तीनों चुनाव आयुक्त मिलकर भी फॉर्म 6 में बदलाव नहीं कर सकते- अशोक लवासा
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने साम दाम दंड भेद में फॉर्म 6 से जुड़े दो बड़े विवाद बताए. उनका कहना है कि इलेक्शन कमीशन के पास फॉर्म 6 में बदलाव करने की शक्ति ही नहीं है.
लवासा के मुताबिक 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि बदलाव हुआ है और उस पर Supreme Court की मंज़ूरी है, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ही इससे इनकार कर दिया.
देखिए 'साम-दाम-दंड-भेद' का पूरा एपिसोड इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
Mullon se to inka purana nata hai
Wo toh 2 rupay ke chakkar mein Abdul ko gaali deni padti hai
Nahi toh tel leke Abdul ke pass hee jaate hai saare sanghi
Abbas: 40 cr muslims and 100 cr Hindus are with Modi ji and Yogi ji. Development of country shouldn't stop.
Journalist: But Modi is against you guys
Abbas: No. Congress is against us who have instiled fear in us.
Girl in black mini skirt: Remove that skull cap.
I don't know what will be more difficult for this girl....standing straight with that slouched back and bent neck or accepting the fact that a muslim man is supporting Modi and Yogi.
सब फालतू की बात है |
विदेश से मिला फंड दम से रहा है |
किसी को दिहाड़ी मिल रही है तो किसी को प्रॉपर्टी |
और सकल से मवाली ज्यादा लग रहे हैं छात्र तो बिल्कुल कम |
‘प्रोटेस्ट में कितने लोग आएँगे’ की परिस्थिति से बचने का सबसे उत्तम मार्ग है स्वयं को डिटेन करवा लेना। बैंग्लोर और मुंबई में दो-दो हजार की भीड़ देख कर तिलचट्टों को अपनी लोकप्रियता का अंदाजा था। बहुत आते तो भी 5000 भी न होते। हर राज्य में डिटेंशन की संख्या जोड़ लीजिए, उसमें दो सौ और जोड़ दीजिए जो दिल्ली से आते।
यही कारण है कि इनके नेताओं ने ऐसा एक भी कार्य नहीं किया कि ये हीरो बन कर सीधे जंतर मंतर पर पहुँचते और वहीं से पुलिस द्वारा घसीटे जाते। इसके उलट, दिपके-रंका-दास-राठी आदि ने न केवल अपनी यात्रा और गतिविधि सार्वजनिक की, बल्कि पकड़े जाने से बचने के लिए किसी भी प्रकार का कोई उपाय नहीं किया।
ये चारों ही बहुत उच्च कोटि के फट्टू हैं। 20 जुलाई को भी रंका-दास सोच-समझकर कर नड्डा के घर ही बैठे रहे ताकि वो प्रोटेस्ट की लाठी न खाएँ। दिपके ट्रक पर बैठ कर भागा और ठिगना दहिया बर्गर खाने की कोशिश करता दिखा।
इसीलिए, पुलिस द्वारा फ्लाइट में ही पकड़े जाने से डंडे खाने का, बैरिकेड से घसीटे जाने का कोई झंझट उत्पन्न ही नहीं होता। वैसे तो सरकार से मुझे अधिक आशाएँ हैं नहीं, पर ढंग से कार्य करने दें पुलिस को तो महीने भर में राठी जैसों का ‘देशप्रेम’ बह कर बराबर हो जाएगा।
Jo soch rahe hai democracy khatam kar denge
Unki aisee kutaai hogi ke bachhe ganje paida honge
Jat mat likha kar , teri harkaton se pata chal jata hai tu Jat nahi hai