‘प्रेम, दया, अपनापन’ ही पीडीए की सहृदयता और सौहार्द का आधार है। सबके जीवन में सुख-समृद्धि के दीप जलें और सब मिलजुलकर आगे बढ़ें!
धनतेरस की हार्दिक बधाई!
सबको सहनशील मनोभाव, सकारात्मक जीवन दृष्टि, सम्यक् स्वास्थ्य, संतोष और शांति का परम धन मिले! यही दीप पर्व पर हमारी शुभकामनाएं हैं।
भाजपा सरकार के मंत्री जी ये भी साफ़ कर दें कि क्या अब बच्चों को ‘मिड-डे मील’ का खाना नहीं परोसा जाएगा क्योंकि वो तो वयस्क हुए नहीं हैं, तो फिर उनका वोटर आईडी या एपिक नंबर कहाँ से आएगा। ये तो लाभार्थी योजना ही है।
इसका मतलब तो ये भी हुआ कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के द्वारा दिए गए आँकड़े के अनुसार अब उत्तर प्रदेश के 1 करोड़ 27 लाख बहुसंख्यक वोटर लाभार्थी नहीं रहेंगे और इसमें अगर अन्य हटाए जा रहे नामों को भी जोड़ दिया जाए तो ये आँकड़ा लगभग 3 करोड़ जनता का हक़-अधिकार छीन लेगा क्योंकि SIR के बाद इतने नाम हटने का समाचार है।
साथ ही जिन सीनियर सिटीज़न बुज़ुर्गों की बहुत ज़्यादा उम्र होने पर फ़िंगरप्रिंट या आँख की समस्या होने पर आइरिस से बायोमेट्रिक संभव नहीं होता, उनसे सरकारी योजनाओं का लाभ छीन लिया जाएगा।
दरअसल भाजपा वोट के बहाने एक बड़ी साज़िश कर रही है। हर पीडीए प्रहरी से अपील है कि केंद्रीय मंत्री जी का ये वीडियो दिखाकर जनता को बताए कि कैसे भाजपा सरकारी योजनाओं का लाभ हड़पने की कोशिश कर रही है। इसीलिए वोट बनना कितना ज़रूरी है। पीडीए प्रहरी उनका वोट बनवाए और उन्हें भाजपा की षड्यंत्रकारी सरकार हटाने के लिए अपनी ‘पीडीए सरकार’ बनाने का संकल्प दिलवाए।
अयोध्या के ‘राम मंदिर में चोरी’, साथ ही ‘भगवान राम व भगवान कृष्ण’ पर की गई एक ‘दुष्मुखी’ तथाकथित उपदेशक की हालिया टिप्पणी के बाद जिस तरह से सनातन समाज भाजपा से बुरी तरह नाराज़ है, उसी डर से भाजपा अब SIR के माध्यम से उस आहत सनातन समाज को ही वोटर लिस्ट से हटा रही है, जो आगामी चुनावों में भाजपा को हराने और हमेशा के लिए हटाने के लिए कमर कसे बैठा है।
दरअसल SIR नागरिकता छीनने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। ये षड्यंत्रकारी भाजपाई वोटर लिस्ट से नाम काटने के बाद आम जनता को नागरिक नहीं मानेंगे और जनता की ज़मीन, खेत, जायदाद, धन-संपत्ति, मिल्कियत, बैंक के पैसे, बैंक लॉकर में रखा बहुमूल्य सामान, गहना-ज़ेवर, आधार कार्ड, पैन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, डिग्री, पासपोर्ट, जाति प्रमाणपत्र, मैरिज सर्टिफ़िकेट, आरक्षण, कॉलोनी-आवास, शौचालय, गैस सब्सिडी व स्कूल में दाख़िले-दोपहर के भोजन व अस्पताल में भर्ती व राशन-पानी जैसे अन्य तरह के बाकी सारे अधिकार भी छीन लेंगे।
वोटर लिस्ट के बहाने जनता को परेशान करने की ख़बरें भाजपा शासित महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात व गोवा तक से लगातार आ रही हैं और बढ़ती भी जा रही हैं। जहाँ अधिकार भी छीने जा रहे हैं और वोट पाने की विभिन्न योजनाओं के नाम पर दिए पैसे वसूलने के लिए महिलाओं तक पर मुक़दमे किए जा रहे हैं। जिसका सबसे अधिक शिकार शोषित, वंचित, ग़रीब ‘पीडीए’ समाज ही हो रहा है।
सच तो ये है कि भाजपा ने अपने मूल समर्थक भी खो दिए हैं, इसीलिए भाजपा ‘वोट’ से नहीं ‘खोट’ से चुनाव जीतने की महा-साज़िश में लगी है।
अब भाजपा हमेशा के लिए हारेगी!
अम्बेडकर नगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ, आगरा जैसे स्थानों पर नवंबर, दिसंबर की विविध तिथियों पर होनेवाले सार्वजनिक आयोजन के संदर्भ में शासन-प्रशासन से अपील है कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़नेवाले किसी भी विवादित व्यक्ति को किसी भी प्रकार से आयोजन की अनुमति न दी जाए।
जिनकी ख़ुद की टिकट उनके अपने ही पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे हैं, वो चुप ही रहें तो ही उनका सम्मान बचा रहेगा।
उन्होंने जो टीका-टिप्पणी की है वो भी किसी ‘दुष्मुखी’ के वचनों से प्रेरित लगती है। भगवान कृष्ण के एक अन्य परमार्थी नाम ‘रणछोड़’ को नकारात्मक भाव में प्रयुक्त करके उन्होंने साबित कर दिया है कि उनका ज्ञान कितना सीमित, संकीर्ण व समाज के लिए किस हद तक घातक है।
रही बात लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री बनने की तो वो यह कहकर किसकी ओर इशारा कर रहे हैं, गोरखपुरवाले इस पुरानी रार-तकरार को समझते हैं। गोरखपुर की जनता को सब दिख रहा है, वो काला चश्मा लगाए नहीं बैठी है।
अब दिल्ली-लखनऊ की ही आपसी लड़ाई नहीं, गोरखपुर के अंदर भी भाजपा में वर्चस्व की अंदरूनी लड़ाई ‘लिखा-पढ़ी’ में बाहर आ गई है।
नोटिस देनेवालों का उप्र का प्रबुद्ध समाज भूला नहीं है।
हमने कभी जो प्रश्न पूछे थे आज फिर पूछ रहे हैं क्योंकि तबसे लेकर आज तक ये प्रश्न अनुत्तरित ही रहे हैं :
- 5 बड़ा या 7?
- विधानसभा बड़ी या लोकसभा?
- राज्य का मंत्री बड़ा या केंद्र का?
- प्रदेश का अध्यक्ष बड़ा या देश का?
जिनके नाम का पर्यायवाची ही ‘कमल’ हो, वो ही आपसी लड़ाई में कमल का निशान पाने के लिए तरस जाएंगे, अगर ऐसा नहीं है तो प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते भाजपा का सबसे पहला टिकट वो अपना ही घोषित करें।
इति ध्वस्तम्!!!
प्रिय काशीवासियों,
सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ के चरणों में नमन करते हुए मैं कहना चाहूँगा कि कल काशी में आप सबने जो स्नेह दिया, उसका मैं अत्यंत आभारी हूँ।
काशी के आशुतोष बाबा विश्वनाथ जी ने हमारे श्री आशुतोष सिन्हा जी व श्री लाल बिहारी यादव जी को ऐतिहासिक वोटों से जिताकर हमें दोहरा आशीर्वाद दिया है। काशी ने डबल इंजन को डबल ज़ीरो कर दिया है।
दरअसल काशी की हमारी दोहरी जीत के पीछे निम्नलिखित कारण निर्णायक रहे :
- मणिकर्णिका के पौराणिक घाट को तोड़ने के पाप की सज़ा मिली है।
- राजमाता पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई जी की प्रतिमा के तिरस्कार करने का सबक इन पापियों को मिला है।
- पूज्य शंकराचार्य जी पर हुए प्रहार का प्रतिकार-प्रतिफल है।
- पाल समाज पर जो लाठी चलाई गई थी ये उसका भी जवाब है।
- दाल मंडी पर हुए अत्याचार ने भाजपा को ध्वस्त कर दिया या कहें दाल मंडी ने भाजपा को दल दिया है।
- जो कहते थे माँ गंगा ने उन्हें बुलाया है, उन्होंने माँ गंगा को भुलाया है। गंगा माँ के साथ भी धोखा हुआ है। नमामि गंगे का अरबों का बजट न जाने कहाँ बह गया।
- बनारस के बुनकरों का हाल पूछने कोई नहीं आया।
- बनारस की हस्तकला चौपट कर दी है।
- बनारस के नाव चलानेवाले तक दुखी हैं। उनकी रोज़ी-रोटी भाजपाइयों को रास नहीं आई। भाजपा की कमीशनख़ोरी ने छोटे-काम व्यवसाय को मार दिया है।
- भाजपा ने बनारस को बाहर के ठेकेदारों को गिरवी रखा दिया है।
क्योटो तो बनाया नहीं, काशी भी उजाड़ दिया। क्योटो नहीं बनाया तो क्योटो का फोटो ही लगा देते।
भाजपा ने बनारस का हित नहीं, अहित किया है।
यूपी वाले विदाई अच्छी करते हैं लेकिन जब काशी वाले विदाई करते हैं तो पर्मानेंट विदाई कर देते हैं। इस बार ‘काशी भाजपा की उदासी’ का कारण बनेगी। 2027 में विश्वप्रसिद्ध बनारस की लौंगलता हमारा मुँह मीठा करेगी।
हम आएंगे तो वाराणसी को ट्रैफ़िक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए मेट्रो का निर्माण करेंगे। हम अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके दिखाएंगे कि ‘विरासत का संरक्षण और विकास से संवर्धन’ साथ-साथ कैसे किया जा सकता है।
काशी का गौरव फिर से वापस लाना हमारा संकल्प है, जिसे हम निभाएंगे।
भाजपा जायेगी, काशी मुस्कुराएगी!
आपका
अखिलेश
जो स्वयं बदले की आग में जलकर अपने चश्मे के रंग जैसे मन के हो गए हैं, उनको जनता वैसे ही सबक सिखाएगी-हराएगी जैसे 2024 के लोकसभा में उनकी पार्टी भाजपा को हराकर सिखाया था और अभी 2026 में विधानपरिषद के चुनावों में भी।
जनता लाठी बाँटनेवालों को नहीं, ‘लैपटॉप’ बाँटनेवालों को चुनेगी।
दक़ियानूसी पुरातनपंथी संकीर्ण मानसिकतावाले दरारजीवी षड्यंत्रकारी इस बार हमेशा के लिए हारेंगे। न उनके अंडरग्राउंड-अनरजिस्टर्ड संगी-साथी काम आएंगे न ही उनका कोई मित्र क्योंकि अहंकारी का कोई भी मित्र नहीं होता है। सलाह है कि वो अपने वाहन-वाहिनी को तैयार रखें क्योंकि अब किसी भी समय विदाई हो सकती है, रिजर्वेशन करवाने का टाइम भी नहीं बचा है।
प्रिय काशीवासियों,
सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ के चरणों में नमन करते हुए मैं कहना चाहूँगा कि कल काशी में आप सबने जो स्नेह दिया, उसका मैं अत्यंत आभारी हूँ।
काशी के आशुतोष बाबा विश्वनाथ जी ने हमारे श्री आशुतोष सिन्हा जी व श्री लाल बिहारी यादव जी को ऐतिहासिक वोटों से जिताकर हमें दोहरा आशीर्वाद दिया है। काशी ने डबल इंजन को डबल ज़ीरो कर दिया है।
दरअसल काशी की हमारी दोहरी जीत के पीछे निम्नलिखित कारण निर्णायक रहे :
- मणिकर्णिका के पौराणिक घाट को तोड़ने के पाप की सज़ा मिली है।
- राजमाता पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई जी की प्रतिमा के तिरस्कार करने का सबक इन पापियों को मिला है।
- पूज्य शंकराचार्य जी पर हुए प्रहार का प्रतिकार-प्रतिफल है।
- पाल समाज पर जो लाठी चलाई गई थी ये उसका भी जवाब है।
- दाल मंडी पर हुए अत्याचार ने भाजपा को ध्वस्त कर दिया या कहें दाल मंडी ने भाजपा को दल दिया है।
- जो कहते थे माँ गंगा ने उन्हें बुलाया है, उन्होंने माँ गंगा को भुलाया है। गंगा माँ के साथ भी धोखा हुआ है। नमामि गंगे का अरबों का बजट न जाने कहाँ बह गया।
- बनारस के बुनकरों का हाल पूछने कोई नहीं आया।
- बनारस की हस्तकला चौपट कर दी है।
- बनारस के नाव चलानेवाले तक दुखी हैं। उनकी रोज़ी-रोटी भाजपाइयों को रास नहीं आई। भाजपा की कमीशनख़ोरी ने छोटे-काम व्यवसाय को मार दिया है।
- भाजपा ने बनारस को बाहर के ठेकेदारों को गिरवी रखा दिया है।
क्योटो तो बनाया नहीं, काशी भी उजाड़ दिया। क्योटो नहीं बनाया तो क्योटो का फोटो ही लगा देते।
भाजपा ने बनारस का हित नहीं, अहित किया है।
यूपी वाले विदाई अच्छी करते हैं लेकिन जब काशी वाले विदाई करते हैं तो पर्मानेंट विदाई कर देते हैं। इस बार ‘काशी भाजपा की उदासी’ का कारण बनेगी। 2027 में विश्वप्रसिद्ध बनारस की लौंगलता हमारा मुँह मीठा करेगी।
हम आएंगे तो वाराणसी को ट्रैफ़िक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए मेट्रो का निर्माण करेंगे। हम अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके दिखाएंगे कि ‘विरासत का संरक्षण और विकास से संवर्धन’ साथ-साथ कैसे किया जा सकता है।
काशी का गौरव फिर से वापस लाना हमारा संकल्प है, जिसे हम निभाएंगे।
भाजपा जायेगी, काशी मुस्कुराएगी!
आपका
अखिलेश
इन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत की हैं।
अब इन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में।
अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी।
उप्र-मप्र के बार्डर पर इनकी नाकाबंदी का बोर्ड लग जाना चाहिए, जिस पर लिखा हो : ‘ईशनिंदा’ करनेवालों का उप्र की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है।
जिसने धर्म-मज़हब नहीं छोड़ा वो अगली बार सम्प्रदायों पर छींटाकशी करने से बाज़ नहीं आयेगा। समझाने की ज़रूरत नहीं अगला नंबर किस का है। नेपाल बार्डर भी बंद करना पड़ेगा नहीं तो उधर से इधर आना ज़्यादा पास पड़ेगा।
लगता है उप्र में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक-धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है। आपस की टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं।