नियति का स्वभाव बड़ा विचित्र है कभी-कभी वह ऐसा समय लाती है कि वर्षों से संजोया हुआ साहस भी एक ही क्षण में डगमगाता प्रतीत होता है ।
और मन स्वयं को फिर उसी मोड़ पर खड़ा पाता है।
किंतु यह अंत नहीं, बल्कि आत्मबोध की परीक्षा है।
केवल शरणागत हो जाने से विपदाएँ समाप्त नहीं होतीं; शरणागति हमें सही दृष्टि देती है।
जब उस दृष्टि के साथ हम विपदा के मूल कारण को पहचानकर उस पर कर्म करते हैं, तभी उसे जड़ से उखाड़कर अपने मार्ग को प्रशस्त कर सकते हैं 🔱
आख़िरकार ट्विटर पर हमारी असली कामयाबी किस बात में है:——
1. हमे कितने लोग फ़ॉलो करते है
2. या कितने लोगो ने हमको ब्लॉक और म्यूट मार रखा है
फेंको अपने-अपने जवाब बुलेट ट्रेन की स्पीड से !
गुनाह उर्दू शब्द है तो
"गुनाहों का देवता" क्यों? 🤔
"गुनाहों का अल्लाह क्यों नहीं?
हवस भी उर्दू शब्द है तो
"हवस का पुजारी" क्यों? 🤔
"हवस का मौलाना" क्यों नहीं?
यह सब बॉलीवुड वालों कि देन है 😡
@nagin___35 🐍💃
इंदौर से बरसात रूठ गई है , इसलिए इंदौर में जन्मे महान गायक पंडित डॉ किशोर वाधवानी जी अभी रियाज कर रहे हैं,
बस दो दिन में वह राग मेघा गाने वाले है,
फिर झमाझम बारिश शूरू हो जाएगी ☺️👍
@Akhiles40587252 अबे तो किसी चोराहे पे कटोरा ले के क्यों खड़ा नहीं हो जाता,,
पूरे x के tl पे सबसे भीख माँगता फिर रहा है बेवक़ूफ़ ,तुझे अक्ल नहीं है के पैदाइशी पागल है???)