आख़िर RSS और BJP से जुड़े लोगों ने अपने सबसे सम्मानित नेता डॉ. हेडगेवार का कौन सा ऐसा कलंकित पत्र है, जो सदन में पढ़ने नहीं दिया?
Pic 1 वो पत्र है जो उन्होंने स्वयं सेवकों को तिरंगे के ख़िलाफ़ लिखा था।
Pic 2 RSS के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर ने 28 दिसंबर 1949 के अंक में राष्ट्र गान को “Item of entertainment” लिखा।
ग्रीन किया हुआ हिस्सा पढ़े।
क्या ऐसे लोगों को देशभक्ति की बात करने की हिम्मत होनी चाहिए?
पढ़ तो लें
कल एक जानकार ने बताया कि टीवी चैनलों के Ad Revenue में भारी गिरावट आ रही है। बड़ी प्राइवेट कंपनियों ने अपने विज्ञापन फंड को डायवर्सिफाय करना शुरू कर दिया… उनका गूगल को विज्ञापन देने की तरफ़ अधिक रूझान है। यानि YT की तरफ़। ऐसे में टीवी चैनल्स या तो सरकारी विज्ञापनों, या मालिकों के दूसरे धंधों के पैसे के बूते, या फिर नेताओं के साथ कॉन्क्लेव के ज़रिए पैसा जुगाड़ कर गाड़ी खींचने की कोशिश में जुटे हुए हैं। कुछ चैनल अपवाद हो सकते हैं। लेकिन ये फैक्ट है कि राजस्व में गिरावट की वजह से ही बड़े पैमाने पर छँटनी हो रही है। एक बड़ा उदाहरण हमने टीवी टूडे ग्रुप का देखा है। आने वाले समय में टीवी चैनलों से बहुत और की नौकरी जा सकती है ऐसी आशंका जतायी जा रही है।
इसलिए तोल मोल के बोल। बाद में मत कहना कि बताया नहीं था।
जेन जी गाली दे रही है!!
संसद से शयनकक्ष तक बड़ी चिंता है। जेन जी, गालीबाज है। घटिया मीम बनाती है, गंदे इशारे करती है।
अशिष्ट मीम बनाती है।
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चिंतित है सब। इस उम्र में अपने बच्चो को यह सब करते देखना शॉकिंग है। उस उम्र में हम भी उच्ऋंखल थे, शैतान थे,नो डाउट, लेकिन मर्यादा में रहते थे।
हमारे मां बाप तो अमीर नही थे। सरकारी हस्पताल में जन्मे, और सरकारी स्कूल में पढ़े। बीमार पड़े तो सरकारी दवा खाई। सरकारी एग्जाम पास किये, सरकारी कॉलेज गए, नौकरी की, छोटा धंधा किया, बढाया- दो पैसे कमाये।
और अपने बच्चो को हर वह चीज दी, जो हमे न मिली थी। तो कमी कहाँ रह गयी?
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जेन जी, प्राइवेट नर्सिंग होम में पैदा हुई, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ी, प्राइवेट गाड़ी में चलती है। प्राइवेट वैक्सीन लगवाती है, प्राइवेट कॉलेज में पढ़ती है, प्राइवेट नौकरी करती है।
इस पीढ़ी ने, सरकार से कुछ लिया नही।
सरकार उससे जरूर ले रही है। टैक्स, चन्दा, रिश्वत, कमीशन, टोल, वोट, तालियां, थाली, लाइक्स।
देने वाला, मांगने वाले की..
या कहें छीनकर लेने वाले की इज्जत करे??
दुनिया मे ऐसा नही होता। तो जेन जी से यह आशा क्यो?
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और समझिये, कि इस पीढ़ी के लिए आपने कुछ छोड़ा नही है। इसके मां बाप, चचा, फूफा, मामा, ताऊ- इसके हिस्से की नियामतें खा चुके। बरबाद कर दिया है।
इसके हिस्से की हवा।
इनके हिस्से का पानी,
इसकी नदिया, इसके खनिज, इनके हिस्से की शांति, इनके हिस्से की मुस्कान
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इस पीढ़ी के सामने एक खौफनाक शून्य है।
जॉब्स, बिजनेस, शिक्षा, सुविधा, सम्मान- सब मुट्ठी भर लोगों के लिए सुरक्षित है। 90% लाकर कॉलेज नही मिलता, डिग्री लेकर जॉब नही मिलता।
जो सैलरी है, उतने में घर नही मिलता। सरनेम खास न हो तो किराए पर मकान नही मिलता।
हस्पताल में ड्यूटी पर डॉक्टर नही मिलता। पैसे देकर न्याय नही मिलता। टोल देकर सड़क नही मिलती। घर की औरतों के साथ निकले, तो इज्जत का अमान नही मिलता।
और इस पर मुंह से कुछ निकल जाये,
कचहरी से जमानत नही मिलती।
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इस पीढ़ी से सब कुछ छीन लिया गया है, जो पिछली पीढ़ियों को आसानी से, या थोड़े एफर्ट से मिल जाता था। बदले में 5 किलो राशन, 1500 नगद और ढेर सारा गर्व छोड़ा है।
मन्दिर, मुसलमान, गौमूत्र और पाकिस्तान छोड़ा है। जयजयकार की मजबूरी छोड़ी है।
नथिंग एल्ज!!
दिया कुछ नही, पर इनकी मासूमियत, जिंदगी की आसानियत, रहने का स्वस्थ महौल, भविष्य की सुरक्षा और वर्तमान का सुकून छीन लिया है।
तो देने के लिए इन हतभागियों देने को बचा क्या है?? गालियां..?
तो वही देंगे न!!
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आप कह रहे है कि जेन जी, गालीबाज है। घटिया मीम बनाती है, गंदे इशारे करती है। अशिष्ट मीम बनाती है। साहब ये तो अभी अल्हड़ उम्र की बड़ी मासूम अभिव्यक्ति है।
इसे जरा और पकने दीजिये।
इसे उबालिये, पकाइए। मुकदमे लगाइए, अकेला पाकर पीटीये, माफी मंगवा कर वीडियो बनाइये। भीतर जमा हो रहे बारुद का जखीरा बढ़ाइये। शौक से..
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और खूब बढ़ाइये।
क्योकि आप गालियों का अंत चाहते है।
और हम आपका अंत चाहते हैं।
कल आपने एक कुपढ़, घटिया और निकृष्ट प्रवृत्ति के आदमी के मुँह से नेहरू जी के बारे में सुना!
सुनिए क्या कह रही हैं हिंदी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार महादेवी वर्मा जी-
“22 साल के थे वे, तब उनकी पत्नी नहीं रही”
उसके बाद हमने जब कहा कि भाई दोनों बच्चे छोटे हैं... एक लड़की थी, एक लड़का, छोटे-छोटे। दोनों इतने छोटे हैं, आप विवाह कर लें।
तो उन्होंने हमसे बड़ी बात कही, "मनोहरा देवी मरी नहीं हैं, मुझ में समा गई हैं। तो मैं अब दोनों हूँ।"
असल में वहाँ जब खबर पहुँची न उनकी बीमारी की... चले तो जब गाँव की सीमा में पहुँचे तो उनकी पत्नी को जला कर के लोग लौट रहे थे।
अंतिम समय में नहीं देखा उन्होंने लेकिन उनके चरित्र पर कोई धब्बा नहीं है।
एक वो और एक नेहरू जी। नेहरू जी भी ऐसा है कि हमेशा कहते थे "महादेवी, मैं तो नास्तिक हूँ।"
हमने कहा "भाई, अब कभी देखेंगे हम तुम्हारी नास्तिकता।"
तो जब कमला जी को वहाँ... निधन उनका हो गया और जला के आए तो भस्म यहाँ प्रवाहित की।
बिल्कुल उसी कर्मकांड के साथ... धोती पहन के, जनेऊ डाल के, जैसा कहा पंडितों ने।
और इतनी भस्म उन्होंने एक डिब्बी में रखी... चाँदी की डिब्बी में। उसको हमेशा अपने सिरहाने रखते थे वो।
तो जब कुछ दिन हो गए, दिल्ली मैं गई थी, देखा मैंने। तो मैंने कहा "जवाहर भाई, अब बताएं, आप नास्तिक हैं कि आस्तिक?"
तो उनके आँसू आ गए। कहने लगे "महादेवी, आज तो मैं आस्तिक हूँ।"
"क्योंकि यह ठीक है, कमला की भस्म तो मैंने प्रवाहित करा दी लेकिन मुझे लगता है वह है, वह मुझे देखती है।"
दो को मैंने देखा... इतने ज़्यादा अपनी पत्नी के प्रति इतना स्नेह रखना बड़ा मुश्किल है।
सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है कि एक बड़े न्यूज चैनल ने आज करीब 120 लोगों को नौकरी से निकाल दिया
जिसमें ऐसे कई एंकर भी हैं जो पिछले 10,12 सालों से चैनल से जुड़े थे, कई कैमरामैन, एडिटर, ग्राउंड रिपोर्टर।
लोगों का न्यूज से भरोसा उठ गया है, TRP नहीं आ रही है ऐड से रेवेन्यू नहीं बन पा रहा है।
मीडिया अपनी विश्वसनीयता खोता जाएगा तो उसकी कमाई गिरती जाएगी।
गोदी मीडिया से निपटने का एक ही आसान तरीका है घर के टीवी पर भूलकर भी न्यूज चैनल मत लगाइये इससे इनकी TRP गिरेगी और इन्हें ऐड मिलना बंद हो जाएगा।
हो सके तो टाटा स्काई, DTH पर कॉल करके वाकायदा नाम ले लेकर गोदी चैनलों को ब्लॉक करा दें इससे भी बड़ा फायदा होगा।
इस मुहीम को आगे बढ़ाए,
गोदी मीडिया आपकी परेशानी टीवी पर नहीं दिखाती तो आप ऐसा करके उन्हें परेशानी में डाल दो।
जय हिंद
फ्रेंड्स, नरेंद्र मोदी की कथनी और करनी में फर्क देखिए 👇
आज NEET पेपर लीक को लेकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली बार सुनवाई थी।
लेकिन पहली ही सुनवाई में CBI के वकील नहीं पहुंचे और इस वजह से सुनवाई टल गई। अब 3 अगस्त को इस मामले में फिर सुनवाई होगी।
यही नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की असलियत है, जहां 'रीलबाजी' तो खूब हो रही है, लेकिन छात्रों को न्याय देने में ये रत्ती भर भी गंभीर नहीं हैं।
आज बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता पड़ोसी राज्यों से दिल्ली और नोएडा इलाकों में सड़कों पर उतर आए हैं और जहां भी उन्हें कॉकरोच आंदोलन से जुड़ा कोई युवा दिखता है, तो वे उसे बुरी तरह पीट रहे हैं..
पुलिस हर जगह अब मूकदर्शक बन का तमाशा देख रही हैं।
ये है ऑस्ट्रेलिया की मीडिया, जिसने दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों के साथ की गई बर्बरता को दिखाया, सच दिखाया!
और हमारे देश की गोदी मीडिया ने इन प्रदर्शनकारी छात्रों को बदनाम करने की कोशिश की!
गोदी मीडिया इसलिए अपनी इज़्ज़त खो चुकी है!
सुना जाए इरफान को
विश्व के पटल पर हम कैसा भारत ले जाना चाहते हैं
जहां स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सोच हो
जहां राजा राममोहन राय की सोच हो
अम्बेडकर और गाँधी की सोच हो
भगतसिंह और रामप्रसाद बिस्मिल की सोच हो
#irfan
EXTRAORDINARY SPEECH FROM AN ORDINARY REHDI WALA
"Govt talks about Logistics, to increase the GDP of the Country, Govt provides low-interest loans and cheap electricity to big businesses; however, Sir, if you do fail to provide Labourers fair compensation basic wages for their labor, then your GDP is of no use." raising concerns for Poor Labourers of our Nation.
"We earn Rs. 500 & bring it home; we buy salt, soap, rice, and flour, and we pay taxes on those purchases too. We are taxpayers of India; we do not live on anyone's charity." He became breathless as he spoke up for the poor laborers, and he began to weep.
"I have heard somewhere that this country is going through a 'golden age,' yet even today, the majority of Indians survive on less than the minimum income and work as manual laborers." his soft eloquent smile will melt your conscience, make your heart shudder and shake you to your very core; you will feel his anguish, but alas ! the helplessness, what can we do ?
"No one talks about the laborer; the laborer cannot take to the streets, Sir. If he misses even a single day of work, the hearth in his home won't be lit, the laborer cannot protest." & he started crying...No government has the right to inflict such oppression and cruelty upon laborers.
As I watched this video, I was compelled to think again, how can a Labourer, a rehdiwala, without have basic education, only using Google, hassuch a deep knowledge of Economic Crisis, spills the beans on sad State of Affairs of India's Labourers after being a 5 Trillion Economy ? Such a Clarity of thoughts on Subjects beyond his reach n Intellectual. Such ppl rise from the Slums, Life-Struggles, speak their heart, wisdom flows in their words like a fluent river, strikes our spinal cord n keep echoing in our Minds till a long time. Now, I feel proud that such ppl exist, Despite being poor, they are the heritage of this land, the future of our country, possessing an ideology that is bright and pure.
Question is, who is responsible for their pitiful life, who cares for such ppl, who will assure justice to them, who will raise his voice for these poor Labourers?
Let's use our Social Media for them, support them & save them from disappearing like snow-flakes in the air of Ignorance.
Least we can do is, Tag all the Political Party Leaders along with this Video & help them make their Livelihood better. I have done my part, have you ?