महाराष्ट्र: जब हल जोतने के लिए बैल नहीं मिले, तब खुद को ही बैल बना लिया...
लातूर ज़िले के हाडोलती गांव से एक दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक बुज़ुर्ग किसान दंपती को खेत की बुआई के लिए न तो बैल मिले, न मजदूर और न ही ट्रैक्टर का किराया ��ुकाने की क्षमता बची। मजबूरी में इस 75 वर्षीय दंपती ने खुद को बैलों की जगह हल में जोत लिया।
किसान अंबादास पवार हल खींचते हुए आगे चल रहे हैं और उनकी पत्नी मुक्ताबाई पवार पीछे से हल चला रही हैं। बीते दो वर्षों से यह किसान जोड़ा खुद ही हल चलाकर खेतों में बुआई कर रहा है। किसान अंबादास पवार ने बताया कि भारी बारिश और घाटे के कारण उनकी पूरी लागत भी नहीं निकल पाई, उल्टा खेत पर कर्ज और बढ़ गया है।
जहाँ सर���ार आत्मनिर्भर किसान की बात करती है, वहीं ये तस्वीर एक अलग ही सच्चाई बयां कर रही है — कि कुछ किसान अब भी बुनियादी संसाधनों के लिए तरस रहे हैं।
अंबादास पवार ने सरकार से अपील करते हुए कहा, “हमारी बस इतनी ही विनती है कि किसानों का कर्ज माफ किया जाए, ताकि हम चैन से जी सकें।”
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मुंबई से जियो वालों के फोन आ रहे हैं कि ट्वीट हटा लो, अब उनको क्या पता कि एक नहीं बल्कि 7000 प्लस ट्वीट हो गए हैं और देश में नंबर दो पर Trend कर रहा हैं, मेरे ट्वीट हटाने से कुछ नहीं होगा, आप अपने घटिया नेटवर्क को हटाकर अच्छा दे दीजिए
#Jio_का_घटिया_नेटवर्क
आदिवासियों के हथियारों की कलाकारी वाकई में अद्भुत और अनूठी होती है। ये हथियार न केवल शारीरिक शक्ति का प्रतीक होते हैं, बल्कि उनमें गहराई से जुड़ी होती है—सं��्कृति, परंपरा, और प्रकृति की समझ।
बहुत शानदार कलाकारी की है हथियारों के निर्माण में
पायलट की ट्रेनिंग अगर देश के काम आ सकती है तो,मैं तेज प्रताप यादव हर समय देश की सेवा के लिए तत्पर हूँ।
आपके जानकारी के लिए बता दू की मैने भी पायलट की ट्रेनिंग ले रखी है और देश के लिए मेरी जान भी चली जाए तो अपने आपको भाग्यशाली समझुगा।
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