@BPSCOffice काश इसी तरह AEDO परीक्षा को ले के अखबार से ले कर न्यूज चैनल द्वारा आयोग की जो बदनामी होर ही है झूठे आरोप लगाये जा रहे हैं धांधली के उसपे भी कुछ टिप्पणी हो जाती तो मजा ही आ जाता....छात्र भी संतुष्ट हो जाते
इंद्र देव आजकल प्रकृति के नहीं, परेशानियों के मंत्री बन बैठे हैं😁 बरसात भी ऐसी कि जैसे संवेदना नहीं, साज़िश बरस रही हो।
गैस सिलेंडर पहले ही लापता, और अब लकड़ी भी इस अंदाज़ में भिगो दिए मानो घर-घर चूल्हा बुझा कर ही चैन लेंगे
#DelhiRains 😁
Respectfully, Sir, mentorship and knowledge-sharing by senior administrators should be seen as encouragement for students, not inconsistency. Shri Tripurari Sharan ji’s visit was purely academic and motivational. His experience enriches aspirants and upholds, rather than diminishes, institutional values.
Growing old together....its always a pleasure to meet and interact with @_YogendraYadav Ji....Thirteen years have passed yet nothing between us has changed.
विकास का 'वीजा' रिजेक्ट
बिहार को PM मित्र पार्क इसलिए नहीं मिलेगा क्योंकि यहाँ की मिट्टी में 'क्राइटेरिया' की कमी है। नीति निर्माताओं का मानना है कि बिहार अभी टेक्सटाइल हब बनने के लिए बहुत "छोटा" है। आखिर बड़े सपनों के लिए बड़े मानक चाहिए होते हैं, और बिहार तो अभी सिर्फ 10,000 रुपये वाली सरकारी खैरात के 'गोल्ड स्टैंडर्ड' को पूरा करने में व्यस्त है।
योग्यताओं का नया पैमाना
सच तो ये है कि बिहार के लोग हर कसौटी पर खरे उतरते हैं, बशर्ते वह कसौटी मजदूरी या मदद की हो। 10,000 रुपये की पात्रता के लिए हमारे पास अटूट योग्यता है। अगले 5 सालों तक विकास का चश्मा इसी 'क्राइटेरिया' पर टिका रहेगा,अगर आप गरीब बने रहने की शर्तों को पूरा करते हैं, तभी आप बिहार के सच्चे नागरिक कहलाएंगे।
उद्घाटन की नई परिभाषा
यहाँ मेगा टेक्सटाइल पार्कों या औद्योगिक क्रांति की उम्मीद करना बेमानी है। हमारे हिस्से में तो बस 'झटका हाउस' और छोटे-मोटे फीता काट कार्यक्रमों का ही सौभाग्य लिखा है। जब बड़े प्रोजेक्ट्स दिल्ली के दफ्तरों में फाइल बनकर दम तोड़ दें, तो समझ लीजिए कि अब किसी मोहल्ले के 'झटका हाउस' के उद्घाटन का समय करीब है।
In the silence of the 'Final Refuge,' we find the loudest truths about ourselves."
"Antim Ashray" by Shri Tripurari Sharan sir (CIC, Bihar) is more than just a book; it is a meditation on the soul. His eloquence as a writer is a gift to the literary world. If you haven't picked this up yet, you are missing out on one of the finest contemporary works in Hindi literature.
सूर्य पर चादर चढ़ाओ, जुगनुओं के गीत गाओ, हाथ में सत्ता है राजन! पूर्व को पश्चिम बताओ!
मदमस्त हाथी अंकुशों से क्या कभी डरता मिला है? धृतराष्ट्र के चौपट्ट महल में न्याय का पंखा झीला है? सागरो पर बांध डालो रेत के टीले बनाओ, हाथ में सत्ता है राजन! पूर्व को पश्चिम बताओ!
प्रत्येक सुंदर पुष्प को अपराध का युगबोध देना, आरक्षितों की आड़ में संरक्षितों के प्राण लेना, नागफणी से घर सजाओ, तुलसियों को काट खाओ, हाथ में सत्ता है राजन! पूर्व को पश्चिम बताओ!
@rohitbcw today night i accidentally found rohit sir nd his team distributing blanket among the some needy peoples.... great work and effort by rohit sir.... he is master in his teaching skills as well as a nyc human beings... 👏🏻👏🏻