प्रिंसिपल ममता मिश्रा ने बोला “Get Lost, Shut up”, SC/ST एक्ट में दर्ज हो गया केस……!
प्रिंसिपल ममता मिश्रा का यह व्यवहार बिल्कुल अनुचित था। भावावेश उन्होंने अभिभावक से गलत टोन में बात भी की। जिसका उन्हें भी एहसास हुआ और उन्होंने ख़ुद माफ़ी भी माँगी।
लेकिन सिर्फ़ इतनी बात के लिए SC/ST एक्ट में केस दर्ज हो जाना? ये थोड़ा अधिक नहीं है? मामला हरदोई के सनबीम स्कूल का। ग़ज़ब चल रहा है भाई ……..
@MyntraSupport And what compensation for this provided by you
I need that product in this time when lpg is very difficult
Because of you I did not purchase it from market
@MyntraSupport
Facing too much trouble after ordering a induction cookstop from @myntra
I order a induction and after reaching product at my location there delivery partner didn't give me product
I call him again and again
But he didn't give my order and return it
Suffered
शर्मनाक…. शर्मनाक…. शर्मनाक…. शर्मनाक….इससे शर्मनाक ये और क्या करते?
भारत के धुर विरोधी अबरार अहमद को सनराइजर्स लीड्स ने “द हंड्रेड” के ऑक्शन में ख़रीदा है।
अबरार अहमद वही है जो विंग कमांडर अभिनंदन जी पर तंज कसते हुए हमारी आर्मी को टीज कर रहा था। भारत का मजाक उड़ा रहा था।
अब लोग पूछ रहे हैं कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को क्यों खरीदा? वो भी ऐसा खिलाड़ी जो भारत का मजाक उड़ाए?
अबरार अहमद को 2.3 करोड़ में खरीदा गया है।
Complete fraud by @GodrejAppliance
They don't give proper service
I request for 1st service of my godrej ac
And then they told me we can only give dry service and deny wet service
I am thinking about my 2nd godrej ac purchase
Now I drop my mind
The data is flawed. It's simply not possible mathematically.
the IAS IPS recruitment follows reservation percentage. the total number of SC - IAS will be above 15 % of total strength, ST -IAS/IPS will be above 8 %.. and total OBC-IAS/IPS will be above 27 %of total strength.
DU में जो रुचि तिवारी के साथ हुआ, वह वामपंथी-अम्बेडकरवादी छात्र पार्टियों के कारण हुआ, ऐसा मानना मूर्खता है। घटना का सतही कारण तो अवश्य ही ऐसी पार्टियों के छात्र नेता हैं, पर जड़ में क्या है?
जड़ में जातिवादी तुष्टिकरण और ब्राह्मण घृणा के नारों का सामान्यीकरण है। मोदी सरकार की उपलब्धि यही है कि अब भीमवादी खुल्ला घूम रहे हैं। कल तक जो दीवारों पर ‘ब्राह्मण बनिया कैम्पस छोड़ो’, ‘देयर विल बी ब्लड’, ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखा करते थे, अब वह ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’ के नारों से होते हुए, अब एक लड़की के कपड़े फाड़ने पर आ चुकी है क्योंकि उसका नाम ‘तिवारी’ है।
वामपंथी पार्टियों को अब हम नहीं कोसते क्योंकि हम जानते हैं उन्हें सशक्त करने वाले लोग सत्ता में हैं, जो ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का नकली नारा रैलियों में लगा कर एकता का स्वांग रचते हैं।
जेएनयू में हाल ही में कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया, जो एक अच्छा उदाहरण है, पर आगे क्या? कैम्पस में एक छात्रा के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।
आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपराध की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?
यह विषाक्त वातावरण नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ही देन है। नाम उसी का लिया जाएगा जो ई-रिक्शा से वंदे भारत तक हर उपलब्धि का क्रेडिट लेता है। यह क्रेडिट भी मोदी जी का ही है।
चीन ने अकादमिक दुनिया और देश-इंडस्ट्री की ज़रूरतों के बीच की खाई भरने की दिशा में एक और दिलचस्प कदम उठाया है।
चीन ने अपने देश में प्रैक्टिकल पीएचडी देना शुरू किया है-एक ऐसा डॉक्टरेट मॉडल, जिसमें छात्रों का मूल्यांकन लिखित थीसिस एवं के बजाय असली प्रोडक्ट, तकनीक, प्रोजेक्ट और समस्या सुलझाने की क्षमता के आधार पर किया जाता है।
इस नए मॉडल के तहत इंजीनियरिंग के पीएचडी छात्र ऐसे नवाचार प्रस्तुत कर रहे हैं, जो सीधे चीन की बुनियादी संरचना, इंडस्ट्री और तकनीकी ज़रूरतों से जुड़े हैं।
भारत में हर साल लाखों पीएचडी थीसिस जमा होती हैं, जिनमें से अधिकांश का उपयोग डिग्री मिलने के अलावा कहीं और नहीं होता। पूरा मॉडल महज खाना-पूर्ति बनकर रह गया है। AI के दौर में यह संकट और बढ़ गया है-अब कई स्कॉलर्स के सामने चुनौती मौलिक शोध करने की नहीं, बल्कि केवल AI-आधारित प्लेजरिज्म से बचने की रह गई है। भाषा और प्रस्तुति के अलावा शोध का बड़ा हिस्सा AI की मदद से तैयार किया जा रहा है, जिससे मौलिकता और विश्वसनीयता-दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
आज नहीं तो कल, भारत समेत पूरी दुनिया को AI के युग में शोध-आधारित डिग्रियों के अर्थ, मूल्य और मूल्यांकन पद्धति पर नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर होना ही पड़ेगा।
ऐसे में प्रैक्टिकल पीएचडी जैसे प्रयोग इस पूरी बहस को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए मजबूर करते हैं।
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बेशर्म पंडत जैसे नेटफ्लिक्स के वेब सीरीज पर शुभांकर मिश्रा जी ने भी जबर्दस्त तरीके से आवाज उठाया
मनोज वाजपेई और नीरज पांडे ब्राह्मण हैं
फिर भी बेशर्मी देखिए
अब यह लड़ाई सिर्फ सोशल मीडिया पर नही है
बल्कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी हैं
अदालत भी पहुंच चुकी है
छोड़ना नहीं हैं
Priyanka Chaturvedi ji, hats off to you. Your courage and strong, fearless voice are truly remarkable. In an era of divisive politics, those who strive to unite society are always remembered. We sincerely appreciate your efforts.
@priyankac19
राजस्थान के एक होनहार युवा नमन अग्रवाल ने जान दे दी। आईआईटी और वो भी आईआईटी बॉम्बे मिलना किसी भी इंजीनियरिंग छात्र के लिए बड़ी और गर्व की बात होती है। फिर क्या ऐसा हुआ कि जान देने की नौबत आ गई?
कहीं कोई हल्ला नहीं?
कहीं कोई शोर नहीं?
कहीं कोई न्याय की मांग नहीं?
क्यों?