मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी, मौलाना अज़ीम उल्लाह खान, मौलाना पीर मोनीस, मौलाना हसरत मोहानी, मौलाना महमूद हसन, मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मौलाना मुहम्मद अली जौहर, मौलाना अहमद उल्लाह शाह, मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली, मौलाना मज़हर उल हक़, मौलाना अब्दुल कलाम कासमी, मौलाना अहमद सईद देहलवी, मौलाना सैयद अता उल्लाह शाह बुखारी, मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी, मौलाना अब्दुल हामिद बदायूनी, मौलाना हिफज़ुर्रहमान स्योहारवी, मौलाना सज्जाद हैदर इल्दरिम, मौलाना इनायत उल्लाह खान मशरिकी, मौलाना बरकत उल्लाह भोपाली, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ये उन प्रमुख मौलानाओं के नाम हैं जो इस देश को आज़ाद कराने के लिए अंग्रेज़ों से लड़े थे। इनमें से कइयों को अंग्रेज़ों ने मौत की सज़ा देकर शहीद किया। और इनमें ऐसा तो एक भी मौलाना नहीं है, जिसने अंग्रेज़ों की यातनाएँ ना सही हों, जिसने जेल ना काटी हो। ये सिर्फ चंद नाम हैं, इसके अलावा उन मौलानाओं की फेहरिस्त बहुत तवील है, जिन्होंने ग़ुलाम भारत को आज़ाद कराने के लिए आजीवन संघर्ष किया।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक भी मौलाना ऐसा नहीं है, जिसने अंग्रेज़ों से माफी मांगी हो, अंग्रेज़ों से पेंशन ली हो। यह सब बताने का उद्देश्य इतना है कि बीते दिनों एक महंत मुख्यमंत्री ने एक चुनावी सभा में कहा था कि “मौलाना बंगाल की सड़कों पर झाड़ू लगाते दिखाई देंगे।” मैं यह सवाल नहीं करूँगा कि स्वाधीनता संग्राम में उस वर्ग की क्या योगदान है जिस वर्ग से ‘योगी’ आते हैं! लेकिन यह सवाल ज़रूर करूँगा कि जिस “मौलाना वर्ग” ने इस देश को आज़ाद कराने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उस “मौलाना वर्ग” से “योगी” सड़कों पर झाड़ू लगवाना क्यों चाहते हैं? क्या इस देश के प्रबुद्ध वर्ग को, इस देश की अदालतों को, इस देश के चुनाव आयोग को इसमें कुछ भी गलत नहीं दिखा? अगर कोई ‘दूसरे’ समुदाय का नेता यही बयान किसी ‘दूसरे’ समुदाय के धर्म गुरुओं के लिए कह दे! तब उसके खिलाफ एक्शन नहीं होगा? यह दोहरे मापदंड क्यों हैं? क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी मे इस तरह की हिप्पोक्रेसी सामान्य हो गई हैं?
हॉर्मूज के बंद होने से अगर आपको भारत में सिर्फ़ तेल और गैस का खतरा दिख रहा है तो आप भी बीजेपी/आरएसएस के उस राजनीतिक हिंदुत्व के शिकार हैं, जो देश को कमज़ोर करती है।
तेल और गैस के अलावा हॉर्मूज से खाद, केमिकल्स, अनाज और मशीनरी भी आती–जाती है।
उसी हॉर्मूज पर ईरान ने कल माइन्स यानी बम लगा दिए।
23 किलोमीटर चौड़े हॉर्मूज के दरिया में कुछ माइन्स दिखते हैं तो कुछ तलहटी में छिपे हैं, जिन्हें ढूंढना मुश्किल है।
अब कोई भी जहाज वहां से गुजरेगा तो माइन्स फटेंगे और जहाज डूब जाएगा।
नतीज़ा–खाद के दाम 470 डॉलर से 29% बढ़कर 584 डॉलर प्रति टन हो चुके हैं। यानी खाद की एक क्विंटल की बोरी किसान को 5372 रुपए की पड़ेगी।
रबी का सीजन है। किसान कहां से खाद लाएगा? आपकी थाली में अनाज कैसे आएगा?
भारत अपना 40% खाद मिडिल ईस्ट से मंगवाता है। खाद लाने वाले जहाज का बीमा नहीं होता, क्योंकि उस पर हमले या डूबने के 31 कारणों में कोई भी लागू नहीं होता।
अब मान लें कि ईरान युद्ध इसी हफ़्ते खत्म हो जाए।
तो क्या होगा? ईरान को हॉर्मूज में बारूदी सुरंगों को हटाने में 3 महीने लग जाएंगे।
तब तक बारिश आ जाएगी। फिर क्या होगा?
फिर भारत का किसान खाद के लिए लाइन में खड़ा होगा। पुलिस की लाठी खायेगा।
उधर, आप थाली में रोटी का इंतजार करेंगे, इधर रोटी में लाल सुर्ख खून दिखने लगेगा।
आपके ही खानदान का खून। होटल, मॉल, रेस्त्रां में आप वही रोटी, पिज़्ज़ा चबाएंगे।
यानी, आप अपनों का खून चूसेंगे। फिर आप हिंदू–मुसलमान करेंगे, जबकि ख़ुद आदमखोर होंगे। जायोनिस्ट की तरह।
लेकिन, आपने तो कभी ऐसा सोचा ही नहीं।
तो अब सोचिए। देर किस बात की?
:- Soumitra roy
2012 में निर्भया कांड ने पूरे भारत को एकजुट कर दिया था।
राष्ट्रपति भवन तक लोग सड़कों पर उतर आए थे और गुस्सा साफ़-साफ़ कांग्रेस सरकार पर था।
लेकिन 2014 के बाद क्या हुआ?
🚨 प्रज्वल रेवन्ना के मामले पर देश नहीं उबलता
🚨 हाथरस की दरिंदगी पर भी वैसा आक्रोश नहीं दिखा
🚨 उन्नाव में कुलदीप सेंगर पर भी देशभर में ग़ुस्सा नहीं उमड़ा
आख़िर ऐसा क्या बदल गया? 😢
1.मुख्यमंत्री नियुक्ति पत्र देते हुए लड़की का हिजाब खींचता है,
2. कैबिनेट मंत्री उस पर भद्दा मजाक करता है
3. और केंद्रीय मंत्री कहता है लड़की नौकरी करे चाहे जहन्नुम में जाए.
ये तीनों नेता बेटी बचाने वाली पार्टी से ताल्लुक रखते हैं- नेहा सिंह राठौर
दिल्ली ब्लास्ट केस
तीन मुस्लिम डॉक्टरों सहित चार लोगों को रिहा किया
अधिकारियों के मुताबिक एनआईए ने रविवार को दिल्ली लाल किला विस्फोट के सिलसिले में हिरासत में लिए गए तीन मुस्लिम डॉक्टरों सहित चार लोगों को रिहा कर दिया।
मौलाना का खेल, अरण्डी का तेल।
गजबई तमाशा चल रहा है। पोस्ट विजय भाई की है। वे बता रहे हैं, कि गुजरात एटीएस ने एक मोमिन को 4 लीटर अरंडी के तेल के साथ गिरफ्तार किया है।
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आरोप है कि ये सुसरा अरंडी के तेल से रिसिन नामक "सायनाइड से भी घातक" जहर निकाल कर जल स्त्रोतों को कंटेमिनेट कर के भारी तबाही की योजना बना रहा था।
साइंटिफिक दिक्कत ये कि बात तेल से रिसिन नहीं बनता, बीज से बनता है। पर बहरहाल, शायद मेरे पढ़ने या अखबार के छपने में कोई त्रुटि हो।
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सोच रहा हूँ कि कल को ये मौलाना भारी तबाही मचाता तो कम से कम 100-200 किलो रिसिन तो लगता ही। अब चूंकि अरंडी के बीज में रिसिन की कुल मात्रा 1-2 परसेंट ही होती है इसलिए ये मौलाना दसियों हजार किलो तो अरंडी खरीदता।
फिर उसे स्टोर करने के लिए बड़े-बड़े वेयरहाउस बनवाता। फिर क्रशर, बॉयलर, मिक्सर इत्यादि तमाम तरीके की हैवी मशीनरी लगती। खूब शोर होता, केमिकल की सडांध फैलती तो आबादी वाले इलाके में तो हो नहीं पाता।
जंगल में प्लांट लगाता तो बिजली कहाँ से लाता? खुद का बिजलीघर बनवाता? पर मौलाना इतना सोच पाता, उससे पहले ही महामानव की टीम ने उसे दबोच लिया।
वेरी गुड वर्क, जान बचा लिए महामानव जी।
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अब ऐसा नहीं है कि मौलाने ने नोबेल प्राइज वाली कोई खोज कर दी है। दुनिया के हर बीज में खतरनाक टॉक्सिन्स होते ही होते हैं, यह यूनिवर्सल सत्य है।
इसके पीछे प्रकृति की मंशा इतनी भर है कि कोई बीज को खा न पाए और वनस्पति को भी अपनी वृद्धि का मौका मिले। हम इंसान डेढ़ सयाने हैं, इसलिए बीजों को भी डिटॉक्स प्रोसेस कर के खा लेते हैं।
बहरहाल, किसी को बीज जेहाद करनी ही हो तो रिसिन से भी हजारों गुना खतरनाक टॉक्सिन रोजमर्रा के बीजों में मौजूद होते हैं।
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ना, ना, ना।
ये मैं मौलाने को क्लीन चिट नहीं दे रहा। मैं तो बस आपको यह बता रहा हूँ कि "महाविनाश" की योजना की वास्तविक रेसिपी क्या है। हाइप के पीछे की सच्चाई क्या है।
बाकी ATS ने धरा है तो कुछ छोटी-बड़ी खुराफात की योजना बना ही रहा होगा। मैं तो बस नियति के चक्र पर अचंभित हूँ जी। कहाँ तो कल तक मेरे दिमाग में "वोटचोरी, महंगाई, भ्रष्टाचार, रोजगार" जैसी चीजें घूम रही थीं,
सरकार बैकफुट पर लग रही थी, महात्मा जी की साख घटती प्रतीत हो रही थी। देश नींद से उठकर चेतन होता प्रतीत हो रहा था। कि अचानक देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी जामुन की तरह बरसने लगते हैं।
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दस साल में सरकारी आंकड़ों के ही मुताबिक घटी हजारों आतंकी घटनाओं पर मूक रहा मीडिया प्रकट होता है।
हर बात को बढ़ा-चढ़ा कर, नए-नए शब्द ईजाद कर ऐसा "महातबाही" का माहौल बनाता है कि "इंटेलिजेंस फेलियर" अब मुझे "सरकार की उपलब्धि" लग रही है।
राजधानी दिल्ली के धमाके पर मैं सवाल पूछने की बजाय मात्र 10-12 को ही मरने देने के लिए सरकार जी को धन्यवाद ज्ञापित कर रहा हूँ, सरकार की विफलता अब सफलता लग रही है।
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देश का हर मुल्ला अपना दुश्मन प्रतीत हो रहा है। सरकार की नाकामियों से जुड़ी स्मृतियों का विलोपन हो गया है, बस एक ही शब्द याद है, कानों में बार-बार बज रहा है- "भाजप्पा हटी, तो नुन्नी कटी"
और मुल्ले अरण्डी के तेल से तबाही मचाने में लगे हैं।
#झकझकिया
त्योहारों पर दूसरे धर्म को अपशब्द कहकर ये लोग माहौल खराब करना चाहते है।
@bihar_police से अनुरोध है इस व्यक्ति की जाँच करके तुरंत उचित कार्यवाही करें।
सभी साथी बिहार पुलिस को टैग जरूर करें ताकि ये असामाजिक तत्व गिरफ्तार हो सके।
लोकेशन : सांगानेर,जयपुर,राजस्थान
दिनांक : 2 अक्टूबर
दशहरे के दिन हिंदू चरमपंथियों ने "ILove Muhammad" लिखकर रावण का पुतला जलाकर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताखी की। 😡
हेलो @jaipur_police@PoliceRajasthan क्या ये लोग देश भर में दंगे करवाना चाहते है बताए?
मूलाराम नाथ राजस्थान के नागौर रहने वाला असमाजिक तत्व इंस्टाग्राम पर हमारे पैगंबर मोहम्मद साहेब पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है @RajPoliceHelp@PoliceRajasthan@NagaurPolice
मामले को संज्ञान में लेकर उचित करवाई कीजिए और इसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का काम करे।
Vikas Pandey, Resident of Thana Sikandra, Kayar, Jamui, is making indecent comments, which is a threat of social harmony
Dear - @bihar_police@JamuiPolice is requested to register a case and Arreste him ASAP
गंभीर शिकायत – साइबर क्राइम
महाराजगंज के एक इंस्टाग्राम अकाउंट से हमारे
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त.और
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
के ख़िलाफ़ बेहद गंदी
और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। यह नफ़रत फैलाने और धार्मिक भावनाएँ भड़काने की साज़िश है।
यह क़दम सीधे तौर पर IPC 153A (धर्म के आधार पर नफ़रत फैलाना), IPC 295A (धार्मिक भावनाओं का अपमान), और IT Act 2000 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
यूपी पुलिस और साइबर सेल से हमारी माँग है कि इस पर तुरंत FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
@uppolice @maharajganjpolice @cyberdost
#CyberCrime #StopHate #RespectAllReligions