मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में भूख हड़ताल 15वें दिन भी जारी है.
3 जुलाई से बराना नदी किनारे कूपी गांव के पास आदिवासियों का आंदोलन तेज हो गया है, जिसमें मिट्टी और जल सत्याग्रह के साथ 'फांसी सत्याग्रह' भी शामिल है।
छतरपुर में 5,288 और पन्ना में 1,400 परिवार विस्थापन की कगार पर हैं, जिनमें अधिकांश गोंड-कोल आदिवासी समुदाय से हैं।
पूरे देश में प्रदर्शनकारियों को हटाने से अच्छा है, भाजपा सरकार स्वयं ससम्मान हट जाए।
यदि भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने इतिहास पढ़ा होता या स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया होता तो वो जानते कि जन-शक्ति जब हर संभावना से निराश हो जाती है, तो वो ख़ुद एक शक्ति बन जाती है।
भाजपा के राज में लोग जीते-जी अपनी चिता ख़ुद सजा के लेट गये, अब इससे ज़्यादा ‘अच्छे दिन’ भाजपा क्या लाएगी। भाजपा का समय पूरा हुआ।
भाजपा का अंतिम दौर शुरू होता है अब…
#चिता_आंदोलन
#केन_बेतवा_विरोध
2 लेन ही बहुत सुंदर है और रास्ता अच्छा हैं। कौन सा शुमाकर को वहाँ फ़ार्मूला वन चलानी है। धीमी रफ़्तार में प्रकृति की ख़ूबसूरती का आनंद मिलता है। क्यों चाहिए पहाड़ पर चार लेन?
आज से 4 साल पहले मैने ऋषिकेश से भानियावाला रास्ते में सफर किया था, वो रास्ता डबल लेन है, और बहुत घना जंगल है।
वह पर फोर लेन बनाना सही नहीं है।
ये सरासर पर्यावरण को नुकसान है।
NEET है या CHEAT है?
NEET REEXAM में घपलों की ख़बरें बढ़ती जा रही हैं लेकिन भाजपा सरकार में न किसी की ज़िम्मेदारी तय की जाती है, न किसी की जवाबदेही। इस्तीफ़ा देना या दिलवाना तो असंभव बात है।
अभ्यर्थी कह रहे हैं कि कड़वा सच ये है कि भाजपा के संगठन में भी सबसे ऊपर बैठे तथाकथित नैतिक लोग अपने किसी संगी-साथी मंत्री पर दबाव बनाकर इस्तीफ़ा लेने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अपने को फँसता देख, वो मंत्री जी कहीं बाक़ी सारे भाजपाई हिस्सेदारों के घपलों का दबा-छुपा राज़ न खोल दें। यही हाल भाजपा सरकार के हर मंत्रालय का है, इसीलिए भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।
जनता पूछ रही है कि ‘मुख़बिरी और लीक में कोई ऐतिहासिक संबंध होता है क्या?’
छुपे बैठे भ्रष्टाचार की काली कोठरी में
भाजपाई साझेदार हैं लूट की पोटली में
#NTA
#NEET
#NEET_REEXAM
लोगों ने जंगल काटने के खिलाफ आवाज उठाई तो सरकार भी पीछे हटी। फिलहाल कटाई पर रोक लग गई है।पहाड़ पर चार लेन हाइवे की कीमत स्वच्छ हवा और जिंदगी नहीं हो सकती। उत्तराखंड के लोगों ने मिसाल पेश की है।
Well done Manu @realmanubhaker.
आपके छात्रों और GenZ के पक्ष में खड़े हो जाने से समाज का विश्वास और सम्मान आपके प्रति और आप जैसे खिलाड़ियों के प्रति और बढ़ गया है।
🙏
TMC सांसद महुआ मोइत्रा का बयान
आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, JMM, AAP, नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट और शिवसेना (UBT) समेत पूरा विपक्ष ऑल पार्टी मीटिंग से वॉकआउट कर गया।📍
संसदीय कार्य मंत्री ने उन 20 बागी सांसदों को आमंत्रित किया जिनकी अयोग्यता की याचिकाएँ अभी भी स्पीकर के पास लंबित हैं।
टीएमसी की ताकत 28 दिखाई जा रही है, जबकि उनका विलय अभी स्वीकृत नहीं हुआ। 91वें संशोधन के बाद अलग ब्लॉक बनाने की कोई गुंजाइश नहीं।
फिर ये 20 बागी सांसद किस आधार पर मीटिंग में शामिल हो रहे हैं?”विपक्ष ने अपना मजबूत विरोध दर्ज कराया और वॉकआउट किया।
संसद की कार्यवाही में नियमों की इज्जत होनी चाहिए, न कि सियासी चालबाज़ी की।
#Parliament #OppositionWalkout #Democracy #monsoonsession
“उनकी तबीयत बिगड़ रही थी, इसलिए हमने उन्हें शांतिपूर्वक हटाया।”
केन-बेतवा आंदोलनकारियों को हटाने के बाद पुलिस ने बयान दिया।
सोनम जी के स्वास्थ्य की “चिंता” के कारण ही उन्हें भी “शांतिपूर्वक” हटाया गया?
शांति का चोला ओढ़ाकर लोकतंत्र का चीरहरण हो रहा है।
देश में एक आदिवासी राष्ट्रपति भी है लेकिन वह भी इस आंदोलन को नजरअंदाज कर रही हैं, यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, शर्म आनी चाहिए लेकिन आएगी नहीं। @rashtrapatibhvn
मध्य प्रदेश : छतरपुर जिले में केन बेतवा लिंक सहित कई बांध प्रोजेक्ट के विरोध में धरना दे रहे आंदोलनकारियों को आज सुबह पुलिस ने हटा दिया। आमरण अनशन करने वालों को पुलिस सोनम वांगचुक की तरह उठाकर ले गई और हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। महिलाओं को बसों में बैठाकर उनके घर तक छोड़ा जा रहा है।
पिछले करीब 2 हफ्ते से बैराना नदी के पास आंदोलन जारी था। 2 पुरुष लकड़ी की चिताओं पर लेटे थे, जबकि महिलाएं चेहरे–हाथों पर मिट्टी लगाकर प्रदर्शन कर रही थीं।
दरअसल, MP के बुंदेलखंड इलाके में 5 बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इससे तमाम लोग प्रभावित हैं। उनकी घर–जमीनें इस प्रोजेक्ट में जा रही हैं। इसका वह विरोध कर रहे हैं।
केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर रार! 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित; जल, चिता और फांसी सत्याग्रह से हड़कंप
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में भूख हड़ताल 15वें दिन भी जारी है. प्रदर्शनकारी पुनर्वास और विस्थापन पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन ने अतिरिक्त मुआवजे और पुनर्वास की जानकारी दी है.
पूरी खबर : https://t.co/wf5Gn3BqXM
#KenBetwaProject #MadhyaPradesh #Chhatarpur
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ 'जल सत्याग्रह' और भूख हड़ताल कर रहे आदिवासियों को बलपूर्वक हटा दिया गया।
इसके साथ ही धरना दे रहे आदिवासियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी मिल रही है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से इन आदिवासियों की घर और जमीनें छीनी जा रही हैं- इनका जीवन तबाह किया जा रहा है।
इसलिए ये पिछले कई दिनों से अधिग्रहित जमीन के उचित मुआवजे और पुनर्वास के लिए सत्याग्रह कर रहे थे, जिसे BJP सरकार अनसुना कर रही है।
यही BJP का 'आदिवासी विरोधी' चेहरा है- जहां पहले उनके अधिकारों को छीना जाता है और विरोध करने पर आवाज कुचल दी जाती है।
लोकतंत्र में ऐसी तानाशाही की कोई जगह नहीं है।
BJP सरकार को ये दमनकारी रवैया छोड़कर प्रभावित आदिवासियों की बात सुननी चाहिए और परियोजना से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
📍 मध्य प्रदेश
मैं हिंदू हूँ - आहत हूँ
मेरी आस्था को ठेंस पहुँचती है जब
• BJP हनुमान जी के स्वरूप को नचवाती है
• BJP प्रभु राम को छोटा कर उनकी उंगली मोदी के हाथ में थमाती है
• BJP श्रीराम के छोटे कटआउट और मोदी के उनसे बड़े कटआउट लगाती है
BJP प्रभु राम की पुजारी नहीं सिर्फ व्यापारी है
ऋषिकेश में सड़क चौड़ीकरण के लिए लगभग 3,000 पेड़ों की कटाई के विरोध में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
अब धीरे-धीरे लोग जाग रहे हैं। उन्हें सच में अपने पर्यावरण की चिंता है। उन्हें समझ आ गया है कि
“एक पेड़ माँ के नाम” और
जंगल आदमी के नाम”
में कितना बड़ा अंतर है। यही भाजपा का दोहरा चरित्र है।
पिछले 14 दिन से आदिवासी समाज के लोग मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे थे.
वे उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे. फिर खबर आई कि PM ऑफिस ने इनका संज्ञान लिया.
जिसके बाद आज पुलिस ने आंदोलन ही खत्म करा दिया.
खास बात है कि दिल्ली से 600 किलोमीटर दूर हो रहे इस आंदोलन के लिए किसी सेलिब्रिटी ने ना पोस्ट किया, ना ही वीडियो बनाया. क्योंकि इनके पास उतने पैसे नहीं कि ये उनसे पोस्ट करवा सकें.
ऐसा ही हाल स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का था, जो गंगा के लिए 111 दिन तक भूख हड़ताल किए और मर गए.
उनके पास भी पैसे नहीं थे कि वो सेलिब्रिटी लोगों से पोस्ट करवाकर दूसरे गांधी बन सकें.
पुलिस जंतर मंतर ही नहीं, यहां भी भेजी गई है
केन-बेतवा लिंक जैसे प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ छतरपुर ज़िले के कुपी गांव के पास बरना नदी के किनारे मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन को बल प्रयोग कर रोका गया है।
Video by @PTI_News
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।
मप्र के छतरपुर में केन बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों द्वारा जारी चिता अनशन अब समाप्त हो गया है।
लेकिन यहां आदिवासियों की मांगें नही मानी गयी, बल्कि जबरन उन्हें प्रदर्शन स्थल से उठाकर गाड़ियों में ठूसकर ले जाया गया है।
बाकी सब ठीक है।