चैत्र नवरात्र के सप्तम दिवस पर आज प्रभु श्रीरामलला सरकार के दिव्य दर्शन
On the seventh day of Chaitra Navratri, today, divine darshan of Prabhu Shri Ramlalla Sarkar
आनंद और आत्मीयता के महापर्व होली पर आज भगवान श्री नरसिंह जी की रंगभरी भव्य शोभायात्रा के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोरखपुर महानगर के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में सहभाग किया।
भगवान नरसिंह जी का दिव्य अवतार हमें स्मरण कराता है कि भक्त का विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता। उनकी प्रकट हुई कृपा अधर्म पर धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देती है।
प्रभु श्री नरसिंह जी की अनुकंपा से आप सभी के जीवन में साहस, संतुलन, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रकाश सदैव बना रहे, यही प्रार्थना है।
काश, मध्यप्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं ने थोड़ा परिश्रम कर के भाजपा को जिताया होता तो ये दिन न देखना पड़ता! कॉन्ग्रेस के राज में कभी ओम बिड़ला को चैम्बर में गाली दी जाती है, कभी नेता प्रतिपक्ष मोदी जी को महिला सांसद पीटने के लिए संसद में खड़े हो जाते हैं…
जागो भाजपा समर्थकों, अगली बार, बना ही दो मोदी सरकार!
विजय सिन्हा अपनी आपबीती सुनाते हुए अंत में अंबेडकर तक पहुँच ही गए कि जातिविहीन समाज की कल्पना उन्होंने की। बस यह नहीं बताया कि मोदी जी ने अंबेडकर के नाम से समाज में कितना जातिवादी विष घोला है कि हर दिन ब्राह्मणों की बेटी खींचने की बात होती है।
यह स्टेटमेंट (और इसके आगे की बात) गले में हाथ डाल कर निकलवाई गई है। जब इनके ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ फेल होने लगे, जब इनकी अकड़ के किस्से बाहर आने लगे, जब इनकी विचारधारा के विपरीत कर्म लोग गिनाने लगे, तब ३३ दिवस बीतने के बाद यह पहला कथन आया है। आगे इन्होंने यह भी कहा कि कानून अगर गलत है तो संशोधन करना चाहिए।
इससे कुछ नहीं होने वाला। ये गुड कॉप, बैड कॉप हम समझते हैं।
रुचि तिवारी पर हमले के बाद पूरे देश में गुस्सा साफ़ देखा जा सकता है।
“लेफ्ट विंग की कब्र खुदेगी JNU की धरती पर” जैसे नारे खुलकर लगाए गए।
एक महिला पत्रकार पर हमले के विरोध में कल रात में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ।
जिस हिंदू एकता का सपना हम जीवन भर देखते रहे, उसे अपनी आँखों के सामने टूटते हुए देखना दुखद है!
फ़िलहाल मैं इस कुकृत्य की निंदा करता हूँ और आशा करता हूँ सरकार और प्रशासन की नींद टूटेगी!
कुछ मंत्री कह रहे थे कि UGC के नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन हालात तो नियम लागू होने से पहले ही साफ दिखने लगे हैं।
जिन्हें मिलकर नक़ल माफिया और पेपर लीक के खिलाफ लड़ना था, वे आज जात-पात में बँट गए हैं। असली लड़ाई सिस्टम से होनी चाहिए थी, पर हम आपस में उलझ गए। एक फैसले ने ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरने में शायद दशकों लग जाएँ।
जातिवाद के नाम पर शिक्षा के मंदिर को हमने क्या बना दिया ?
एक लड़की को लड़कों ने घेर रखा है, सरेआम उसके साथ हाथापाई की जा रही है.
इनका नाम रूचि तिवारी है, पेशे से यूट्यूबर है. जरा सोचिये किसी भी और जाति धर्म से जुड़ी कोई दूसरी लड़की होती तो देश में क्या हो रहा होता. जाति के नाम पर सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ घिनौना व्यवहार हो रहा है. उनके साथ जातिवादी टिप्पणी की जा रही है. ये सब हो रहा है देश की राजधानी दिल्ली में.
बेहद शर्मनाक, घृणा से भरा हुआ .
हम कहाँ थे और कहां जा रहे हैं?