्ली की कनेक्टिविटी नहीं है।इस रूट से एक ट्रेन दीजिए ।काफी पैसेंजर भी है।दुमका पटना भाया जसीडीह एक ट्रेन दी जाए।बहुत पैसेंजर मिलेंगे।
सिर्फ स्टेटस के लिए
हम
अपने बॉस टाइप लोगों को
खिलाने में
इतने व्यस्त हो जाते हैं।
कि
अपने मित्रों
और रिश्तेदारों को भूल जाते हैं।
जिनके साथ हमेशा
सुख दुख में रहना है।