How India changed in just 10 years -
Before 2014 - Media questioned the government.
After 2014 - Media questions the opposition.
Before 2014 - Citizens would blame the government.
After 2014 - Citizens blame themselves.
Before 2014 - Corporates would fear media exposes.
After 2014 - Corporates own most media.
Before 2014 - Parliament would corner Ministers.
After 2014 - Ministers have owned the Parliament.
Before 2014 - Teachers taught harmony and tolerance.
After 2014 - Many teachers actively teach hate.
Before 2014 - Indians were proud of free speech.
After 2014 - Many Indians consider free speech treason.
Before 2014 - PM would face media in press meets.
After 2014 - PM takes zero press meet, and celebrates "Mother of Democracy".
Before 2014 - Institutions tried standing their ground.
After 2014 - Institutions by default bootlick the govt.
Before 2014 - Communal harmony was promoted by governments.
After 2014 - Those promoting communal harmony are arrested by government.
Before 2014 - Amitabh Bachchan had a spine.
After 2014 - Amitabh Bachchan is Amitabh Bachchan.
Before 2014 - Protests were celebrated as mark of life.
After 2014 - Protests are anti-national.
Before 2014 - Citizens demanded cheaper fuel and food.
After 2014 - Citizens go silent on price rise.
Before 2014 - Farmers were anna-data of India.
After 2014 - Farmers are traitors and anti-India.
Before 2014 - Intellectuals were voice of reason.
After 2014 - Intellectuals are urban naxals.
Before 2014 - Data and statistics were mostly true.
After 2014 - Only pro-govt. data is true.
Before 2014 - Subsidies were pro-poor.
After 2014 - Subsidies are harmful revadies.
Before 2014 - Constitution was our pride.
After 2014 - Constitution is vile, useless, worth dumping.
Before 2014 - Science was science, faith was personal.
After 2014 - Science is inferior, Faith is supreme
Before 2014 - Criticising govt. was a noble goal
After 2014 - Criticising govt. is the ultimate treason
Before 2014 - State was different from Govt. was different from PM was different from Nation.
After 2014 - State = Govt. = PM = Nation
Before 2014 - Most joyously celebrated being Indian.
After 2014 - Many realised they are Indian because Modi made them realise it.
How India changed in just 10 years.
आपातकाल के स्याह दिन बनाम आज के अच्छे दिन - 1
पंकज शर्मा
26/06/2021
जनतंत्र को अपने ठेंगे पर रखे घूम रहे लठैतों के इस दौर में 46 साल पहले के आपातकाल के 633 दिनों पर खूब हायतौबा मचाइए, मगर पिछले 2,555 दिनों से भारतमाता की छाती पर चलाई जा रही अघोषित आपातकाल की चक्की के पाटों को नज़रअंदाज़ मत करिए.
हर साल आपातकाल की सालगिरह पर चूंकि उन ‘काले दिनों’ पर हाय-हाय करने का दस्तूर है, इसलिए इस बार जब 46 साल पूरे हो गए हैं, मैं भी आप से कुछ गुज़ारिश करना चाहता हूं. इसलिए कि इन साढ़े चार दशकों में यह धारणा बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी गई है कि जनतंत्र से इंदिरा गांधी का कोई लेना-देना था ही नहीं.
1975 के बाद जन्म लेने वाली पीढ़ी को तो यह सिखाने में कोई कसर छोड़ी ही नहीं गई है कि इंदिरा लोकतंत्र-विरोधी थीं और एक तरह से तानाशाह ही थीं. हम अपने बच्चों को लगातार यह बता रहे हैं कि इंदिरा ने जनता के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए थे, विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को जेल भेज दिया था और उन ‘काले दिनों’ में जैसी ज़्यादतियां हुईं, कभी नहीं हुईं.
इंदिरा ने आपातकाल क्यों लगाया था, इस पर लंबी चर्चा हो सकती है. उन्होंने विपक्षी नेताओं को क्यों जेल भेजा था, इस पर भी काफी बहस की गुंज़ाइश है. और, आपातकाल में सचमुच कितनी ज़्यादती हुई या नहीं हुई और की तो किसने की, किसके इशारे पर की, इस पर तो पूरा ग्रंथ लिखा जा सकता है. लेकिन चूंकि ऐसा करने में अलोकप्रिय होने की पूरा जोख़िम मौजूद है, इसलिए आज तक यह काम किसी ने नहीं किया.
मैं भी मानता हूं कि इंदिरा ने आपातकाल लगाकर के अपने जीवन की सबसे बड़ी ग़लती की थी. लेकिन यह भी तो एक तथ्य है कि उन्होंने अपनी ग़लती मान ली थी. खुद इसके लिए माफ़ी मांगी थी.
उनके बाद राजीव गांधी ने भी इसके लिए माफ़ी मांगी. सोनिया गांधी की कांग्रेस भी आपातकाल की भूल स्वीकार कर चुकी है. आज के दौर में जब अपनी ग़लती मानने के बजाय अर्राने का रिवाज़ है, आपको नहीं लगता कि इंदिरा और कुछ भी थीं, तानाशाह नहीं थीं?
25 जून 1975 की आधी रात आपातकाल लगा था. 21 मार्च 1977 को इंदिरा ने आपातकाल हटाने का ऐलान कर दिया था. मैं नहीं कहता कि इंदिरा के इन 633 दिनों को कोई भूले. जिन्हें याद रखना है, वे ज़रूर याद रखें, लेकिन इतना निवेदन मैं ज़रूर करना चाहता हूं कि सिर्फ़ इन 633 दिनों के आधार पर इंदिरा के ज़िंदगी के पूरे 67 वर्षों पर अपनी पसंद का रंग पोत देना ठीक नहीं है.
मुझे तो लगता है कि जितना गहरा जनतांत्रिक दायित्वबोध इंदिरा में था, बहुत कम राजनीतिकों में होता है. भले ही इंदिरा के दामन पर आपातकाल लगाने के दाग़ हैं, लेकिन उनके जैसा जनतांत्रिक होने के लिए भी कई जन्म के पुण्य लगते हैं.
एक लड़की, जिसके पिता स्वाधीनता आंदोलन की मसरूफ़ियत के चलते कभी-कभार ही घर रह पाते हों; एक लड़की, जिसके बचपन का ज़्यादातर हिस्सा इसलिए अकेलेपन में गुज़रा हो कि पिता कुल मिलाकर 11 साल अंग्रेज़ों की जेलों में रहे; एक लड़की, जिसका पूरा बचपन अपनी बीमार मां की देखभाल और फिर उसे खो देने की निजी त्रासदी के बीच गुज़रा हो; एक लड़की, जो ख़ुद अपनी नरम सेहत से परेशान रहते हुए भी आज़ादी की लड़ाई में अपनी भूमिका अदा करती रही हो; वह लड़की, जब अपने देश की प्रधानमंत्री हो जाए तो मैं नहीं मानता कि इतनी संवेदनशून्य हो सकती है कि तानाशाह बनने का सोच ले.
इंदिरा की परवरिश तरह-तरह के अभावों में हुई थी. अगर मैं कहूंगा कि इनमें आर्थिक अभाव भी शामिल था तो आपको ताज्जुब हो सकता है. लेकिन सच्चाई यह भी है कि इंदिरा की मां का इलाज़ कराने तक के पैसे उनके पिता जवाहरलाल नेहरू के पास एक वक़्त पैसे नहीं थे.
नेहरू की शादी कमला से 8 फरवरी 1916 को हुई थी. उस दिन वसंत पंचमी थी. कमला के पिता का नाम था अटल कौल. कमला 16 साल की थीं. शादी के समय नेहरू 27 साल के थे. इंदिरा को जन्म देने के बाद से ही कमला नेहरू बीमार रहने लगी थीं.
इंदिरा के जन्म के 7 साल बाद 1924 में उन्होंने एक बेटे को भी जन्म दिया था. वह कुछ ही दिन जीवित रहा. नेहरू तब जेल में थे. 7 साल की इंदिरा गांधी पर अपने छोटे भाई की मौत के हादसे ने क्या असर नहीं डाला होगा?
कमला को टीबी हो गई थी. वे महीनों लखनऊ के अस्पताल में भर्ती रहीं. इंदिरा इलाहाबाद से लखनऊ के बीच आती-जाती रहती थीं. डॉक्टरों ने उन्हें इलाज़़ के लिए स्विट्ज़रलैंड ले जाने की सलाह दी. यह 1926 की बात है. जवाहरलाल के पास इतने पैसे नहीं थे कि यह खर्च उठा पाते. शादीशुदा थे. बेटी भी हो गई थी. इसलिए उन्हें अपने पिता मोतीलाल जी से खर्च के लिए पैसे लेना अच्छा नहीं लगता था.
51 साल पहले के आपातकाल के 633 दिनों पर खूब हायतौबा मचाइए, मगर पिछले 4,413 दिनों से भारतमाता की छाती पर चलाई जा रही अघोषित आपातकाल की चक्की के पाटों को भी नज़रअंदाज़ मत करिए। दिल पर हाथ रखकर बताइए कि आज आप के कितने मौलिक अधिकार सचमुच शेष रह गए हैं?
इतिहास के तौर पर इस बात को हमेशा याद रखने की ज़रूरत है कि ‘इमरजेंसी’ भारतीय शासनकाल का बहुत ही ख़राब दौर था। लेकिन स्पष्ट प्रतीत होता है वर्तमान दौर की कारगुज़ारियों को ढँकने के लिए ‘इमरजेंसी इमरजेंसी’ का राग अधिक अलापा जा रहा है।
इमरजेंसी देश की सुरक्षा के लिए जरूरी बन गया था, अन्यथा भारत के टूटने का खतरा था.
विपक्ष के एक नेता ने तो यहां तक कहा था कि अगर हम बैलेट से नहीं जीत सके तो हम बुलेट से जीतेंगे. इन्हें बाहरी ताकतों का समर्थन हासिल था
- इंदिरा गांधी
सुनिए 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित करने वाला इंदिरा गांधी का संदेश।
कैबिनेट मंत्री की हत्या, चीफ जस्टिस पर प्राणघातक हमला, सेना से तख्तापलट की विपक्ष की अपील, विधायकों से जबरन इस्तीफ़े लिखवाकर सरकार गिराना और पूरे देश को हिंसा में झोंकना।
इन हालात में प्रयोग हुआ था संविधान का आपातकाल का क्लॉज़।
बेचारे जो पत्रकार कल ज़ोर-शोर से ताल ठोक कर पूछ रहे थे कि पासपोर्ट अगर नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो उस पर 'भारत का नागरिक' क्यों लिखा जाता है,
ऊपर से हुक्म मिलते ही आज उन में से ज्यादातर राग आलाप रहे हैं कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत कभी नहीं था, क्योंकि वह ग़ैर-नागरिकों को भी जारी किया जा सकता है. पापी पेट जो न कराए! 🤣
I have a VOTER ID card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a AADHAR card but NO, it is not proof of citizenship
I have a PAN Card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a PASSPORT but NO, it is not proof of citizenship.
So who will give me a CITIZENSHIP CERTIFICATE? A govt bureaucrat?
My question is simple: is the problem with the citizen, or with the Mai Baap State itself?😡
क्या 145 करोड़ भारतवासियों में से किसी के भी पास भारत का नागरिक होने का कोई दस्तावेजी प्रमाण है? अगर पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र में से कोई भी नागरिकता का सबूत नहीं है तो मैं, आप, @narendramodi, @AmitShah या @DrSJaishankar और महामहिम @rashtrapatibhvn अपने को भारत का नागरिक होने का दावा किस बुनियाद पर करते हैं?
मुद्दा विपक्ष का हो तो गोदी मीडिया 24×7 स्टूडियो सजाकर बैठ जाती है।
लेकिन जैसे ही मोहन यादव से जुड़े ज़मीन और प्रॉपर्टी के सवाल उठे, स्क्रीन पर सन्नाटा छा गया।
आज पवन खेड़ा ने मीडिया की इस खामोशी और RSS-BJP के दोहरे मापदंडों पर जमकर सवाल उठाए !
@Pawankhera 🔥
घर के नन्हे, गांधी और पटेल के जवाहर, विनोबा के सम्राट अशोक, टैगोर के ऋतुराज, ओशो के बोधिसत्व, दिनकर मैथिलीशरण के नायक,
विश्व के नव स्वतंत्र देशों के नायक,
बच्चों के चाचा, देश के प्रथम सेवक,
व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी वालों के ज़िम्मेदार...
कौल से नेहरू का सफ़र इस खानदान का शायद नियति ने लिख रखा था।
नेहरू यानि नहर के किनारे बसे हुए। नहर का काम है सींचना।
विशाल नदियां बंजर जमीन तक नहीं पहुँच पातीं, उन नदियों से नहर निकाल कर, उन ज़मीनों को सींच कर धन धान्य से भरा जाता है... ये काम नहर का होता है।
भारत छोड़ो ....1942 से 1945 के बीच जवाहरलाल, वल्लभभाई, सीतारमैया, मौलाना आज़ाद, नरेंद्र देव, महताब, आसिफ अली, कृपलानी, गोविंद वल्लभ पंत जैसे कई नेता अहमदनगर जेल में साथ में बन्द थे।
इस समय जवाहरलाल ने दो काम किये। डिस्कवरी_ऑफ_इंडिया जैसी अमर कृति की रचना औऱ जेल के प्रांगण में सरदार पटेल के साथ मिलकर बागवानी!
बंजर जमीन पर दोनों ने मिलकर कभी धूप में तो कभी बरसात में पसीना बहाते हुए ,भीगते हुए खुदाई की, बीज रोपे, सिंचाई की, खर पतवार की कटाई छटाई की और एक सुंदर सा बगीचा तैयार किया।
नहर का काम ही है आसपास की ज़मीन को सींचना।
और नेहरू ने भी यही किया, सरदार पटेल के साथ मिलकर।
उस नहर को हम कांग्रेस के नाम से जानते हैं।
1947 के बाद इस ज़मीन को जिसे बंज़र बना दिया गया था...धूप, सर्दी, बरसात में सरदार के साथ मिलकर इसे सुंदर सी बगिया में तब्दील कर दिया। इंडिया को फ़िर से डिस्कवर किया।
दुनिया के सामने अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा किया, सुंदर उपवन बना दिया। धन धान्य से भर दिया ।
अब इस बगीचे के नए बागबान ने इसे फ़िर से 1947 के पहले की स्थिती में ले जाने की ठानी है।
उसके पास उसीकी सोच के उन मरकटों की फ़ौज है जो पेड़ पौधों को उखाड़ कर उसके जड़ों को देख रहे हैं, जड़ों पर अट्टहास कर रहे हैं।
इनका उद्देश्य इस उपवन को फिर बंजर बना देना है। बगिया के फूलों पेड़ों पौधों को बेच देना है।
बंजर ज़मीन करने के लिए नहर को सुखा देना है। ये नहर ही इस जमीन की बर्बादी का कारण है, बार बार यह रिपीट करते रहना है, लोगों के दिमाग में भर देना है, जिससे नहर को बन्द कर दिया जाए।
कांग्रेस खत्म करने का उद्देश्य है इनका, क्योंकि नहर सूखेगी , ज़मीन बंजर होगी तो वो ज़मीन बेच पाएंगे।
कांग्रेस रूपी नहर इनके हर कुत्सित इरादों के सामने लबालब बह रही है।
नेहरू को खत्म करना है इन्हें... आज़ाद देश के गुलामों ने नहर को सुखा देने की ठानी है।
ये इसी काम में सतत लगे हैं। लेकिन जबतक नेहरू और पटेल द्वारा खींची गई नहर से सिंचित भूमि का आख़िरी पौधा, आखिरी कांग्रेसी जीवित है, इनकी चालाकियां साजिशें सफल नहीं होंगी।
#RememberingNehru
#IronManSardarPatel
#VijayShukla
नेहरू जी की प्रधानमंत्री अवधि के लिए 1952 के चुनाव जीतने के बाद के शपथ के बाद का समय लिया गया है।
इस समय पटेल साहब दुनिया से जा चुके थे।
अब किस मुँह से कहोगे कि वोट पटेल जी को मिले पी एम नेहरू जी बने?
1952 में तो पूर्ण बहुमत से उन्हें प्रधानमंत्री चुना गया था।
1947 में उन्होंने आज़ाद भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला था और सरदार ने गृहमंत्री का।
तो अब सरदार पटेल पहले गृहमंत्री नहीं रहे?
झूठ की दिक़्क़त यह है कि अपने ही खेल में उलझ जाता है।
लगता है मेरी बात कुछ लोगों को बहुत बुरी लगी है ।
मैं ऐसे लोगों को माफ करता हूँ क्योंकि ये नहीं जानते ये
क्या कह और कर रहे हैं ।
फिर कहुंगा -
नेहरू जैसे लोग सदियों में जन्म लेते हैं । नेहरू गांधी जी के बाद महानतम नेता हैं । और गांधी जी इस बात को जानते थे ।
एक बार मोदी ट्रंप से बात कर रहे थे! Sir क्या आप मुझे भारत की अर्थव्यवस्था को चरमराने से रोकने के लिए कोई सुझाव दे सकते हैं?
ट्रंप ने कहा पहले तो सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप अपनी टीम में बुद्धिमान लोगों को जोड़िये
मोदी ने एक गहरी सांस ली और फिर पूछा लेकिन मैं बुद्धिमान लोगों की पहचान कैसे करूं?
ट्रंप ने जवाब दिया कि यह बहुत आसान है, आप उनसे कुछ दिमागी पहेली पूछकर उन्हें आजमाएं
ट्रंप ने फिर अपने इंटरकॉम पर एक बटन दबाया और कहा,Marco Rubio! अंदर आओ.
Marco Rubioअंदर आए और कहा Yes Sir?
ट्रंप मुस्कुराए और बोले कि इस प्रश्न का उत्तर दो ...
तुम्हारे माता और पिता का एक बच्चा है। वह तुम्हारा भाई नहीं है और वह तुम्हारी बहन भी नहीं है। बताओ वह कौन है?
Marco Rubio ने तुरंत उत्तर दिया वह बच्चा मैं ही हो सकता हूं
वेरी गुड, Rubio! ट्रंप ने कहा।
फिर उसने एक मुस्कान के साथ मोदी की ओर देखा और कहा,देखो, बुद्धिमान लोग ऐसे ही खोज लेते हैं।
अब मोदी ने भी ऐसा ही एक फार्मूला लागू करने की सोची. वह भारत लौट आए!
भारत आकर निर्मला सीतारमण से पूछा कि निर्मला, इस सवाल का जवाब दें कि आपकी मां और आपके पिता का एक बच्चा है। वह आपका भाई नहीं है और वह आपकी बहन भी नहीं है।
मुझे बताओ यह कौन है?
निर्मला ने बोला कि मुझे यकीन नहीं है.मैं इसका फिर जवाब दूंगी.
निर्मला अपने सलाहकारों के पास गई और सभी से पूछा, लेकिन कोई भी उसका उत्तर नहीं दे सका।
आख़िर में वह Rahul Gandhi के पास दौड़ी और उनसे पूछा कि
क्या आप मेरे लिए इस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं? आपके माता और पिता का एक बच्चा है और वह न तो आपका भाई है और न ही आपकी बहन। वह कौन है?
Rahul Gandhi ने तुरंत जवाब दिया कि यह प्रश्न आसान है, वह मैं हूं!
निर्मला सीतारमण ने Rahul Gandhi जी को धन्यवाद दिया।
फिर वह मोदी के पास पहुंची और बताया कि मैंने इस बारे में बहुत सोचा है और मुझे लगता है कि इस पहेली का जवाब है Rahul Gandhi...
मोदी जी गुस्से से चिल्लाए,नहीं! तुम सब बेवकूफ हो! जवाब Rahul Gandhi नहीं है ... Marco Rubio है…
8 एकड़ में फैला प्रधानमंत्री आवास से बड़ा स्कूल जिसमे अंजना ओम कश्यप का लड़का पढ़ता है,उस जमीन को 1 रुपए में ख़रीदा गया है,जिसकी मौजूदा क़ीमत 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक है- खान सर 🔥
दरअसल अंजना ओम कश्यप का बेटा जिस स्कूल में पढ़ता है,वो दिल्ली के सबसे महंगे सिक्योर इलाका चाणक्यपुरी में है उस स्कूल की सालाना फ़ीस और कुल खर्च मिलाकर क़रीब 50 लाख रुपए है।
वो स्कूल बनवाया कैसे गया था,वो स्कूल प्रधानमंत्री आवास के बगल में बेचा कैसे गया जब पता करने जायेंगे तो पता चलेगा शिक्षा माफिया टीचर नहीं कोई और है।
राहुल गाँधी ने 2029 के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है दो काम करके..
कांग्रेस पर आरोप लगता था कि उन्होंने मुस्लिम को अल्पसंख्यक बनाकर उनके साथ अन्याय किया है..
बीजेपी इस मुद्दे पर मुसलमानो को भड़काकर कांग्रेस का वोटबैंक ख़राब कर रही थी..
राहुल गाँधी ने बीजेपी की इस तुच्छ राजनीती को खत्म करते हुए आदेश दिया है कि कांग्रेस मुसलमानो को अल्पसंख्यक नहीं कहेगी.
अभी से कांग्रेस Minorities विभाग को बोल दिया गया है कि MINORITY शब्द की जगह मुस्लिम बोला जायेगा..
Aimim लगातार कांग्रेस के इस वोट बैंक में सेंध लगा रही थी..
दूसरा राहुल गाँधी ने भविष्यवाणी की है अगले एक साल के अंदर बीजेपी सरकार गिर जाएगी.
ये बयान ने राजनीतीक गलियारों में सनसनी फ़ैला दीं है... बीजेपी को भी सोचने पर मज़बूर होना पड़ेगा.
इनका कहा वैसे आजतक झूठ नहीं हुआ 😊.
कुछ भी कहो, दोनों बयानों से राहुल गाँधी काफ़ी कॉन्फिडेंस में नज़र आ रहे हैँ..
ऑयल बॉन्ड की देनदारी 3 लाख करोड़ थी, 4 करोड़ वसूल लेते, 44 लाख करोड़ की वसूली क्यों हुई?
अगर जब चंगा है तो डॉलर के मुकाबले रुपया 97 क्यों पहुंच गया? निर्यात क्यों घट रहा? उत्पादन क्यों घट रहा? अमेरिका के निर्देश पर तेल क्यों ले रहे?
- आशुतोष
मोदी के नॉर्वे जाने का असली कारण
15 मई, 2024: नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड ने अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन को अपने निवेश दायरे से बाहर कर दिया।
27 फरवरी, 2026: उसी फंड ने अडानी ग्रीन एनर्जी को धोखाधड़ी और वित्तीय अपराध से जुड़े आरोपों का हवाला देते हुए बाहर कर दिया।
18-19 मई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे का दौरा किया - 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा।
राहुल गांधी ने अब कहा है कि मोदी ने अडानी को नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड के ब्लैकलिस्ट से हटाने के लिए व्यक्तिगत अनुरोध किया है।