“यदि ईश्वर मुझे मोक्ष दे तो मैं उस मोक्ष के बदले अपने आराध्य श्री राम की जन्मभूमि मंदिर का निर्माण माँग लूँगा”
- आदरणीय श्रीं अशोक सिंघल जी 🙏🏽
नमन है माँ भारत के ऐसे सपूत को जिन्होंने हिंदू संस्कृति की रक्षा एवं सम्मान के लिए अपना जीवन अर्पण कर दिया 🙏🏽
#100YearsOfAshokJi
विदेशी फंड पर सख्त निगरानी हर देश का अधिकार है, और सुरक्षा के लिए अहम भी!
जानिए FCRA Bill 2026 में क्या है: 🇮🇳
👁️ विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर कड़ी निगरानी।
👤 विदेशी नागरिक NGO के प्रमुख पद पर नहीं रह सकेंगे।
🚫 धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में विदेशी फंड के इस्तेमाल पर रोक।
विदेशी सहयोग स्वीकार, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि! ⚖️
वन निवासियों ने प्रताप को आश्रय, सूचना और रसद उपलब्ध कराकर संघर्ष को जीवित रखा। यह मेवाड के राजचिन्ह के आदर्श को चरितार्थ करने वाला अद्भुत उदाहरण था।#HaldighatiVijay450
महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल एक कुशल नेतृत्व के साथ संघर्ष में सहभागी हुए सभी उमराव योद्धा, मित्र राजा, स्थानीय किसान, व्यापारी, भील और सामान्य जन का एकजुटता का परिणाम था।#HaldighatiVijay450
18 जून 1576 को हल्दीघाटी में मेवाड़ की सेना ने अद्भुत साहस का प्रदर्शन किया। संख्या में कम होने के बावजूद उन्होंने शत्रु को 6 कोस पीछे खदेड़ा।#HaldighatiVijay450
महाराणा प्रताप ने प्रभु श्री राम के आदर्शों को अपनाते हुए महल छोड़ वनवास को चुना और समाज को एकजुट कर मेवाड़ की अस्मिता के लिए संग्राम चुना।#HaldighatiVijay450
जब संघर्ष के कारण संसाधनों का संकट उत्पन्न हुआ, तब भामाशाह ने विशाल कोष महाराणा प्रताप को समर्पित कर दिया। यह राष्ट्रहित में त्याग की अनुपम मिसाल है।#HaldighatiVijay450
हल्दीघाटी के रण में घायल होने के बाद भी चेतक ने अपने स्वामी महाराणा प्रताप को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। स्वामीभक्ति और साहस का ऐसा उदाहरण इतिहास में विरल है।#HaldighatiVijay450
जब मुगल सेना मेवाड़ पर चढ़ आई, तब सरदार राणा पुंजा ने हजारों भील योद्धाओं के साथ महाराणा प्रताप का साथ निभाया। यह मेवाड़ के नगर-ग्राम के वन-पहाड़ निवासियों में अटूट संबंध का प्रतीक है। #HaldighatiVijay450
महाराणा प्रताप के संघर्ष में भील समाज ने केवल सहयोग ही नहीं, बल्कि अपना सर्वस्व अर्पित किया। वीर बालक दुधा भील महाराणा को भोजन सामग्री उपलब्ध करवाते हुए बलिदान हो गया।#HaldighatiVijay450
अगर मुगल सी ने हल्दीघाटी का युद्ध जीता होता तो अकबर अपने प्रिय सेनापतियों को पुरस्कृत करता ना कि दंडित करता। इससे यह साफ निष्कर्ष निकलता है कि अकबर ने हल्दीघाटी के युद्ध में अपनी पराजय स्वीकार की थी। #HaldighatiVijay450
हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप विजय हुए थे। पाठ्य पुस्तकों में अकबर को महान बताने वाली जानकारी देखकर वास्तविक स्थिति से अनभीज्ञ किया गया है। #HaldighatiVijay450
मोहन भागवत जी ने कुछ दिनों पहले कहा कि संघ को समझने के लिए भीतर से देखना होगा। लेकिन संघ की दशकों की मेहनत के कारण संघ को बाहर से भी देखकर कोई भी प्रभावित होगा। - पद्मभूषण श्री कुमार मंगलम बिरला जी
#RSSNagpurVarg2026
83 हजार शाखाएँ, 60 लाख स्वयंसेवक, एक लाख 77 हजार सेवा कार्य, और न जाने कितनी संस्थाएँ - सभी एक दिशा में कार्य करते हैं। यह अभूतपूर्व है। आज़ादी से पहले से लेकर देश में हुए भूकंप, सुनामी और न जाने कितनी चुनौतियों के समय आरएसएस सदैव देश और समाज के साथ खड़ा रहा है। - श्री कुमार मंगलम बिरला जी
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आत्मनिर्भरता एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण है।
आदित्य बिड़ला ग्रुप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में अनेक समानताएँ हैं। हम भी प्राथमिक और उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान, महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास को अत्यंत महत्व देते हैं। - पद्मभूषण कुमार मंगलम बिरला
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